त्रिवेणीगंज में अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस पर एनएसएस का संदेश, जाति-धर्म के भेद से ऊपर उठने की अपील

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एनएसएस ने आयोजित किया जागरूकता कार्यक्रम | Prabhat Khabar Network

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त्रिवेणीगंज के अनुपलाल यादव महाविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस पर एनएसएस स्वयंसेवकों ने जागरूकता कार्यक्रम चलाया. उन्होंने ग्रामीणों को शांति, सद्भाव और भाईचारे का महत्व बताया. प्राचार्य डॉ. हेमंत कुमार ने कहा कि शांति के बिना राष्ट्र का विकास असंभव है.

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Supaul News: त्रिवेणीगंज (सुपौल): समाज में विकास की रफ्तार तभी टिकाऊ हो सकती है, जब लोगों के बीच शांति, आपसी सम्मान और भाईचारा कायम रहे. इसी संदेश के साथ अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस पर त्रिवेणीगंज में एनएसएस स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों के बीच जागरूकता अभियान चलाया. स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों से जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के आधार पर पैदा होने वाले मतभेदों से ऊपर उठकर सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की.

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अनुपलाल यादव महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना की प्रथम, द्वितीय और तृतीय इकाई के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया. महाविद्यालय परिसर में संगोष्ठी के साथ नगर परिषद लतौना उत्तर के वार्ड नंबर 20 स्थित दलित बस्ती में जागरूकता कार्यक्रम भी हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हेमंत कुमार ने की, जबकि एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी सह जिला नोडल पदाधिकारी प्रो. विद्यानंद यादव ने कार्यक्रम का संचालन किया.

प्राचार्य बोले, शांति के बिना राष्ट्र का विकास संभव नहीं

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. हेमंत कुमार ने कहा कि शांति के बिना राष्ट्र का विकास संभव नहीं है. उन्होंने शांति को मधुरता और भाईचारे की स्थिति बताते हुए कहा कि जहां वैर भावना होती है, वहां समाज का सामान्य जीवन भी प्रभावित होता है.

उन्होंने कहा कि बेहतर घर, कपड़े और दूसरी सुविधाएं होने के बावजूद यदि समाज में शांति नहीं है, तो जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है. इसलिए समाज और राष्ट्र के विकास के लिए आपसी भाईचारा और शांतिपूर्ण वातावरण जरूरी है.

प्राचार्य ने स्वयंसेवकों से समाज में शांति और सद्भाव का संदेश पहुंचाने तथा लोगों को इसके प्रति जागरूक करने की अपील की.

21 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शांति दिवस

अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के संदर्भ में कार्यक्रम में इसके इतिहास पर भी चर्चा की गयी. बताया गया कि दुनिया के देशों के बीच शांति कायम करने और संघर्षों पर विराम लगाने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र ने विश्व शांति दिवस मनाने की घोषणा की थी.

पहली बार 1982 में सितंबर महीने के तीसरे मंगलवार को विश्व शांति दिवस मनाया गया. यह व्यवस्था वर्ष 2001 तक जारी रही. इसके बाद वर्ष 2002 से प्रत्येक वर्ष 21 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस मनाने का निर्णय लिया गया.

इसी क्रम में 21 सितंबर को दुनिया भर में शांति और सद्भाव के महत्व को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं.

जाति और धर्म के भेद से पैदा होती है दूरी

एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो. विद्यानंद यादव ने कहा कि समाज लंबे समय से रंगभेद, जाति, संप्रदाय, भाषा, धर्म और क्षेत्र जैसे विभिन्न आधारों पर पैदा होने वाले भेदभाव से प्रभावित रहा है. इन भेदों के कारण परिवार से लेकर समाज, राज्य और देश तक मतभेद पैदा हो सकते हैं.

