गुहार पर गुहार, फिर भी नहीं जागा विभाग, रामनगर स्कूल में बच्चों की बुनियादी जरूरतें अधूरी
रामनगर विद्यालय की भवन जर्जर | Prabhat Khabar Network
सुपौल के मध्य विद्यालय रामनगर में सुविधाओं का घोर अभाव है. 500 मीटर चारदीवारी, अतिरिक्त कक्षा-कक्ष, शौचालय और शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी जरूरतें अधूरी हैं. स्कूल प्रशासन द्वारा बार-बार लिखित सूचना के बावजूद विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है.
कटैया-निर्मली (सुपौल): स्कूल में बच्चे पढ़ने आते हैं, लेकिन जिस परिसर में उन्हें बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलना चाहिए, वहीं कई जरूरी सुविधाएं अब भी अधूरी हैं. पिपरा प्रखंड क्षेत्र के मध्य विद्यालय रामनगर में करीब 500 मीटर चारदीवारी से लेकर अतिरिक्त कक्षा-कक्ष, शौचालय, शुद्ध पेयजल, पुस्तकालय, किचेन भवन और साइकिल स्टैंड तक की जरूरत बनी हुई है. सबसे गंभीर स्थिति वर्ग चार के जर्जर कक्षा-कक्ष की है.
विद्यालय प्रशासन का कहना है कि इन समस्याओं की जानकारी विभाग को एक बार नहीं, बल्कि कई बार लिखित रूप से दी जा चुकी है. इसके बावजूद लंबे समय बाद भी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है. ऐसे में सवाल सिर्फ सुविधाओं की कमी का नहीं, बल्कि यह भी है कि जब विद्यालय की जरूरतें विभाग तक पहुंच चुकी हैं, तो समाधान के लिए कार्रवाई कब होगी.
500 मीटर चारदीवारी का इंतजार, सुरक्षा भी चिंता का विषय
विद्यालय प्रधान योगेन्द्र मंडल के अनुसार स्कूल परिसर में करीब 500 मीटर चारदीवारी की जरूरत है. चारदीवारी नहीं होने से परिसर को व्यवस्थित रखने में परेशानी होती है. साथ ही स्कूल की सुरक्षा और वहां मौजूद संसाधनों के संरक्षण को लेकर भी चिंता बनी रहती है.
चारदीवारी किसी विद्यालय के लिए सिर्फ ईंट-पत्थर की संरचना नहीं होती. यह परिसर को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने की बुनियादी जरूरत है. विद्यालय प्रशासन लंबे समय से इसके निर्माण की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक इस दिशा में अपेक्षित पहल नहीं हो सकी है.
जर्जर कमरे में पढ़ाई, चार अतिरिक्त कक्षों की भी जरूरत
मध्य विद्यालय रामनगर में वर्ग चार का कक्षा-कक्ष जर्जर स्थिति में है. ऐसे कमरे में कक्षा संचालन विद्यालय के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. जर्जर कमरे की मरम्मत की जरूरत के साथ विद्यालय में चार अतिरिक्त कक्षा-कक्ष यानी एसीआर भवन की भी आवश्यकता बतायी गयी है.
पर्याप्त कमरों के अभाव का असर केवल भवन पर नहीं पड़ता. इसका सीधा संबंध बच्चों की पढ़ाई और विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था से है. अलग-अलग कक्षाओं के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध होने पर पढ़ाई अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकती है. फिलहाल विद्यालय को इन अतिरिक्त कमरों के लिए भी विभागीय पहल का इंतजार है.
शौचालय और साफ पानी की जरूरत, बच्चों की रोजमर्रा की परेशानी
विद्यालय में बालिका शौचालय, बालक यूरिनल और अन्य जरूरी शौचालय सुविधाओं की आवश्यकता है. बच्चों के लिए शौचालय कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि विद्यालय में सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण की मूल जरूरत है.
इसी तरह शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था के लिए विद्यालय प्रशासन ने आरओ सिस्टम लगाने की मांग की है. दिनभर स्कूल में रहने वाले बच्चों के लिए साफ पानी की उपलब्धता सीधे उनके स्वास्थ्य और सुविधा से जुड़ी है. इसलिए इन सुविधाओं को जल्द उपलब्ध कराने की जरूरत महसूस की जा रही है.
पुस्तकालय से किचेन भवन तक, अधूरी हैं कई जरूरतें
रामनगर मध्य विद्यालय की समस्याएं केवल चारदीवारी और कक्षा-कक्ष तक सीमित नहीं हैं. विद्यालय में किचेन भवन, मुख्य प्रवेश द्वार एवं ग्रील, पुस्तकालय और साइकिल स्टैंड की भी आवश्यकता बतायी गयी है.
पुस्तकालय होने से बच्चों को पाठ्यक्रम की किताबों के अलावा दूसरी ज्ञानवर्धक सामग्री पढ़ने का अवसर मिलेगा. वहीं साइकिल स्टैंड नहीं होने से विद्यार्थियों को अपने वाहनों को व्यवस्थित रखने में परेशानी होती है. किचेन भवन और मुख्य प्रवेश द्वार जैसी जरूरतें भी विद्यालय के रोजमर्रा के संचालन और आधारभूत ढांचे से जुड़ी हैं.
कई बार लिखित सूचना, फिर भी क्यों नहीं हुआ समाधान?
विद्यालय प्रधान योगेन्द्र मंडल के अनुसार इन समस्याओं के संबंध में विभाग को कई बार लिखित रूप से जानकारी दी जा चुकी है. विद्यालय की जरूरतों और आधारभूत संरचना की कमियों से विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया है.
इसके बावजूद सभी जरूरी सुविधाएं अब तक उपलब्ध नहीं हो सकी हैं. यही स्थिति प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े करती है. यदि विद्यालय की ओर से लगातार समस्याओं की जानकारी दी जा रही है, तो संबंधित स्तर पर उसका आकलन, स्थल निरीक्षण और प्राथमिकता तय करने की प्रक्रिया कितनी आगे बढ़ी, इसका जवाब सामने आना जरूरी है.
स्थल निरीक्षण से मिल सकता है समाधान का रास्ता
विद्यालय प्रशासन ने विभागीय अधिकारियों से विद्यालय का स्थल निरीक्षण कराने की मांग की है. उसका कहना है कि मौके पर वास्तविक स्थिति देखने के बाद चारदीवारी, जर्जर कक्षा-कक्ष, अतिरिक्त कमरों, शौचालय, पेयजल, पुस्तकालय और अन्य सुविधाओं की जरूरत का आकलन किया जा सकता है.
अब स्थानीय स्तर पर उम्मीद विभागीय कार्रवाई पर टिकी है. यदि समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान शुरू होता है, तो विद्यालय का आधारभूत ढांचा बेहतर हो सकता है और बच्चों को पढ़ाई के लिए अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक माहौल मिल सकता है.
फिलहाल मध्य विद्यालय रामनगर की कहानी उन सरकारी विद्यालयों की बुनियादी चुनौतियों की ओर भी ध्यान खींचती है, जहां जरूरतों की जानकारी जिम्मेदार विभाग तक पहुंचने के बाद भी समाधान का इंतजार लंबा होता जा रहा है. विद्यालय प्रशासन की ओर से गुहार जारी है और अब सवाल यही है कि विभाग इन मांगों पर कब ठोस कदम उठाता है.


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