सारण में घट रहा नदी का जलस्तर, फिर भी बाढ़ का डर कायम, सितंबर अंत तक जारी रहेगा उतार-चढ़ाव
शहर के निकला इलाका से घटा जलस्तर | Prabhat Khabar Network
सारण जिले में नदियों के जलस्तर में कमी के बावजूद बाढ़ का खतरा बना हुआ है. पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश के कारण गंडक और घाघरा नदियों में पानी बढ़ने की आशंका है. ग्रामीण दोबारा बाढ़ आने की चिंता से परेशान हैं.
Saran Flood Update : सारण जिले में नदियों के जलस्तर में कमी आने के बावजूद बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों की चिंता कम नहीं हुई है. देश के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण गंडक और घाघरा नदियों में फिर पानी बढ़ने की आशंका बनी हुई है. जल संसाधन विभाग और प्रशासनिक अधिकारी भी लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं. पिछले 24 घंटे में जिले की प्रमुख नदियों के जलस्तर में करीब 9 से 20 सेंटीमीटर तक कमी दर्ज की गयी है, लेकिन कई नदियां अभी भी खतरे के निशान के आसपास बह रही हैं.
घर दुरुस्त करने में भी ग्रामीणों को सता रहा दोबारा बाढ़ का डर
बाढ़ प्रभावित नदी तटीय इलाकों के ग्रामीण सबसे अधिक ऊहापोह की स्थिति में हैं. पानी घटने के बाद लोग क्षतिग्रस्त घरों को फिर से दुरुस्त करने में जुट गये हैं, लेकिन उन्हें डर है कि अगर दोबारा बाढ़ आयी तो उनकी पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है. ग्रामीणों का कहना है कि लगातार जलस्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण ठीक से नींद भी नहीं आ रही है.
जिन इलाकों से पानी निकल गया है, वहां अभी भी कीचड़ और जगह-जगह जलजमाव है. इससे पशुओं को रखने में भी परेशानी हो रही है. कई परिवारों के लिए पुल-पुलिया और ऊंचे स्थान अभी भी अस्थायी आश्रय बने हुए हैं.
बाल्मीकि नगर गंडक बैराज से फिर छोड़ा गया पानी
पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही बारिश का असर नदियों के जलस्तर पर पड़ रहा है. सोमवार को नेपाल की ओर से बाल्मीकि नगर गंडक बैराज में करीब 1.20 लाख क्यूसेक पानी पहुंचा. इसके बाद पानी छोड़ा गया है. अधिकारियों के अनुसार इसका बहुत अधिक असर पड़ने की संभावना नहीं है, लेकिन मौजूदा स्थिति में जलस्तर में थोड़ी भी वृद्धि चिंता बढ़ा सकती है.
अनुमान है कि इस पानी के कारण जलस्तर में करीब 10 से 15 सेंटीमीटर तक वृद्धि हो सकती है. गंडक के साथ घाघरा के जलस्तर में भी उतार-चढ़ाव जारी रहने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है.
24 घंटे में 9 से 20 सेंटीमीटर तक घटा जलस्तर
बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल की 14 सितंबर की सुबह सात बजे की रिपोर्ट के अनुसार जिले की प्रमुख नदियों में जलस्तर में कमी दर्ज की गयी है. छपरा में घाघरा का खतरे का निशान 53.68 मीटर है, जबकि वर्तमान जलस्तर 52.17 मीटर दर्ज किया गया. यहां 12 सेंटीमीटर की कमी आयी है और नदी खतरे के निशान से 1.51 मीटर नीचे बह रही है.
सिसवन में घाघरा का खतरे का निशान 57.15 मीटर है. वर्तमान जलस्तर 56.95 मीटर दर्ज किया गया है. पिछले 24 घंटे में यहां 20 सेंटीमीटर की कमी आयी है. नदी अभी खतरे के निशान से करीब 20 सेंटीमीटर नीचे है.
हाजीपुर में गंडक का खतरे का निशान 50.32 मीटर है, जबकि वर्तमान जलस्तर 49.70 मीटर है. यहां 12 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गयी है और नदी खतरे के निशान से 62 सेंटीमीटर नीचे बह रही है.
रेवा में गंडक का खतरे का निशान 54.41 मीटर है. वर्तमान जलस्तर 53.01 मीटर दर्ज किया गया है. यहां 9 सेंटीमीटर की कमी आयी है और नदी खतरे के निशान से 1.40 मीटर नीचे है.
गांधी घाट पर गंगा का वर्तमान जलस्तर 49.61 मीटर दर्ज किया गया है. यहां 11 सेंटीमीटर की कमी आयी है. हालांकि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार गंगा अभी भी खतरे के निशान से करीब 1.01 मीटर ऊपर बह रही है.
सितंबर के अंत तक जारी रहेगा जलस्तर में उतार-चढ़ाव
बाढ़ प्रमंडल, सारण के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर ने बताया कि सितंबर महीने के अंत तक नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है. देश के पर्वतीय इलाकों में लगातार बारिश का असर नदियों के जलस्तर पर पड़ रहा है. सोमवार को गंडक बैराज से पानी छोड़ा गया है, हालांकि इसका बहुत अधिक असर पड़ने की संभावना नहीं है.
उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है. कई नदियों का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान के आसपास है, इसलिए पूरी सतर्कता बरती जा रही है.
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