सदर अस्पताल में दो साल से खराब है ऑक्सीजन प्लांट
Published by : DEEPAK MISHRA Updated At : 23 Sep 2025 10:18 PM
कोरोना काल में ऑक्सीजन संकट से निबटने के लिए प्रधानमंत्री केयर्स फंड से बिहार के विभिन्न जिलों के सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट स्थापित किए गए थे. इनकी क्षमता इतनी थी कि न सिर्फ अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति हो सके बल्कि सिलिंडर भी भरे जा सकें.
प्रतिनिधि,सीवान.कोरोना काल में ऑक्सीजन संकट से निबटने के लिए प्रधानमंत्री केयर्स फंड से बिहार के विभिन्न जिलों के सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट स्थापित किए गए थे. इनकी क्षमता इतनी थी कि न सिर्फ अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति हो सके बल्कि सिलिंडर भी भरे जा सकें. विभागीय उदासीनता और रखरखाव की कमी के कारण सीवान सदर एवं महाराजगंज अनुमंडलीय अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट आज निष्क्रिय पड़ा हैं. सदर अस्पताल का 1000 लीटर प्रति मिनट और महाराजगंज अनुमंडलीय अस्पताल का 500 लीटर प्रति मिनट क्षमता वाला ऑक्सीजन प्लांट पिछले दो साल से अधिक समय से बंद है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल किया था उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 जुलाई 2021 को इन प्लांटों का वर्चुअल उद्घाटन किया था. तकनीकी खराबी और प्रशिक्षित ऑपरेटर की नियुक्ति नहीं होने से दोनों प्लांट अनुपयोगी साबित हो रहे हैं. अस्पताल प्रशासन भी इनकी मरम्मत कराने में गंभीरता नहीं दिखा सका. नतीजतन, 2 नवम्बर 2023 से सदर अस्पताल में किसी भी वार्ड को पाइपलाइन से ऑक्सीजन सप्लाई नहीं हो रही. आपात कक्ष और एसएनसीयू में प्रतिदिन 15 से 20 सिलिंडरों की खपत होती है.एक सिलिंडर पर करीब 600 रुपये खर्च आने से अस्पताल प्रशासन को हर दिन लगभग 10 हजार रुपये ऑक्सीजन खरीद पर खर्च करने पड़ रहे हैं.जबकि चालू प्लांट से यह खर्च पूरी तरह बचाया जा सकता था. राज्य स्वास्थ्य समिति ने सभी सरकारी अस्पतालों में अधिष्ठापित पीएसए ऑक्सीजन प्लांटों और ऑक्सीजन इन्फ्रास्ट्रक्चर की जांच के लिए 24 सितंबर को आठवें चरण का मॉक ड्रिल कराने का आदेश दिया है. कार्यपालक निदेशक सुहर्ष भगत द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि भारत सरकार के निर्देशानुसार इस अभ्यास में प्लांट की कार्यक्षमता, ऑक्सीजन की शुद्धता, मैनिफोल्ड अथवा बेडसाइड पर दबाव, मेडिकल गैस पाइपलाइन सिस्टम की कार्यशीलता आदि का परीक्षण किया जाएगा.सभी अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि प्राप्त आंकड़ों को गूगल फॉर्म पर अपलोड करने के साथ-साथ रिपोर्ट की हस्ताक्षरित प्रति 25 सितम्बर शाम पांच बजे तक राज्य स्वास्थ्य समिति को भेजें.
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