उन्होंने कहा कि जब मतभेद वैमनस्य में बदलते हैं, तो इसका असर विकास पर भी पड़ता है. समाज में अशांति होने पर लोगों की ऊर्जा और संसाधन विकास के बजाय विवादों को सुलझाने में खर्च होते हैं.

उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने कई ऐसी समस्याएं हैं, जिनका समाधान संघर्ष के बजाय बातचीत और शांति के माध्यम से ही संभव है.

2026 की थीम ने दिया रोज शांति का संदेश

कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस 2026 की थीम "शांति में निवेश करें- सभी के लिए, हर जगह, हर दिन" को भी केंद्र में रखा गया.

एनएसएस पदाधिकारी ने कहा कि इस थीम का संदेश केवल एक दिन तक सीमित नहीं है. लोगों को अपने परिवार, गांव और समाज से लेकर देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक शांति के वातावरण के निर्माण में योगदान देना चाहिए.

उन्होंने कहा कि कला, साहित्य, सिनेमा और खेल जगत से जुड़े लोग भी अलग-अलग स्तर पर शांति के संदेश को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं. एनएसएस स्वयंसेवक भी अपने आसपास के लोगों को जागरूक कर इस अभियान को मजबूत कर सकते हैं.

ग्रामीणों के बीच पहुंचा भाईचारे का संदेश

महाविद्यालय परिसर में संगोष्ठी के बाद चयनित ग्राम नगर परिषद लतौना उत्तर के वार्ड नंबर 20 स्थित दलित बस्ती में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. यहां स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों के बीच शांति और सद्भाव के महत्व को लेकर संवाद किया.

स्थानीय स्तर पर ऐसे कार्यक्रमों का महत्व इसलिए भी है कि सामाजिक सौहार्द केवल बड़े मंचों पर चर्चा का विषय नहीं है. इसका सीधा संबंध परिवार, पड़ोस और गांव के रोजमर्रा के जीवन से है. आपसी सम्मान और संवाद मजबूत होने से छोटे मतभेदों को बड़े विवाद में बदलने से रोका जा सकता है.

एनएसएस स्वयंसेवकों ने लोगों से समाज में शांति कायम रखने और दूसरों के प्रति सम्मान का व्यवहार करने की अपील की.

Supaul News: शिक्षक और स्वयंसेवक रहे मौजूद

कार्यक्रम में प्रो. देवनारायण यादव और प्रो. प्रदीप प्रकाश ने भी अपने विचार रखे. इस दौरान प्रो. अरुण कुमार, डॉ. अरविंद कुमार, प्रो. शंभू यादव, प्रो. तरुण कुमार सिंह, प्रो. पुलकित यादव, प्रो. विनोद कुमार विमल, प्रो. कुलानंद यादव और प्रो. राजकुमार समेत महाविद्यालय के कई शिक्षक मौजूद रहे.

तृतीय इकाई के कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो. शंभू यादव के अलावा शिक्षकेतर कर्मचारी मृत्युंजय भारती, सुरेंद्र कुमार, भूषण कुमार, दिलीप दिवाकर, गगन कुमार, दिग्दर्शन, रंजन कुमार, रत्नेश कुमार, बालकिशोर कुमार, चिरंजीवी यादव, नागेश्वर, निशांत कुमार और प्रभात कुमार समेत अन्य कर्मचारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए.

एनएसएस स्वयंसेवकों में आस्था कुमारी, सिमरन गोयल, दीपिका कुमारी, राहुल कुमार, शिव कुमार, मिनटी कुमारी, बबली कुमारी, सरिता कुमारी, प्रियांशु कुमारी, आंचल कुमारी, लवली कुमारी, चुनचुन कुमारी, मनीषा कुमारी, प्रियंका कुमारी, काजल कुमारी, नविता, जूली, रंजन, नीतीश, राजेश, राधा, संजू, रोशनी, रिया, रिंकू, बंधन, पूजा, प्रीति, खुशबू, आरती, निशा, चांदनी और अनीशा समेत अन्य स्वयंसेवक मौजूद थे.

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