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बिहार में सरकारी जमीन की फर्जी जमाबंदी की होगी जांच, दो माह के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश

Updated at : 05 Apr 2021 1:03 PM (IST)
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बिहार में सरकारी जमीन की फर्जी जमाबंदी की होगी जांच, दो माह के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश

कोसी नदी की जमाबंदी स्थानीय कुछ लोगों द्वारा अपने नाम से कराने के मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है. इस मामले के साथ-साथ सरकारी जमीन की जमाबंदी के सारे मामले की जांच कराने का निर्णय लिया गया है.

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भागलपुर. कोसी नदी की जमाबंदी स्थानीय कुछ लोगों द्वारा अपने नाम से कराने के मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है. इस मामले के साथ-साथ सरकारी जमीन की जमाबंदी के सारे मामले की जांच कराने का निर्णय लिया गया है. दो माह के भीतर सभी मामले की जांच करते हुए रिपोर्ट सौंपने का निर्देश बिहपुर के अंचलाधिकारी को दिया गया है, ताकि जमाबंदी रद्द की जा सके.

ऐसे मामले पर नहीं होता विरोध, इसलिए दब जाती है जालसाजी

सरकारी जमीन की जमाबंदी नियमत: नहीं करायी जा सकती है. बावजूद इसके अगर कोई इसे फर्जी तरीके से करा लेता है, तो उस पर किसी तरह का समाज में विरोध नहीं होता है. चूंकि इसमें किसी की रैयती जमीन का इससे कोई वास्ता नहीं होता है. इस वजह से ऐसे मामले का खुलासा जांच के बाद ही संभव हो पाता है.

पूरे जिले की सरकारी जमीन की तैयार होगी विस्तृत सूची

जिला प्रशासन ने जिले की सभी खाली पड़ी हुई सरकारी जमीन की विस्तृत सूची तैयार करने का निर्णय लिया है. जिला राजस्व शाखा ने सभी 16 अंचल अधिकारी को निर्देश दिया है कि ऐसी सभी सरकारी जमीन की विस्तृत सूची तैयार करें, जिसका उपयोग विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए किया जा सकता है.

इस सूची में कोई जल निकाय, पहाड़, वन क्षेत्र, सड़क व खेल मैदान को शामिल नहीं किया जायेगा. इस तरह की सूची बनाने का काम शुरू कर दिया गया है. 15 अप्रैल को जिला राजस्व शाखा के कार्यालय में होनेवाली जिलास्तरीय बैठक में सभी सीओ को सूची जमा करनी है. ऐसी जमीन का उपयोग भूमिहीन व योजना के योग्य लोगों को बसाने के लिए किया जायेगा. इसके साथ-साथ विभिन्न योजनाओं के लिए उपयोग में लायी जायेगी.

कोसी नदी का यह है मामला

20 दिसंबर 2020 को गुवारीडीह टीले का भ्रमण करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आये थे. उन्होंने टीले की हर स्तर से पूरी रिपोर्ट तैयार कर इसे ऐतिहासिक महत्व का स्थल बनाने का निर्देश जिला प्रशासन को दिया था. जब टीले की जमीन की रिपोर्ट तैयार की जाने लगी, तो पता चला कि टीला की जमाबंदी किसी व्यक्ति के नाम से दर्ज है.

इसके बाद अपर समाहर्ता के कोर्ट में यह मामला प्रशासन ने दर्ज किया, ताकि जमाबंदी रद्द की जा सके. इसकी सुनवाई के दौरान जब जमीन की पड़ताल शुरू हुई, तो पता चला कि कोसी नदी का ही एक एकड़ 20 डिसमिल हिस्सा (जिस पर नदी बह रही है) की जमाबंदी भी किसी ने अपने नाम कर ली है. इसके बाद जमाबंदी रद्द करने के लिए जांच कर प्रस्ताव भेजने का निर्देश सीओ को दिया गया.

अपर समाहर्ता राजेश झा राजा ने कहा कि गुवारीडीह टीले की जमीन की जमाबंदी रद्द करने के साथ ही कोसी नदी के कुछ हिस्से की जमाबंदी की जांच कर इसे रद्द करने का प्रस्ताव भेजने का निर्देश बिहपुर सीओ को दिया गया है. इसके साथ-साथ पूरे बिहपुर अंचल में सरकारी जमीन की जमाबंदी करा लेने के मामले की जांच कर दो माह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश सीओ को दिया गया है, ताकि क्रमबद्ध तरीके से जमाबंदी रद्द की जा सके.

Posted by Ashish Jha

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