निजी वैक्सीनेटरों के बहिष्कार से रोहतास में FMD टीकाकरण की रफ्तार थमी: 72 दिन में महज 55 हजार पशुओं को लगा टीका, 4.65 लाख का लक्ष्य

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सांकेतिक तस्वीर.

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सासाराम में पशु टीकाकरण अभियान की रफ्तार थमी. 72 दिन में केवल 55 हजार पशुओं को लगा टीका, 4.65 लाख का लक्ष्य अधूरा. वैक्सीनेटरों की हड़ताल से स्थिति गंभीर.

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सासाराम (रोहतास). जिले में पशुओं को घातक बीमारियों से बचाने के लिए संचालित खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) राउंड-7 टीकाकरण अभियान पर निजी वैक्सीनेटरों और पशु मित्रों के अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का सीधा असर दिख रहा है. अभियान शुरू हुए लगभग 72 दिन बीत चुके हैं, लेकिन प्रगति बेहद चिंताजनक है. जिले में निर्धारित 4.65 लाख पशुओं के भारी-भरकम लक्ष्य के सापेक्ष अब तक मात्र 55 हजार मवेशियों को ही टीका लगाया जा सका है. निजी कर्मियों की हड़ताल के बाद पूरा दारोमदार सरकारी पशु चिकित्सकों और सीमित कर्मियों पर आ टिका है, जिससे अभियान की गति रेंगने को मजबूर है.

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मानदेय बकाया और 10 लाख के बीमा की मांग पर अड़े वैक्सीनेटर

जिले में वर्षों से घर-घर जाकर पशुओं का टीकाकरण करने वाले निजी वैक्सीनेटरों और पशु मित्रों में विभागीय उपेक्षा को लेकर भारी रोष है. आंदोलनकारी कर्मियों का कहना है कि जोखिम भरा कार्य करने के बावजूद उन्हें न तो नियमित मासिक मानदेय मिलता है और न ही पूर्व में किए गए कई टीकाकरण अभियानों व पशुगणना का पारिश्रमिक दिया गया है. वे बकाया राशि के तत्काल एकमुश्त भुगतान, कार्य के दौरान 10 लाख रुपये का जीवन बीमा और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं. वैक्सीनेटरों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, कार्य बहिष्कार जारी रहेगा.

18 डॉक्टरों का हुआ तबादला, 36 अस्पतालों की कमान महज 9 डॉक्टरों पर

वैक्सीनेटरों की हड़ताल से जूझ रहे पशुपालन विभाग की मुश्किलें चिकित्सकों की भारी किल्लत ने और बढ़ा दी हैं. पिछले महीने जिले से एक साथ 18 पशु चिकित्सकों का स्थानांतरण गैर-जिले में कर दिया गया, जबकि उनकी जगह महज तीन नए डॉक्टरों की ही पोस्टिंग हुई. स्थिति यह है कि जिले के कुल 36 प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों की जिम्मेदारी वर्तमान में केवल 9 डॉक्टरों के कंधों पर है. एक-एक चिकित्सक को कई-कई अस्पतालों का प्रभार संभालना पड़ रहा है. इसके चलते नियमित ओपीडी, आपातकालीन पशु चिकित्सा और अब एफएमडी टीकाकरण अभियान पूरी तरह पटरी से उतर गया है.

वैक्सीन के खराब होने की सता रही चिंता

टीकाकरण की धीमी गति के कारण कोल्ड चेन में रखी लाखों डोज वैक्सीन की गुणवत्ता और एक्सपायरी को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं. यदि समय रहते टीकाकरण की गति नहीं बढ़ी, तो सरकारी संसाधन और दवाइयां बेकार होने की आशंका है. पूरे मामले पर जिला पशु चिकित्सा पदाधिकारी (DHO) डॉ. अविनाश चंद्र प्रभाकर ने बताया कि निजी वैक्सीनेटरों और पशु मित्रों के कार्य बहिष्कार से एफएमडी अभियान की गति प्रभावित हुई है. 4.65 लाख के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 55 हजार पशुओं का ही टीकाकरण हो पाया है. विभाग वैकल्पिक स्तर पर उपलब्ध मानव बल का उपयोग कर अभियान को गति देने की कोशिश में जुटा है.

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