100 बीघा का मालिक बर्दाश्त नहीं कर सका चरवाहे की 'हिम्मत'; रोहतास में भड़की बदले की 'आग' की पूरी कहानी...

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एआई जेनरेडेट सांकेतिक तस्वीर।

रोहतास जिले के जोगिया गांव में एक मामूली मजदूरी विवाद ने एक परिवार उजाड़ दिया, जहां चंदेश्वर चौधरी की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है. जानिए कैसे यह विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया.

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Yogiya Murder Case : रोहतास के जोगिया गांव में 'जमींदार' अजीत तिवारी के हाथों हुए चरवाहे चंदेश्वर चौधरी की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है. विवाद सिर्फ इतना था कि चंदेश्वर चौधरी के बेटे ने अजीत तिवारी के घर काम छोड़, उसके पटीदार के घर काम शुरू कर दिया था. यह एक मामूली विवाद खून-खराबे में बदल गया. पहले एक हत्या हुई, फिर बदले में लोगों ने अजीत तिवारी का घर जला दिया. करीब 100 बीघा जमीन का मालिक अजीत तिवारी अब पुलिस के कब्जे में है लेकिन इलाके में सन्नाटा पसरा है. लोग अभी भी यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि सामंती सोच ने कैसे एक परिवार को उजाड़ दिया.

पहले जानिए, कौन है अजीत तिवारी, कैसे शुरू हुआ विवाद

स्थानीय लोगों के अनुसार करीब 55 वर्षीय अजीत तिवारी के दो पुत्र हैं. एक पुत्र बाहर रहकर पढ़ाई करता है, जबकि दूसरा गांव में रहकर खेती-बाड़ी देखता है. ग्रामीणों का दावा है कि उनके पास करीब 100 बीघा कृषि भूमि है. इसी जमीन पर गांव के ही चंदेश्वर चौधरी और उनका पुत्र दीपक चौधरी चरवाही का काम करते थे. बाद में दीपक ने वहां काम छोड़ दिया और गांव के ही रहनेवाले अजीत तिवारी के पटीदार अरुण तिवारी के यहां काम करने लगा.

ग्रामीणों के अनुसार, अरुण तिवारी के यहां काम करने की वजह से अजीत तिवारी दीपक से नाराज चल रहा था. इसी बीच मजदूरी के बकाये रकम को लेकर भी दोनों पक्षों में विवाद था. दीपक का कहना है कि अजीत तिवारी के यहां उसके पिता चंदेश्वर की मजदूरी का पैसा बकाया था, जबकि अजीत तिवारी का दावा था कि मजदूरी का हिसाब पहले ही चुकता हो चुका था. आगे वीडियो में ग्रामीण से जानिए विवाद और फिर हुई घटना की कहानी...

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हत्या से पहले और अगले दिन क्या हुआ?

ग्रामीणों के अनुसार, मंगलवार की शाम अजीत तिवारी के यहां पार्टी चल रही थी और डीजे बज रहा था. इसी दौरान चंदेश्वर को शराब लाने के लिए कहा गया. बताया जाता है कि वह उस रात नहीं आए. बुधवार सुबह करीब छह बजे चंदेश्वर चौधरी अपने परिचित केदार चौधरी के साथ अजीत तिवारी के बुलावे पर उनके दलान पहुंचे थे.

केदार चौधरी ने ग्रामीणों और पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि जैसे ही दोनों परिसर के अंदर पहुंचे, अजीत तिवारी ने चंदेश्वर चौधरी का हाथ पकड़कर मारपीट शुरू कर दी. इसी दौरान वह जान बचाकर बाहर भाग निकले. भागते समय उन्हें गोली चलने की आवाज सुनाई दी. उन्होंने तत्काल गांव वालों को घटना की सूचना दी. आरोप है कि इसके बाद अजीत तिवारी घायल चंदेश्वर चौधरी को अपनी टाटा सफारी में बैठाकर वहां से फरार हो गए. बाद में चंदेश्वर का शव दिनारा क्षेत्र में सूरतापुर नहर के समीप से बरामद किया गया.

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, दलान और गाड़ियों में लगाई आग

घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा. आक्रोशित लोगों ने आरोपित के दलान और परिसर में जमकर तोड़फोड़ की. आक्रोशित लोगों ने आरोपी के घर के अलावा हार्वेस्टर, ट्रैक्टर, कार समेत कई वाहनों में आग लगा दी. हालात इतने बिगड़ गए कि स्थिति पर नियंत्रण पाने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी.

हालात को नियंत्रित करने के लिए बिक्रमगंज डीएसपी कई थानों की पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे. बाद में रोहतास के पुलिस अधीक्षक रौशन कुमार भी घटनास्थल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. 

मौके पर बरामद शराब की बोतलें
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अब जोगिया में क्या स्थिति है?

हत्या के दूसरे दिन गुरुवार को जोगिया गांव में सन्नाटा पसरा रहा. एहतियातन बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. प्राथमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र में पुलिस का अस्थायी कैंप बनाया गया है. महिला और पुरुष पुलिसकर्मी लगातार गश्त कर रहे हैं.

गांव के कई लोग घरों में सिमटे हुए हैं और पूरे इलाके में तनाव का माहौल है. पुलिस किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए स्थिति पर नजर रख रही है.

गाड़ी में लगाया गया आग

पुलिस की कार्रवाई क्या है?

मृतक के पुत्र दीपक चौधरी के बयान पर अजीत तिवारी समेत पांच लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गयी है. बिक्रमगंज एसडीपीओ सिंधुशेखर सिंह के अनुसार, मुख्य आरोपी अजीत तिवारी को गाजीपुर जिले से गिरफ्तार किया गया है और उसे दिनारा थाना लाकर पूछताछ की जा रही है.

पुलिस का कहना है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. पूछताछ में सामने आने वाले तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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एक मजदूरी विवाद, जिसने परिवार उजाड़ दिया

जोगिया की इस घटना में एक ओर जहां पुलिस हत्या की गुत्थी सुलझाने में जुटी है, वहीं चंदेश्वर चौधरी के परिवार के सामने सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है. जिस मजदूरी के विवाद ने शुरुआत में दो पक्षों के बीच तनाव पैदा किया, वही विवाद आखिरकार एक परिवार से उसका मुखिया छीनने और पूरे गांव में दहशत फैलाने तक पहुंच गया.

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विकाश झा

लेखक के बारे में

By विकाश झा

विकाश झा डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में छह वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं. उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में स्नातक तथा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है. स्पोर्ट्स, हाइपरलोकल और पॉलिटिकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं. क्रिकेट, समाज और राजनीति से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष पकड़ है. वे तथ्य आधारित, प्रभावशाली और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करने में रुचि रखते हैं.

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