सारण में ‘ये कैसी दिल्लगी..?’ नाटक का मंचन, हास्य-व्यंग्य से युवाओं को मिला संदेश
कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार
छपरा में आयोजित पुरबिया नाट्य उत्सव में मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'विनोद' पर आधारित नाटक 'ये कैसी दिल्लगी..?' का सफल मंचन हुआ. हास्य और व्यंग्य से भरपूर इस प्रस्तुति ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया. नाटक ने युवाओं को सरल स्वभाव और दोस्ती के महत्व पर महत्वपूर्ण संदेश दिए.
Purabiya Natya Utsav: कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार, जिला प्रशासन और एसोसिएशन फॉर सोशल हारमोनी एंड आर्ट, छपरा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय ‘पुरबिया नाट्य उत्सव-2026’ के तीसरे दिन कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘विनोद’ पर आधारित नाटक ‘ये कैसी दिल्लगी..?’ का मंचन किया गया. हास्य और व्यंग्य से भरपूर इस नाटक ने दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ युवाओं को कई महत्वपूर्ण संदेश भी दिये.
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कार्यक्रम में छपरा विधायक छोटी कुमारी, एडीएम इंजीनियर मुकेश कुमार और छपरा व्यवहार न्यायालय के कई न्यायिक पदाधिकारी मौजूद रहे. नाटक का निर्देशन मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय, भोपाल के पूर्व छात्र एवं छपरा के युवा रंगकर्मी मोहम्मद जहांगीर ने किया.
हास्य के साथ व्यंग्य का भी अहसास कराता है नाटक
नाटक के निर्देशक मोहम्मद जहांगीर ने बताया कि ‘ये कैसी दिल्लगी..?’ करीब एक घंटे 10 मिनट की हास्य प्रधान नाट्य प्रस्तुति है. यह मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘विनोद’ पर आधारित है. नाटक में वास्तविक जीवन के प्रसंगों के साथ कल्पना का ऐसा संसार रचा गया है, जिसे देखकर दर्शकों को आनंद तो मिलता ही है, साथ ही सामाजिक परिस्थितियों पर व्यंग्य का भी अहसास होता है.
कॉलेज कैंपस की कहानी पर आधारित है प्रस्तुति
नाटक की कहानी कॉलेज कैंपस में रहने वाले चक्रधर नामक एक सीधे-सादे युवक के इर्द-गिर्द घूमती है. उसके साथी उसके सरल व्यक्तित्व का मजाक उड़ाते हैं और उसे तरह-तरह से परेशान करते हैं. दोस्तों की शरारत धीरे-धीरे बढ़ती जाती है.
इसी क्रम में चक्रधर के दोस्त कॉलेज की छात्रा लूसी के नाम से उसे प्रेम पत्र लिखकर भेज देते हैं. चक्रधर उसे वास्तविक प्रेम पत्र समझ लेता है और एक दिन रास्ते में लूसी के सामने अपने मन की बात कह देता है. इसके बाद स्थिति हास्यास्पद होने के साथ उसके लिए परेशानी का कारण बन जाती है. बाद में परीक्षा में असफल होने के बाद चक्रधर कॉलेज छोड़कर गांव लौट जाता है.
युवाओं के लिए प्रासंगिक है नाटक
निर्देशक ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं पर पढ़ाई और करियर का काफी दबाव है. ऐसे माहौल में मानसिक दबाव और असफलताओं से जूझ रहे युवाओं के बीच सकारात्मक सोच, संवाद और सही मार्गदर्शन की जरूरत है. इसी वजह से यह नाटक महानगरों से लेकर छोटे कस्बों तक के युवाओं के लिए प्रासंगिक संदेश देता है.
उन्होंने कहा कि नाटक मनोरंजन के साथ यह भी बताता है कि किसी के सरल स्वभाव या कमजोरी का मजाक उड़ाना उचित नहीं है. दोस्तों की शरारत और मजाक का असर सामने वाले व्यक्ति पर कितना गंभीर हो सकता है, इसे भी प्रस्तुति के माध्यम से सामने रखा गया.
कलाकारों के अभिनय ने बांधे रखा दर्शकों को
नाटक में गोविंद कुमार, विक्की ज्वेल, शिवम कुमार मिश्रा, अभिषेक कुमार शर्मा, अनुपम कुमार शाह, विक्की कुमार, हिमांशू कुमार, शिव कुमार, विक्रम कुमार, सिमरन, शिवानी कुमारी, सोनू कुमार आदि कलाकारों ने शानदार अभिनय किया.
कार्यक्रम का संचालन संजय पांडे ने किया. संगीत में हरिनंदन कुमार, प्रकाश परिकल्पना में विनय कुमार, वस्त्र विन्यास में महिमा और सुल्तान परवीन तथा सेट निर्माण में सुमित, दीपक और आयुष का योगदान रहा. निर्देशन मोहम्मद जहांगीर की भूमिका सराहनीय रही. कलाकार अशोक कुमार ने भी कार्यक्रम में महत्वपूर्ण सहयोग दिया.
नाटक की प्रस्तुति के दौरान दर्शक अंत तक कार्यक्रम से जुड़े रहे. कई जनप्रतिनिधि और अतिथि भी पूरी प्रस्तुति के दौरान मौजूद रहे और कलाकारों के अभिनय की सराहना की.
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