कम बारिश में भी होगी अच्छी खेती, जानिए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को क्या-क्या सलाह दी?

प्रतीकात्मक तस्वीर
जिले में कम बारिश के बावजूद बेहतर फसल उत्पादन कैसे करें? कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए जारी की विशेष सलाह। जानें जुलाई में अपनाएं कौन सी रणनीति और फसलें।
Samastipur News: जिले में बदलते मौसम और सामान्य से कम वर्षा को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए विशेष सलाह जारी की है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि किसान जुलाई महीने में सही फसल प्रबंधन अपनाएं, तो सूखे के असर को कम करते हुए बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.
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धान की खेती के लिए क्या करें?
वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि हाल में हुई बारिश के पानी का उपयोग करते हुए किसान प्रभात, राजेंद्र सरस्वती और राजेंद्र भगवती जैसी अगात धान की किस्मों की बुआई जुलाई के मध्य तक पूरी कर लें.
यदि वर्षा कम हो, तो ऊंची जमीन पर राजेंद्र भगवती और राजेंद्र नीलम किस्मों की सीधी बुआई करने की सलाह दी गई है.
बुआई से पहले बीजों का कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करने की भी सलाह दी गई है.
सिंचाई की सुविधा है तो शुरू करें रोपाई
जिन किसानों के पास सिंचाई की व्यवस्था उपलब्ध है, वे धान की रोपाई शुरू कर सकते हैं. साथ ही 10 से 15 दिन पुरानी नर्सरी में समय पर खरपतवार नियंत्रण करने की सलाह दी गई है.
कम पानी वाले क्षेत्रों में मिलेट्स की खेती करें
कम वर्षा वाले और ऊंची जमीन वाले क्षेत्रों में धान के बजाय मिलेट्स की खेती अधिक लाभदायक बताई गई है.
कृषि वैज्ञानिकों ने अच्छी जल निकासी वाली भूमि में राजेंद्र मडुआ, आरयू-3, आरयू-4 तथा राजेंद्र कौनी-1 जैसी किस्मों की खेती करने की सलाह दी है.
दलहन और तिलहन को दें प्राथमिकता
कम पानी वाले क्षेत्रों में किसानों को धान की जगह अरहर और अन्य दलहन-तिलहन फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी गई है.
अरहर की उन्नत किस्मों में बहार, पूसा-9, राजेंद्र अरहर-1 और राजेंद्र अरहर-2 की अनुशंसा की गई है.
वैज्ञानिकों के अनुसार प्रति हेक्टेयर खेत में अंतिम जुताई के समय—
- 20 किलोग्राम नाइट्रोजन
- 45 किलोग्राम फॉस्फोरस
- 20 किलोग्राम पोटाश
- 20 किलोग्राम सल्फर
का प्रयोग करें. साथ ही 18 से 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज का उपयोग करें और बीजों का कार्बेन्डाजिम, क्लोरपाइरीफॉस एवं राइजोबियम कल्चर से उपचार अवश्य करें.
सूर्यमुखी की खेती के लिए भी सलाह
सूर्यमुखी की खेती के लिए वैज्ञानिकों ने केबीएसएच-1, केबीएसएच-44, केबीएसएच-53 और जीआरएसएच जैसी संकर किस्मों की अनुशंसा की है.
प्रति हेक्टेयर खेत में—
- 100 क्विंटल सड़ी हुई गोबर की खाद
- 40 किलोग्राम नाइट्रोजन
- 80 किलोग्राम फॉस्फोरस
- 40 किलोग्राम पोटाश
- 30 से 40 किलोग्राम सल्फर
का प्रयोग करने की सलाह दी गई है.
हाइब्रिड किस्मों के लिए 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज पर्याप्त माना गया है. बुआई से पहले बीजों को ठंडे पानी में भिगोकर छाया में सुखाएं और फिर थायराम/कैप्टाफ 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज से उपचारित कर 60×30 सेंटीमीटर की दूरी पर बुआई करें.
आम की नई बागवानी के लिए सही समय
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई और अगस्त आम के नए पौधे लगाने के लिए सबसे उपयुक्त समय है.
उन्होंने सलाह दी है कि गड्ढों की मिट्टी पूरी तरह बैठ जाने के बाद ही पौधरोपण करें.
- कलमी आम के लिए 10×10 मीटर की दूरी रखें.
- बीजू आम के लिए 12×12 मीटर की दूरी उपयुक्त है.
फल देने वाले बड़े आम के पेड़ों में प्रति वर्ष प्रति पौधा—
- 1 किलोग्राम नाइट्रोजन
- 300 ग्राम फॉस्फोरस
- 700 ग्राम पोटाश
- 80 से 100 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद
देने की सलाह दी गई है.
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम के अनुसार फसल चयन और वैज्ञानिक सलाह का पालन करने से किसान कम वर्षा की स्थिति में भी बेहतर उत्पादन और आर्थिक नुकसान से बचाव कर सकते हैं.

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