70 प्रतिशत किसानों के पास नहीं है स्मार्टफोन, नई खाद नीति पर गरमाई सियासत
नई खाद नीति पर गरमाई सियासत
समस्तीपुर में किसानों और समाजसेवियों ने नई ऑनलाइन खाद वितरण व्यवस्था पर गहरी चिंता जताई है. 70% किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं होने और ऐप चलाने में असमर्थता के कारण बुवाई के समय खाद की भारी किल्लत और कालाबाजारी हो रही है. वे पुरानी ऑफलाइन व्यवस्था को जारी रखने की मांग कर रहे हैं.
Samastipur fertilizer distribution: समस्तीपुर में भाकपा कार्यालय में किसान संगठनों और समाजसेवियों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई. बैठक में बिहार सरकार द्वारा 1 सितंबर से लागू की गई खाद वितरण की नई ऑनलाइन व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त की गई. किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि यह व्यवस्था जमीनी हकीकत से कोसों दूर है.
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online fertilizer system issues: स्मार्टफोन और डिजिटल तकनीक की बड़ी समस्या
प्रदेश के 70 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं. जिनके पास हैं भी, उन्हें ऐप चलाना, फार्मर आईडी बनाना और जमाबंदी अपलोड करना नहीं आता. इस जटिल प्रक्रिया के कारण किसानों को खेतों में काम करने के बजाय मोबाइल दुकानों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं.
बुआई के समय खाद की किल्लत और कालाबाजारी
वर्तमान में मक्का और रबी की बुआई का मुख्य समय चल रहा है. ऑनलाइन बुकिंग और कोड के लंबे इंतजार में फसल का समय निकल रहा है. मजबूरन किसानों को बिचौलियों से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है, जिससे कालाबाजारी तेजी से बढ़ रही है.
ऑफलाइन व्यवस्था बहाल करने की मांग
बैठक में सर्वसम्मति से मांग की गई कि एप की अनिवार्यता को तत्काल समाप्त किया जाए. जब तक सभी किसानों की फार्मर आईडी और जमीन का पूर्ण डिजिटलीकरण नहीं होता, तब तक पुरानी ऑफलाइन व्यवस्था को भी जारी रखा जाए. बैठक में रामचंद्र महतो, विनोद कुमार राय और सुरेन्द्र कुमार सिंह मुन्ना समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे.
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