Samastipur News:स्टार्टअप इकोसिस्टम को संपुष्ट करने को सरकार प्रयासरत : डॉ. रामदत्त
Published by : GIRIJA NANDAN SHARMA Updated At : 23 Jan 2026 6:35 PM
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित संचार केंद्र के पंचतंत्र सभागार में स्थायी कृषि के लिए एग्री स्टार्टअप विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ.
Samastipur News: पूसा : डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित संचार केंद्र के पंचतंत्र सभागार में स्थायी कृषि के लिए एग्री स्टार्टअप विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ. प्रशिक्षण सत्र का उद्घाटन करते हुए बतौर मुख्य अतिथि एग्री बिजनेस महाविद्यालय के निदेशक डॉ. रामदत्त ने कहा कि स्टार्टअप इकोसिस्टम को संपुष्ट करने को बिहार सरकार प्रयासरत है. इसी कड़ी में बिहार प्रदेश में 19 इंक्यूबेशन सेंटर की स्थापना की गई है. साथ ही एक इंक्यूबेशन केंद्र बिहार सरकार के उद्योग विभाग के सौजन्य से आरपीसीएयु पूसा में संचालित किया जा रहा है. इसके तहत कोई भी युवकों के पास कृषि आधारित बिजनेस का आइडिया हो तो उसे उद्यम के रूप में स्थापित करने के लिए विवि तकनीकी रूप से सहयोग करेगी. कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए बिहार राज्य की परंपरागत कृषि उत्पादों को बिजनेस का रूप में स्थापित कर उनकी ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग कर देश विदेश तक पहुंचाने की जरूरत है. इसके लिए बिहार के युवा युवतियों को आगे आकर नवीनतम पदार्थ, तकनीकों एवं तरीकों के माध्यम से कृषि के उत्पादों को जनजन तक पहुंचाने का कार्य करना होगा. संचालन करते हुए विभागाध्यक्ष सह प्रसार शिक्षा उप निदेशक प्रशिक्षण डॉ. विनीता सतपथी ने कहा कि आज देश भर में सैंकड़ों एग्रीटेक स्टार्टअप कार्यरत है. जो तकनीक के माध्यम से कृषि के क्षेत्र में बदलाव ला रहा है. निंजाकाट, देहात, जैसे स्टार्टअप बेहतर उत्पादन के साथ कुशल आपूर्ति और किसानों को बाजार तक सीधी पहुंच उपलब्ध करवाने में महती भूमिका निभा रही है. इस प्रशिक्षण के दौरान वैशाली, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, दरभंगा एवं समस्तीपुर जिले से 30 प्रशिक्षणार्थियों हिस्सा ले रहे हैं. इस प्रशिक्षण में ड्रोन, मूल्य संवर्धन, आईपीआर, बीटूबी मार्केट केंद्र एवं राज्य सरकार के विभिन्न योजनाओं में एसी एंड एबीसी, डिजिटल मार्केटिंग तथा अन्य विषय पर कोर्स को तैयार किया गया है. वैज्ञानिक डॉ. फूलचंद ने कहा कि यह प्रशिक्षण बिल्कुल ही नए विषय पर आधारित है. इसमें युवा युवतियों को आगे आने की जरूरत है. धन्यवाद ज्ञापन करते हुए वैज्ञानिक डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को दूसरे किसानों के साथ साझा कर बेहतर लाभ लिया जा सकता है. मौके पर टेक्निकल टीम के सुरेश कुमार, गौरव कुमार, विक्की कुमार आदि मौजूद थे.
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