सरकारी स्कूल में ये कैसी आधुनिक व्यवस्था? एग्जाम में अब भी ब्लैकबोर्ड पर लिखे जाते हैं प्रश्न, प्रिंटेड कॉपी की मांग
बच्चों को पढ़ाते हुए शिक्षक की सांकेतिक तस्वीर (AI फोटो)
शिवहर के सरकारी स्कूलों में परीक्षा पद्धति पर सवाल उठ रहे हैं. शिक्षक न्याय मोर्चा बिहार ने सरकार से मांग की है कि परीक्षा के प्रश्न ब्लैकबोर्ड पर लिखने की बजाय प्रिंटेड प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए जाएं.
शिवहर सरकारी स्कूल: जिले के सरकारी विद्यालयों में होने वाली विभिन्न परीक्षाओं में विद्यार्थियों को फिर से प्रिंटेड प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की मांग उठी है. शिक्षक न्याय मोर्चा बिहार ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से वर्तमान परीक्षा पद्धति में बदलाव करने का आग्रह किया है. मोर्चा का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में प्रश्नपत्र लिखने में परीक्षा का काफी समय चला जाता है.
ब्लैकबोर्ड पर लिखे जाते हैं प्रश्न
शिक्षक न्याय मोर्चा बिहार के प्रदेश महासचिव अभय कुमार सिंह ने बयान जारी कर कहा कि सरकारी विद्यालयों में अब नई व्यवस्था के तहत परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं. इसके तहत ई-शिक्षाकोष से प्रश्नपत्र अपलोड कर निकाला जाता है और शिक्षक उसे ब्लैकबोर्ड पर लिखते हैं.
इसके बाद विद्यार्थियों को प्रश्न अपनी उत्तर पुस्तिका में खुद उतारना पड़ता है. प्रश्न लिखने के बाद ही वे उनके उत्तर देना शुरू कर पाते हैं. मोर्चा का कहना है कि इस प्रक्रिया में परीक्षा का महत्वपूर्ण समय प्रश्नपत्र लिखने में ही खर्च हो जाता है.
प्रश्न लिखने में समय जाने से उत्तर अधूरे रहने का दावा
अभय कुमार सिंह के अनुसार, प्रश्नों को उत्तर पुस्तिका में उतारने में समय लगने के कारण कई विद्यार्थी निर्धारित समय के भीतर सभी प्रश्नों के उत्तर नहीं दे पाते हैं. इससे बच्चों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और परीक्षा देने की सहजता भी प्रभावित होती है.
उन्होंने वर्तमान परीक्षा पद्धति को अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों को भी परेशानी हो रही है. शिक्षकों को ब्लैकबोर्ड पर पूरे प्रश्न लिखने पड़ते हैं, जबकि परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को भी प्रश्न उतारने में समय लगाना पड़ता है.
शिक्षा मंत्री से व्यवस्था में सुधार की मांग
शिक्षक न्याय मोर्चा ने शिक्षा मंत्री से मामले पर संज्ञान लेने की मांग की है. मोर्चा की ओर से कहा गया है कि सरकारी विद्यालयों में आयोजित होने वाली विभिन्न परीक्षाओं में विद्यार्थियों को पूर्व की तरह छपे हुए प्रश्नपत्र उपलब्ध कराये जाने चाहिए.
मोर्चा का कहना है कि प्रिंटेड प्रश्नपत्र मिलने से विद्यार्थियों का समय बचेगा और वे परीक्षा के निर्धारित समय का इस्तेमाल उत्तर लिखने में कर सकेंगे. इससे परीक्षा प्रक्रिया भी अधिक सहज हो सकती है.
सरकार से जल्द निर्णय की उम्मीद
अभय कुमार सिंह ने उम्मीद जतायी है कि शिक्षा विभाग इस समस्या का संज्ञान लेकर परीक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार करेगा. शिक्षक न्याय मोर्चा की मांग है कि विद्यार्थियों की सुविधा और परीक्षा के समय को ध्यान में रखते हुए प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की पुरानी व्यवस्था पर फिर विचार किया जाए.
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