सब्जी बेचने के लिए मजबूर गोल्ड मेडलिस्ट अमरदीप, वायरल वीडियो में दिखा चैंपियन का संघर्ष
थ्रोबॉल गोल्ड मेडलिस्ट अमरदीप रांची के अरगोड़ा चौक पर सब्जी बेचते हुए (फोटो- सोशल मीडिया)
रांची के अरगोड़ा चौक पर अंतरराष्ट्रीय थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप कुमार सब्जी बेच रहे हैं. भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाले अमरदीप की यह कहानी खेल के बाद खिलाड़ियों के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करती है.
Amardeep Kumar Throwball Player: रांची के अरगोड़ा चौक पर सब्जी बेचते एक शख्स का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में अमरदीप कुमार सब्जी तौलते नजर आ रहे हैं और उनके पीछे दीवार पर कई मेडल टंगे दिखाई दे रहे हैं. खास बात यह है कि अमरदीप कोई सामान्य दुकानदार नहीं, बल्कि भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर थ्रोबॉल खेल चुके खिलाड़ी हैं.
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उन्होंने देश के लिए गोल्ड मेडल जीते हैं. ऐसे में वायरल वीडियो में एक तरफ उनकी उपलब्धियों के मेडल नजर आ रहे हैं, तो दूसरी तरफ वह परिवार की जरूरतों के लिए सब्जी बेचते दिख रहे हैं. इस तस्वीर ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि देश के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए खेल के बाद की जिंदगी कितनी सुरक्षित है.
सोशल मीडिया पर अमरदीप का सब्जी बेचते वीडियो वायरल
सोशल मीडिया पर अमरदीप कुमार का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में अंतरराष्ट्रीय थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप रांची के अरगोड़ा चौक स्थित अपने पिता की सब्जी दुकान पर ग्राहकों को सब्जी तौलते नजर आ रहे हैं. वीडियो में उनके पीछे उनके जीते हुए मेडल भी दिखाई दे रहे हैं. अमरदीप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और झारखंड का प्रतिनिधित्व किया है और देश के लिए स्वर्ण पदक जीत चुके हैं. अब परिवार की जिम्मेदारियों में वह अपने पिता का हाथ बंटा रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का कर चुके हैं प्रतिनिधित्व
अमरदीप ने थ्रोबॉल में भारत और झारखंड का प्रतिनिधित्व किया है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए चार स्वर्ण पदक जीते हैं. 10वीं कक्षा के बाद उन्होंने थ्रोबॉल खेलना शुरू किया था और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से उनके खेल करियर की शुरुआत हुई. इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई.
खेल में उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद अमरदीप की आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ. परिवार की जिम्मेदारियों के चलते वह अब भी अपने पिता की सब्जी दुकान पर काम करते हैं.
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मेडल जीतने के बाद भी जारी है संघर्ष
अमरदीप की दुकान पर टंगे मेडल उनकी खेल उपलब्धियों की जानकारी देते हैं. एक तरफ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अनुभव है, तो दूसरी तरफ रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सब्जी की दुकान पर काम करने की मजबूरी है.
अमरदीप ने रोजगार के लिए खेल कोटे के तहत कई बार आवेदन किए हैं. उनका कहना है कि अब तक उन्हें स्थायी रोजगार नहीं मिल पाया है. ऐसे में परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें दुकान पर अपने पिता की मदद करनी पड़ रही है.
2020 में भी सामने आई थी सब्जी बेचने की तस्वीर
अमरदीप के सब्जी बेचने की खबर पहली बार सामने नहीं आई है. वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान भी उनके सब्जी बेचने की तस्वीर और खबर सामने आई थी. उस समय भी वह परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए सब्जी बेच रहे थे. अब करीब छह साल बाद उनका एक वीडियो फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह उसी तरह सब्जी की दुकान पर काम करते नजर आ रहे हैं.
खिलाड़ियों के रोजगार पर फिर उठे सवाल
अमरदीप का मामला खेलों में खिलाड़ियों के लिए रोजगार और आर्थिक सुरक्षा के मुद्दे को भी सामने लाता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों के लिए मेडल के साथ-साथ करियर और रोजगार की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होती है. वायरल वीडियो के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों के खेल करियर के बाद उनके रोजगार और भविष्य की सुरक्षा के लिए क्या पर्याप्त व्यवस्था है.
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