सीवान जिला यक्ष्मा केंद्र में तीन दिन से डॉक्टर नहीं, सीडीओ ने संभाली टीबी ओपीडी

Updated:
विज्ञापन

मॉडल सदर अस्पताल

सीवान जिला यक्ष्मा केंद्र में तीन दिनों से मेडिकल ऑफिसर की अनुपस्थिति के कारण टीबी मरीजों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ रहा है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार को खुद ओपीडी में मरीजों का इलाज करना पड़ा.

विज्ञापन

Siwan News: जिला यक्ष्मा केंद्र में पिछले तीन दिनों से मेडिकल ऑफिसर उपलब्ध नहीं होने के कारण टीबी मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मंगलवार को प्रतिनियुक्त डॉक्टर के योगदान नहीं देने के बाद संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार को खुद ओपीडी में मरीजों का इलाज करना पड़ा. उन्होंने अपने कार्यालय का काम छोड़कर टीबी मरीजों की जांच और उपचार किया.

आपके शहर में

विज्ञापन

जिले में इन दिनों 100 दिन का टीबी उन्मूलन कार्यक्रम भी चल रहा है. ऐसे समय में जिला यक्ष्मा केंद्र में नियमित चिकित्सक की उपलब्धता नहीं होने से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

प्रतिनियुक्त डॉक्टर ने नहीं किया योगदान, ओपीडी की व्यवस्था प्रभावित

करीब छह माह पहले सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद ने सदर प्रखंड के नॉन फंक्शनल एपीएचसी कररूआ में पदस्थापित डॉ. सोनू कुमार की प्रतिनियुक्ति जिला यक्ष्मा केंद्र के ओपीडी में की थी. कररूआ एपीएचसी के फंक्शनल होने के बाद डॉ. सोनू कुमार को वहां की जिम्मेदारी सौंप दी गयी.

इसके बाद तीन दिन पहले सदर प्रखंड के फतेहपुर स्थित नॉन फंक्शनल एपीएचसी में पदस्थापित डॉ. रामू कुमार राम की प्रतिनियुक्ति जिला यक्ष्मा केंद्र में की गयी. हालांकि, मंगलवार को उनके योगदान नहीं देने के कारण ओपीडी संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी.

2019 के बाद नियमित मेडिकल ऑफिसर की नहीं हुई पदस्थापना

जिला यक्ष्मा केंद्र में नियमित मेडिकल ऑफिसर की कमी लंबे समय से बनी हुई है. वर्ष 2019 में विभाग की ओर से पदस्थापित मेडिकल ऑफिसर डॉ. जसीमुद्दीन के ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद यहां नियमित मेडिकल ऑफिसर की पदस्थापना नहीं होने की जानकारी है.

इसके बाद अलग-अलग समय पर दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थापित डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति कर टीबी मरीजों का इलाज कराया जाता रहा. दिसंबर 2023 में डॉ. सुरेंद्र कुमार ने सदर अस्पताल में योगदान दिया था. बाद में उनकी ड्यूटी यक्ष्मा विभाग में लगायी गयी. उन्होंने 16 जनवरी 2024 से टीबी ओपीडी में मरीजों को देखना शुरू किया और फरवरी 2026 तक सेवा दी.

पीजी में चयन के बाद डॉ. सुरेंद्र कुमार 11 मार्च 2026 से एजुकेशन लीव पर चले गये. इसके बाद जिला यक्ष्मा केंद्र में स्थायी चिकित्सक की व्यवस्था नहीं हो सकी.

दो शिफ्ट के निर्देश, लेकिन एक ही शिफ्ट में चल रही टीबी ओपीडी

स्वास्थ्य विभाग के निर्देश के अनुसार सदर अस्पताल की ओपीडी को दो शिफ्ट में संचालित करने का प्रावधान है. पहली शिफ्ट सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक और मौसम के अनुसार दूसरी शिफ्ट शाम 3 से 5 बजे अथवा 4 से 6 बजे तक संचालित करने का निर्देश है.

वहीं, जिला यक्ष्मा केंद्र की टीबी ओपीडी सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक ही संचालित होने की जानकारी है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को खासकर दोपहर बाद पहुंचने पर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

एमडीआर टीबी मरीजों के लिए प्रशिक्षित डॉक्टर की जरूरत

जिला यक्ष्मा केंद्र में चार शैय्या का ड्रग रेसिस्टेंट टीबी सेंटर भी संचालित है. यहां प्रथम श्रेणी की टीबी दवाओं के प्रति प्रतिरोधी मरीजों के इलाज के लिए इनडोर व्यवस्था है.

एमडीआर टीबी के उपचार में प्रशिक्षित चिकित्सक की निगरानी महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में नियमित और प्रशिक्षित मेडिकल ऑफिसर की उपलब्धता मरीजों के इलाज की निरंतरता और स्वास्थ्य निगरानी के लिए जरूरी मानी जाती है.

फिलहाल विभाग के सामने जिला यक्ष्मा केंद्र में स्थायी चिकित्सक की व्यवस्था करने के साथ टीबी ओपीडी को सुचारु रूप से संचालित रखने की चुनौती है.

क्या कहते हैं जिम्मेदार

डॉ. अशोक कुमार, सीडीओ, जिला यक्ष्मा विभाग, सीवान ने कहा कि नए डॉक्टर द्वारा योगदान नहीं देने की सूचना सिविल सर्जन को दे दी गयी है. नियमित डॉक्टर की पदस्थापना के लिए विभाग को पत्र भी भेजा गया है. ओपीडी में डॉक्टर की अनुपस्थिति के दौरान उनके द्वारा मरीजों को देखा जा रहा है.

इसे भी पढ़ें:सारण में गंगा का रौद्र रूप: दिघवारा के अकिलपुर पंचायत के 8 गांव बाढ़ में डूबे, सड़क से घर तक पानी ही पानी

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन