सीतामढ़ी: महिलाओं ने लिया जंक फूड न खाने का संकल्प, पोषण माह के तहत हुई सामुदायिक बैठक

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फोटो - बैठक में मौजूद यूनिसेफ, बिहार फोर्सज नेटवर्क व गांव विकास मंच के पदाधिकारी व स्थानीय महिलायें. | Prabhat Khabar Network

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पोषण माह के तहत आयोजित एक सामुदायिक बैठक में महिलाओं और बच्चों ने जंक फूड न खाने का संकल्प लिया. यूनिसेफ अधिकारी ने बाज़ार के पैकेट फूड से होने वाले नुकसान बताए और घर के ताज़े खाने की सलाह दी.

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Poshan Maah: सीतामढ़ी जिले के रुन्नीसैदपुर मध्य पंचायत स्थित रून्नी गांव के मनरेगा भवन में गुरुवार को पोषण माह के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण सामुदायिक बैठक का आयोजन किया गया. यह आयोजन बिहार फोर्सज नेटवर्क एवं गांव विकास मंच (जीवीएम) के तत्वावधान में हुआ. इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों ने हिस्सा लिया और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता दिखाते हुए बाजार के पैकेट फूड व जंक फूड नहीं खाने और नहीं खिलाने का संकल्प लिया.

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junk food Awareness: गीत संगीत से हुई शुरुआत

बैठक की शुरुआत जीवीएम की सचिव शमा परवीन के एक जागरूकता गीत से हुई. उन्होंने गाकर संदेश दिया, "छह माह के शिशु को केवल मां का दूध पिलाएंगे, फिर खिचड़ी दलिया खिलाएंगे, सूप सब्जी पिलाएंगे". इस गीत के माध्यम से स्तनपान और शुरुआती पोषण के महत्व को आसानी से समझाया गया.

healthy food campaign: जंक फूड को बताया स्वास्थ्य के लिए घातक

मौके पर मौजूद यूनिसेफ की प्रखंड कोऑर्डिनेटर पूनम कुमारी ने बाजार में मिलने वाले अत्यधिक प्रोसेस्ड और पैकेटबंद फूड से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कुकीज, नमकीन, मैगी, बिस्किट, स्नैक्स, इंस्टेंट सूप, बर्गर, कुरकुरे, सॉफ्ट ड्रिंक और चिप्स जैसी चीजों को स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक बताया. इसकी जगह घर में तैयार किए गए ताजा भोजन, हरी सब्जियां और ताजे फल खाने की सलाह दी गई.

पोस्टरों के माध्यम से दी गई जानकारी

कार्यक्रम में अदिति की डीपीएम पायल सिंह ने आयोजन स्थल की दीवारों पर लगाए गए विभिन्न जागरूकता पोस्टरों के संदेशों को पढ़कर सुनाया. उन्होंने उपस्थित महिलाओं को खाने योग्य पौष्टिक आहार और परहेज करने योग्य हानिकारक पदार्थों की पहचान कराई.

हर टोले में हो ऐसी बैठक

गांव विकास मंच के अध्यक्ष नागेंद्र प्रसाद सिंह ने सुझाव दिया कि पोषण जागरूकता बढ़ाने के लिए ऐसी छोटी-छोटी बैठकों का आयोजन पंचायत के प्रत्येक टोले और मोहल्ले में किया जाना चाहिए. इस मौके पर आशा कार्यकर्ता बसंती कुमारी, सहायिका गीता देवी, सावित्री देवी, अमृता कुमारी, रूबी देवी, मुन्नी खातून, शोभा देवी, नगीना देवी और अनिता देवी समेत कई अन्य महिलाएं मौजूद थीं

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