जमीन पर लगी रोक के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे किसान पक्ष के लोग, सीतामढ़ी के सिटी प्रोजेक्ट पर उठे सवाल
सांकेतिक तस्वीर
सीतामढ़ी में सैटेलाइट सीतापुरम सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े सरकारी आदेश को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. किसानों और जमीन मालिकों ने भूमि बचाओ संघर्ष समिति के माध्यम से रिट याचिका दाखिल कर आदेश रद्द करने की मांग की है. आदेश से जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक से लोगों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं.
Sitamarhi News: सीतामढ़ी. सैटेलाइट सीतापुरम सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े सरकारी आदेश को रद्द करने की मांग को लेकर पटना हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गयी है. भूमि बचाओ संघर्ष समिति से जुड़े छह सदस्यों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वसंत कुमार चौधरी और अधिवक्ता अरविंद कुमार ने याचिका दाखिल की है. मामले का केस नंबर CWJC 12357/2026 है. याचिकाकर्ताओं ने सरकार के आदेश ज्ञापांक 4583, दिनांक 24 अप्रैल 2026 को चुनौती दी है.
छह याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
याचिका बैद्यनाथ हाथी, डॉ. आनंद किशोर, नवीन कुमार सिंह, संतोष कुमार सिंह, रामसागर ठाकुर और प्रेमचंद्र सिंह की ओर से दायर की गयी है. याचिकाकर्ताओं ने सरकारी आदेश की वैधता पर सवाल उठाते हुए उसे रद्द करने की मांग की है.
मामले में मुख्य सचिव के माध्यम से नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव, महानिरीक्षक निबंधन, उपमहानिरीक्षक निबंधन और सीतामढ़ी डीएम को प्रतिवादी बनाया गया है.
24 अप्रैल के सरकारी आदेश को बनाया आधार
याचिका में सरकार के आदेश ज्ञापांक 4583 दिनांक 24 अप्रैल 2026 को चुनौती दी गयी है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आदेश के प्रभाव से जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगी है और निजी संपत्तियों से संबंधित अधिकार प्रभावित हो रहे हैं.
याचिका में कहा गया है कि इस तरह की पाबंदियों के कारण जमीन से जुड़े नागरिक और किसान अपने आवश्यक कार्यों में कठिनाई का सामना कर रहे हैं.
संविधान और भूमि अधिग्रहण कानून का हवाला
याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल याचिका में सरकार के आदेश को संविधान के अनुच्छेद 14 और 300ए के साथ-साथ भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के खिलाफ बताया गया है.
याचिका में निजी संपत्ति को फ्रीज करने और जमीन की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध को नागरिकों के अधिकारों के विपरीत बताया गया है.
किसानों के शिक्षा, इलाज और कृषि कार्य प्रभावित होने का दावा
याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि जमीन पर लगी पाबंदियों का असर किसानों के रोजमर्रा के जीवन पर भी पड़ रहा है. उनके अनुसार, शिक्षा, इलाज और कृषि कार्य जैसी जरूरतों के लिए भी जमीन और उससे जुड़े संसाधनों का उपयोग प्रभावित हुआ है.
याचिका में इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार के संबंधित आदेश में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गयी है.
37 बिंदुओं पर न्याय की गुहार
अधिवक्ताओं के माध्यम से दाखिल याचिका में कुल 37 बिंदुओं पर न्याय की गुहार लगायी गयी है. इसमें सीतामढ़ी क्षेत्र की जमीन की स्थिति और प्रस्तावित परियोजना के प्रभाव को लेकर भी दलीलें दी गयी हैं.
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सीतामढ़ी पहले से ही उपजाऊ क्षेत्र है और सड़क तथा रेल परियोजनाओं के लिए भी जमीन ली जा चुकी है. उनका आरोप है कि वर्तमान सरकारी कदम मनमाना है.
अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी नजर
सैटेलाइट सीतापुरम सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े सरकारी आदेश को चुनौती देने के बाद अब इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर लोगों की नजर है. याचिकाकर्ताओं ने अदालत से संबंधित आदेश को रद्द करने और उनके अधिकारों की रक्षा की मांग की है.
मामले में आगे की सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष और याचिकाकर्ताओं की दलीलों के आधार पर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है.
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