सासाराम: भोजपुरी में रामचरितमानस पुस्तक का लोकार्पण, गीता घाट आश्रम में भक्ति और साहित्य का संगम

पुस्तक का लोकार्पण
सासाराम के गीता घाट योग आश्रम में भोजपुरी में रचित रामचरितमानस के संक्षिप्त संस्करण का भव्य लोकार्पण हुआ। इस आयोजन ने धार्मिक आस्था, साहित्य और स्थानीय संस्कृति को एक साथ पिरोया।
Sasaram News : रोहतास जिले के सासाराम शहर में तकिया मोहल्ला स्थित लालगंज नहर के पास गीता घाट योग आश्रम में भोजपुरी भाषा में लिखी गई रामचरितमानस के संक्षिप्त संस्करण का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में धार्मिक आस्था, साहित्य और स्थानीय संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला. ब्रह्मचारी शंकरानंद जी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साहित्य प्रेमी और समाजसेवी शामिल हुए.
कार्यक्रम की शुरुआत बेहद शांत और आध्यात्मिक माहौल में हुई, जहां उपस्थित लोगों ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को याद करते हुए पुस्तक के महत्व को समझा. जैसे ही पुस्तक का लोकार्पण हुआ, पूरा आश्रम जयकारों से गूंज उठा.
मातृभाषा में रामकथा सुनने का मिलेगा अवसर
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि भोजपुरी में रामचरितमानस का यह संक्षिप्त संस्करण क्षेत्र के लोगों के लिए बेहद खास है. अब वे अपनी मातृभाषा में भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्श और मर्यादा को आसानी से समझ सकेंगे. खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह पुस्तक ज्ञान और भक्ति का सरल माध्यम बनेगी.
वक्ताओं ने यह भी कहा कि भाषा ही संस्कृति की पहचान होती है और जब धर्मग्रंथ अपनी ही भाषा में उपलब्ध होते हैं, तो उनका प्रभाव और गहरा होता है.
सनातन परंपरा को मजबूत करने की पहल
ब्रह्मचारी शंकरानंद जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को जीवित रखने में धार्मिक ग्रंथों की अहम भूमिका होती है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब लोग अपनी मातृभाषा में धर्मग्रंथ पढ़ते हैं, तो उनमें नैतिकता, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है.
उन्होंने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की पहल आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने में मददगार साबित होगी.
रचनाकारों और सहयोगियों का हुआ सम्मान
इस खास मौके पर पुस्तक के रचनाकार और इसके प्रकाशन में सहयोग देने वाले लोगों को सम्मानित किया गया. सभी ने इस प्रयास की सराहना की और इसे समाज के लिए उपयोगी बताया.
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने पुस्तक का अवलोकन भी किया और इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का संकल्प लिया. कई श्रद्धालुओं ने कहा कि यह पुस्तक गांव-गांव तक पहुंचनी चाहिए ताकि हर कोई भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा ले सके.
मंगल आरती और प्रसाद के साथ हुआ समापन
समारोह का समापन मंगल आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ. पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना रहा. आश्रम परिसर में मौजूद हर व्यक्ति इस आयोजन से भावुक और प्रेरित नजर आया.
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