सासाराम में सरकारी स्कूल बना मवेशियों का तबेला, कमरों में रखा घास-भूसा,
कीचड़मय हुआ विद्यालय परिसर
चेनारी के सरकारी स्कूल में गाय-भैंसों का कब्जा, बदबू और गंदगी के बीच बच्चे पढ़ने को मजबूर। शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, प्रशासन मौन।
Sasaram News : सासाराम जिले के चेनारी थाना क्षेत्र के उत्क्रमित मध्य विद्यालय डोईआ में शिक्षा व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आयी है, जो सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है. जिस विद्यालय परिसर में बच्चों की कक्षाएं, प्रार्थना और खेलकूद होना चाहिए, वही परिसर इन दिनों गाय-भैंस के तबेले में तब्दील है. विद्यालय के कमरों में घास, भूसा और मवेशियों से जुड़ी सामग्री रखी है, जबकि परिसर में खुलेआम गाय-भैंस बांधे जा रहे हैं.
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बारिश के बाद परिसर में गोबर व कीचड फैल जाता
बारिश के बाद परिसर में गोबर और कीचड़ की समस्या और बढ़ गयी है. बच्चे घर से स्कूल पहुंचते हैं तो उन्हें पढ़ाई से पहले कीचड़ और गोबर से होकर गुजरना पड़ता है. कई बार मवेशियों के कीचड़ के छींटे कपड़ों पर पड़ जाते हैं तो पैर फिसलने से बच्चे गिर भी जाते हैं. इसके बावजूद उन्हें इसी परिसर में पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
एक कमरे में घास, दूसरे में भूसा
ग्रामीण रवि शंकर कुमार ने बताया कि विद्यालय परिसर में गाय-भैंस बांधे जाने से बच्चों को काफी परेशानी हो रही है. एक कमरे में घास, जबकि दूसरे कमरे में भूसा रखा गया है. उन्होंने कहा कि अधिकारी अब मामले की जानकारी लेने पहुंच रहे हैं. यदि समय रहते कार्रवाई की गयी होती तो छात्र-छात्राओं को इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती.
डीइओ को दिया जा चुका है आवेदन
विद्यालय के शिक्षक विनोद कुमार ने बताया कि स्कूल परिसर फिलहाल भैंस के तबेले जैसा बना हुआ है. एक कमरे में भूसा और दूसरे में गाय-भैंस से संबंधित सामग्री रखी गयी है. परिसर में मवेशियों को बांधा जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस संबंध में पूर्व में तीन-चार बार अंचल कार्यालय, थाना और जिला शिक्षा पदाधिकारी को आवेदन दिया जा चुका है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ.
‘नाक पर रुमाल रखकर पढ़ते हैं’
कक्षा आठ की छात्राओं शिबू कुमारी, काजल कुमारी, सोनाली कुमारी और बीवी कुमारी ने विद्यालय की व्यवस्था पर नाराजगी जतायी. छात्राओं ने कहा कि स्कूल में पर्याप्त बेंच नहीं हैं. गाय-भैंस बांधे जाने के कारण सफाई नहीं हो पाती है. प्रार्थना करने और खेलने तक में परेशानी होती है.
छात्राओं ने कहा कि वे पढ़ने के लिए स्कूल आती हैं, लेकिन यहां गोबर, कीचड़ और बदबू के बीच पढ़ना पड़ता है. शिक्षक जब कक्षा में आते हैं तो इतनी बदबू रहती है कि नाक पर रुमाल रखकर पढ़ाई करनी पड़ती है. छात्राओं ने विद्यालय परिसर से गाय-भैंस और कमरों में रखी घास, भूसा व अन्य सामग्री तत्काल हटाने की मांग की.
जमीन के बदले दी गयी थी दूसरी जमीन
स्थानीय विधायक मुरारी प्रसाद गौतम ने बताया कि जिन व्यक्ति के पूर्वजों ने विद्यालय के लिए जमीन दान की थी, उन्हें विद्यालय की जमीन के बदले दूसरी जगह जमीन दी गयी थी. दूसरी जमीन को लेकर परेशानी के कारण विद्यालय परिसर पर दोबारा कब्जे की स्थिति बनी है.
विधायक ने कहा कि उन्होंने यह मामला शिक्षा मंत्री, जिला शिक्षा पदाधिकारी और दिशा की बैठक में उठाया है. साथ ही प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से भी बात की गयी है. उन्होंने जल्द समस्या का समाधान होने का भरोसा दिया.

अंचल और पुलिस की मदद से हटेगा कब्जा
डीपीओ अरविंद कुमार ओझा ने बताया कि वर्ष 2004 में गांव के ही एक व्यक्ति ने विद्यालय की जमीन के लिए वचनदवा दिया था. इसके बदले उन्हें दूसरी जगह जमीन दी गयी थी. जानकारी मिल रही है कि दूसरी जमीन पर किसी अन्य का कब्जा है और संबंधित परिवार द्वारा करीब एक वर्ष से धीरे-धीरे विद्यालय परिसर में कब्जा किया जा रहा था.
डीपीओ ने कहा कि अंचलाधिकारी और पुलिस प्रशासन से बात कर विद्यालय को कब्जामुक्त कराने का प्रयास किया जायेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी जायेगी.
शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
अब मामला सिर्फ जमीन विवाद तक सीमित नहीं रह गया है. यह बच्चों के शिक्षा के अधिकार, सुरक्षा और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बन गया है. वर्षों से आवेदन दिये जाने के बावजूद यदि स्कूल परिसर मवेशियों के तबेले में बदल गया है तो जिम्मेदार विभागों की भूमिका भी जांच के घेरे में है. अब ग्रामीणों और छात्राओं की नजर इस बात पर है कि प्रशासन का आश्वासन धरातल पर कब उतरता है और विद्यालय को वास्तव में मवेशियों के कब्जे से कब मुक्त कराया जाता है.
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