सुपौल में कोशी पुनर्वासित परिवारों का बड़ा प्रदर्शन, बोले- जमीन का हक और पक्का घर मिले बिना नहीं रुकेगा आंदोलन

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धरना मे शामिल लोग | Prabhat Khabar Network

सुपौल में कोशी त्रासदी झेल चुके पुनर्वासित परिवार अपनी बुनियादी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं. जमीन के मालिकाना हक, प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ और होल्डिंग टैक्स माफी जैसी मांगों को लेकर जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया गया.

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Kosi Punarvasit Parivar Protest: सुपौल में कोशी पुनर्वासित परिवारों ने अपनी वर्षों पुरानी मांगों को लेकर जिला मुख्यालय पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे आज भी जमीन के मालिकाना हक, प्रधानमंत्री आवास योजना और होल्डिंग टैक्स जैसे बुनियादी मुद्दों पर न्याय का इंतजार कर रहे हैं.

सुपौल. कोशी की त्रासदी झेलने वाले जिन परिवारों को वर्षों पहले पुनर्वास के नाम पर बसाया गया था, वे आज भी अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं. मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित डिग्री कॉलेज चौक पर सैकड़ों की संख्या में कोशी पुनर्वासित परिवारों ने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया और सरकार तथा जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि पुनर्वास के बाद भी उनकी जिंदगी पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है. वे आज भी जमीन के मालिकाना हक, प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ और होल्डिंग टैक्स माफी जैसी बुनियादी मांगों के समाधान का इंतजार कर रहे हैं.

पुनर्वास के बाद भी नहीं मिली राहत

धरना को संबोधित करते हुए समाजसेवी लव यादव ने कहा कि कोशी त्रासदी के बाद जिन परिवारों को पुनर्वासित किया गया, उन्हें स्थायी सुरक्षा और अधिकार देने के वादे किए गए थे. लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद बड़ी संख्या में परिवार कई आवश्यक सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से वंचित हैं.

उन्होंने कहा कि पुनर्वासित परिवारों से होल्डिंग टैक्स की वसूली करना उचित नहीं है. आर्थिक रूप से कमजोर इन परिवारों पर अतिरिक्त कर का बोझ उनके जीवन को और कठिन बना रहा है. सरकार को तत्काल प्रभाव से इन परिवारों को होल्डिंग टैक्स से मुक्त करना चाहिए.

प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी

धरनार्थियों ने आरोप लगाया कि पुनर्वासित परिवारों को अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना का समुचित लाभ नहीं मिल पाया है. कई परिवार आज भी कच्चे और जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं. बारिश, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों में ऐसे घरों में रहना उनके लिए जोखिम भरा साबित होता है.

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जिन लोगों को पुनर्वास के तहत बसाया गया, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना से जोड़ना चाहिए, ताकि उन्हें सुरक्षित और पक्का आवास मिल सके.

जमीन का मालिकाना हक सबसे बड़ा सवाल

धरना-प्रदर्शन का सबसे अहम मुद्दा जमीन का मालिकाना हक रहा. प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जिन भूखंडों पर पुनर्वासित परिवार वर्षों से रह रहे हैं, उनका विधिवत स्वामित्व उन्हें दिया जाए.

उनका कहना है कि मालिकाना हक नहीं होने के कारण वे हमेशा असुरक्षा की भावना में जीते हैं. कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी उन्हें दिक्कत होती है, क्योंकि भूमि संबंधी दस्तावेज उनके नाम पर नहीं हैं.

स्थानीय लोगों पर इसका क्या असर

धरना में शामिल कई महिलाओं और बुजुर्गों ने कहा कि पुनर्वास का मतलब केवल रहने की जगह देना नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जीने का अधिकार देना भी है. उनका कहना था कि यदि जमीन का अधिकार, पक्का घर और कर राहत जैसी मूलभूत मांगें पूरी नहीं होतीं, तो आने वाली पीढ़ियां भी इसी अस्थिरता में जीवन बिताने को मजबूर होंगी.

स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है. पुनर्वासित परिवारों का मानना है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं की धीमी गति और स्पष्ट निर्णय के अभाव में उनकी समस्याएं लगातार लंबित होती गई हैं.

Kosi Punarvasit Parivar Protest: प्रशासन के सामने बढ़ी जवाबदेही

लव यादव ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और जिला प्रशासन ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं की, तो पुनर्वासित परिवार चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार की जनअसंतोष की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.

धरना-प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, लेकिन आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा. प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष शामिल हुए और सभी ने एक स्वर में सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की.

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Vikash Kumar

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