सीवान: नौतन में फीकी रही महावीरी अखाड़े की रौनक, डीजे-आर्केस्ट्रा पर प्रतिबंध से नहीं निकला जुलूस
नहीं उठी अखाड़े पुजा तक रही सीमित लोग माऊस होकर आपसे गये | Prabhat Khabar Network
इस साल नौतन क्षेत्र में महावीरी अखाड़े की पारंपरिक रौनक फीकी रही. डीजे और आर्केस्ट्रा पर प्रतिबंध के चलते जुलूस और मेले का आयोजन नहीं हो सका, जिससे लोगों में मायूसी छाई रही.
Siwan Mahaviri juloos : कानूनी पेंच, प्रशासनिक निर्देश और डीजे-आर्केस्ट्रा पर प्रतिबंध का असर इस वर्ष नौतन क्षेत्र के महावीरी अखाड़ों पर साफ दिखाई दिया. हर वर्ष अखाड़ा जुलूस, मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने के लिए जहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटती थी, वहीं इस बार आयोजन की रौनक फीकी रही. अखाड़ा संचालकों ने कार्यक्रम को केवल बजरंगबली की पूजा-अर्चना तक सीमित रखा.
प्रशासनिक निर्देशों के चलते नहीं निकला अखाड़ा जुलूस
अखाड़ा संचालकों के अनुसार, प्रशासन की ओर से डीजे और आर्केस्ट्रा पर प्रतिबंध तथा आयोजन को लेकर सामने आये कानूनी पेंच को देखते हुए इस वर्ष जुलूस और मेला आयोजित नहीं किया गया. इसके चलते महावीरी अखाड़े नहीं उठे और वर्षों से चली आ रही परंपरा का स्वरूप काफी सीमित रह गया.
मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होने से मायूस हुए लोग
हर वर्ष की तरह इस बार भी ग्रामीण महावीरी अखाड़े, जुलूस, मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने की उम्मीद में थे. लेकिन अखाड़ा नहीं उठने और मेला नहीं लगने से लोगों को मायूसी हाथ लगी. ग्रामीणों का कहना था कि महावीरी अखाड़ा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की वर्षों पुरानी सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है.
विवाद से बचने के लिए आयोजन सीमित रखा
अखाड़ा संचालकों ने बताया कि प्रशासनिक निर्देशों और मौजूदा कानूनी परिस्थितियों को देखते हुए किसी तरह का विवाद या नियमों का उल्लंघन न हो, इसलिए इस वर्ष कार्यक्रम को सीमित रखना ही उचित समझा गया. पूजा-अर्चना कर बजरंगबली का आशीर्वाद लिया गया, लेकिन जुलूस, मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किये गये.
इस वजह से इस वर्ष महावीरी अखाड़े की पारंपरिक रौनक फीकी रही. जिन रास्तों पर हर साल अखाड़े के साथ भीड़ और उत्सव का माहौल दिखाई देता था, वहां इस बार अपेक्षाकृत सन्नाटा नजर आया.
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