सारण में खाद की ऑनलाइन बुकिंग से किसान परेशान, पीओएस मशीन से वितरण बहाल करने की मांग
सारण में यूरिया और डीएपी खाद की कृत्रिम किल्लत से किसान परेशान हैं. ऑनलाइन बुकिंग और फार्मर आईडी की जटिल प्रक्रिया के कारण खेती पर संकट मंडरा रहा है.
Chhapra News: सारण जिले में खाद की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद नई ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था के कारण किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इस प्रक्रिया से सबसे अधिक परेशानी बटाईदार किसानों को हो रही है. इस समय धान की बालियां निकलने के कगार पर हैं और मक्का, अरहर सहित सब्जियों की खेती में भी यूरिया व डीएपी की भारी आवश्यकता है. ऐसे में समय पर खाद नहीं मिल पाने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.
बटाईदार किसानों के सामने फार्मर आईडी और जमीन के रिकॉर्ड का संकट
किसानों का कहना है कि यूरिया की कालाबाजारी रोकने के उद्देश्य से सरकार द्वारा ऑनलाइन उठाव व्यवस्था लागू करना एक सराहनीय कदम है, लेकिन धरातल पर व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ रही हैं.
जिले की साठ फीसदी से अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है. कई किसान मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी जटिलताओं से परिचित नहीं हैं. पोर्टल पर आधार नंबर दर्ज करने के बाद जमीन का खेसरा और जमाबंदी विवरण मांगा जा रहा है. जमीन का रिकॉर्ड आधार से लिंक नहीं होने पर आवेदन सीधे निरस्त हो रहे हैं. सबसे विकट स्थिति बटाई पर खेती करने वाले किसानों की है, जिनके पास अपनी जमीन के कागजात या फार्मर आईडी नहीं है.
साइबर कैफे के लगाने पड़ रहे चक्कर, पीओएस व्यवस्था की मांग
ऑनलाइन प्रक्रिया की तकनीकी समझ न होने के कारण किसानों को प्रखंड मुख्यालयों और स्थानीय बाजारों के साइबर कैफे के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जहां उनसे प्रति आवेदन 50 से 100 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है.
परेशान किसानों ने मांग की है कि पूर्व की भांति उर्वरक बिक्री केंद्रों पर पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) मशीन के माध्यम से बायोमेट्रिक सत्यापन या आधार ओटीपी के जरिए तत्काल खाद वितरण की सुविधा दी जाए, ताकि फसलों को नुकसान से बचाया जा सके.
सारण जिले में खाद की उपलब्धता और मांग की स्थिति
| उर्वरक का प्रकार | अप्रैल से सितंबर तक कुल मांग (मीट्रिक टन) | वर्तमान में उपलब्ध स्टॉक (मीट्रिक टन) | सितंबर माह की आवश्यकता (मीट्रिक टन) |
| यूरिया | 29,000 | 21,886 | 7,308 |
| डीएपी | 5,000 | 6,553 | 572 |
| एनपीके | 6,000 | 4,988 | 357 |
| एसएसपी | 3,200 | 855 | 297 |
| पोटाश | 2,000 | 506 | 104 |
क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी
"जिले में मुख्य उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और किसी भी स्तर पर कृत्रिम अभाव नहीं होने दिया जाएगा. नई तकनीकी व्यवस्था का उद्देश्य केवल वास्तविक किसानों तक उर्वरक पहुंचाना और अवैध कालाबाजारी को रोकना है. यदि किसी किसान को ऑनलाइन सत्यापन अथवा खाद प्राप्ति में कोई असुविधा हो रही है, तो वे सीधे कार्यालय में मिलकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. नियमानुसार त्वरित कार्रवाई की जाएगी." — मधुरेंद्र कुमार सिंह, जिला कृषि पदाधिकारी, सारण
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