सीवान का अनोखा मंदिर, जहां पहुंचते ही खत्म हो जाता है भूत-प्रेत का साया; जानिए 400 साल से ज्यादा पुरानी मान्यता

Updated:
विज्ञापन

सीवान का अनोखा मंदिर

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

बिहार के सीवान में मैरवा धाम स्थित हरिराम ब्रह्म स्थान मंदिर 400 साल से अधिक पुराना है. यहां बुरी आत्माओं से मुक्ति की गहरी मान्यता है, जो भक्तों को दूर-दूर से खींच लाती है.

विज्ञापन

Siwan News : बिहार के सीवान जिले में कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जिनसे लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. इन्हीं में मैरवा धाम स्थित हरिराम ब्रह्म स्थान मंदिर अपनी अलग पहचान रखता है. स्थानीय मान्यता है कि यहां पहुंचने वाले लोगों को भूत-प्रेत और बुरी आत्माओं के कथित प्रभाव से मुक्ति मिलती है. इसी विश्वास के चलते सीवान के अलावा दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु इस मंदिर में पहुंचते हैं.

विज्ञापन

मंदिर में पहुंचते ही बदल जाता है माहौल

स्थानीय लोगों के अनुसार, हरिराम ब्रह्म स्थान मंदिर में खासतौर पर वैसे लोग आते हैं, जो कथित तौर पर बुरी आत्माओं के प्रभाव से परेशान होते हैं. मान्यता है कि मंदिर परिसर में प्रवेश करने के बाद ऐसी शक्तियां अपना प्रभाव दिखाने लगती हैं और कुछ समय बाद व्यक्ति शांत हो जाता है.

इसी धार्मिक विश्वास के कारण इस स्थान को भूत-प्रेत से मुक्ति दिलाने वाले प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है. श्रद्धालु यहां अपनी मन्नत के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं. कई लोग पिंड तैयार कर उसे बांधने की परंपरा भी निभाते हैं.

View on Instagram

400 साल से ज्यादा पुराना बताया जाता है इतिहास

मैरवा-सीवान मुख्य मार्ग पर स्थित यह धार्मिक स्थल करीब 400 वर्ष से अधिक पुराना बताया जाता है. बाबा हरिराम को स्थानीय लोग अपना इष्टदेव मानते हैं. श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने के बाद दोबारा मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और मांगलिक कार्यक्रम भी कराते हैं.

बाबा हरिराम को चढ़ाया जाता है दूध

मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार बाबा हरिराम को मुख्य रूप से दूध का चढ़ावा चढ़ाया जाता है. भक्तों का विश्वास है कि दूध अर्पित करने से बाबा प्रसन्न होते हैं और श्रद्धालुओं पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं.

काशी में 12 वर्षों तक तपस्या की मान्यता

मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यता के अनुसार बाबा हरिराम संत होने के साथ महान तपस्वी भी थे. बताया जाता है कि वे अपने साथ एक भैंस और एक कुत्ता रखते थे और नदी किनारे तपस्या किया करते थे. उस दौर में मैरवा का इलाका जंगलों से घिरा हुआ था.

मंदिर के पुजारी अरविन्द पांडेय के अनुसार, बाबा हरिराम ने काशी में करीब 12 वर्षों तक तपस्या की थी. धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव से वरदान मिलने के बाद उन्हें ‘ब्रह्माधिराज’ की उपाधि मिली और इसके बाद वे प्रेतों के राजा के रूप में प्रसिद्ध हुए.

आखिर क्यों दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु?

हरिराम ब्रह्म स्थान मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इससे जुड़ी धार्मिक मान्यता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां आने के बाद बुरी आत्माओं का कथित प्रभाव खत्म हो जाता है और पीड़ित व्यक्ति को शांति मिलती है.

हालांकि भूत-प्रेत और बुरी आत्माओं से जुड़ी ये बातें धार्मिक आस्था और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं, लेकिन इसी विश्वास के कारण मैरवा का यह मंदिर लंबे समय से लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. सीवान के अलावा उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, दिल्ली और मुंबई समेत कई जगहों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.

आस्था, परंपरा और रहस्य का अनोखा संगम

मैरवा का हरिराम ब्रह्म स्थान मंदिर आज भी आस्था, परंपरा और रहस्य से जुड़ा धार्मिक स्थल माना जाता है. बाबा हरिराम से जुड़ी मान्यताएं और मंदिर की परंपराएं लोगों के बीच पीढ़ियों से सुनाई जाती रही हैं. यही वजह है कि यह स्थान आज भी श्रद्धालुओं और धार्मिक मान्यताओं में रुचि रखने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

सीवान से विवेक प्रजापति की रिपोर्ट

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन