भारत-नेपाल सीमा पर विराजते हैं अनोखे महादेव, शिवलिंग का आकार देख रह जाएंगे हैरान, जानें मंदिर की पूरी कहानी

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बाबा वाल्मीकेश्वर महादेव मंदिर.

सीतामढ़ी के सुरसंड में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बाबा वाल्मीकेश्वर महादेव मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां 10 फीट नीचे विराजमान शिवलिंग की गोकर्ण आकार के कारण विशेष मान्यता है. सीता विवाह से जुड़ी कथाएं इस मंदिर को रामायण काल से जोड़ती हैं.

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Bihar Famous Shiv Temple: सीतामढ़ी. सुरसंड. भारत-नेपाल सीमा पर नगर पंचायत से करीब एक किलोमीटर उत्तर स्थित बाबा वाल्मीकेश्वर महादेव मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां स्थापित शिवलिंग गो कर्ण के आकार का बताया जाता है, जिसके कारण इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है. मान्यता है कि बाबा वाल्मीकेश्वर महादेव पर जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. सावन में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और प्रत्येक सोमवारी को करीब 50 हजार भक्त जलाभिषेक करते हैं.

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Sursand News: जमीन से 10 फीट नीचे विराजमान हैं बाबा

बाबा वाल्मीकेश्वर महादेव का शिवलिंग समतल भूमि से करीब 10 फुट की गहराई में स्थापित है. मंदिर परिसर में एक विशाल नागराज के होने की भी मान्यता है. स्थानीय लोगों के अनुसार नागराज कभी-कभी भक्तों को दर्शन देते हैं और फिर अदृश्य हो जाते हैं.

सीता विवाह से जुड़ी है मंदिर की मान्यता

स्थानीय मान्यता के अनुसार मिथिला के विदेह राजा जनक की पुत्री सीता के विवाह में शामिल होने अयोध्या से आए ऋषि-मुनियों ने यहां पड़ाव डालकर शिवलिंग की पूजा-अर्चना की थी. इसी वजह से इस स्थान को प्राचीन धार्मिक परंपराओं से जोड़कर देखा जाता है.

ऋषि की तपस्या से जुड़ी है प्राचीन कथा

किंवदंती के अनुसार रामायण काल से हजारों वर्ष पहले यहां घना जंगल हुआ करता था. इसी स्थान पर एक ऋषि ने कठोर तपस्या की थी. तपस्या के दौरान उनके शरीर पर दीमक तक लग गयी थी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी.

मान्यता है कि तभी से भारत और नेपाल दोनों देशों के श्रद्धालु यहां पहुंचकर बाबा वाल्मीकेश्वर महादेव का जलाभिषेक करते आ रहे हैं.

श्रावण में उमड़ता है भक्तों का सैलाब

श्रावण मास में मंदिर में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है. खासकर प्रत्येक सोमवारी को करीब 50 हजार भक्त जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. इसमें स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ परिहार प्रखंड और नेपाल के सीमावर्ती गांवों से भी बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल होते हैं.

कई श्रद्धालु साइकिल से पहलेजा-सिमरिया घाट तक जाकर गंगाजल लाते हैं और बाबा वाल्मीकेश्वर महादेव पर अर्पित करते हैं.

महाशिवरात्रि पर निकलती है शिव की भव्य बरात

महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव सेवा समिति की ओर से भगवान शिव की भव्य बरात निकाली जाती है. रात में शिव विवाह का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें भारत के साथ नेपाल से भी हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं.

प्रत्येक सोमवारी की रात होने वाली श्रृंगार पूजा में भी बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं.

श्रावणी मेला से पहले मंदिर को सजाया जाता है

श्रावणी मेला शुरू होने से पहले मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र की साफ-सफाई करायी जाती है. मंदिर का रंग-रोगन कर आकर्षक ढंग से सजाया जाता है. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शिव सेवा समिति के युवक मेला व्यवस्था संभालते हैं. सुरक्षा के लिए स्थानीय थाना पुलिस के साथ महिला कांस्टेबल की भी प्रतिनियुक्ति की जाती है.

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