सहरसा नगर निगम में 25 लाख के सरकारी फंड पर उठे सवाल, पूर्व उपसभापति ने डीएम से की शिकायत
फोटो - सहरसा- निर्माणाधीन सड़क | Prabhat Khabar Network
सहरसा में 25 लाख रुपये के सरकारी फंड का कथित दुरुपयोग हुआ है. नगर निगम द्वारा एक निजी परिसर में नाला निर्माण पर सवाल उठ रहे हैं. जलजमाव से परेशान जनता के लिए यह पैसा क्यों खर्च नहीं हुआ? जानिए पूरा मामला.
Saharsa Corporation Corruption: सहरसा की सड़कों पर जब बारिश के दिनों में दो फीट तक पानी जमा हो जाता है, तब आम जनता जलनिकासी के लिए तरसती नजर आती है. लेकिन जब जनता के टैक्स की भारी-भरकम राशि किसी सार्वजनिक नाले के बजाय एक निजी बाउंड्री के भीतर बहा दी जाए, तो सवाल उठना लाजमी है. सहरसा नगर निगम क्षेत्र से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है. नगर निगम के वार्ड नंबर 34 में सरकारी खजाने से लगभग 25 लाख रुपये की लागत से नाला निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि यह निर्माण किसी आम सड़क पर नहीं बल्कि एक व्यक्ति विशेष की निजी जमीन के अंदर हो रहा है. इस बड़े खुलासे के बाद पूर्व उपसभापति ने सीधे जिलाधिकारी का दरवाजा खटखटाया है.
सार्वजनिक पैसों पर निजी फायदा? जानिए क्या है पूरा मामला
पूरा विवाद सहरसा नगर निगम क्षेत्र के मारूफगंज पुरानी जेल से आगे बटराहा जाने वाली मुख्य सड़क का है. यहां शिव मंदिर के समीप स्थित अनिल यादुका के लगभग एक बीघा में फैले विशाल परिसर के अंदर नगर निगम द्वारा नाला बनवाया जा रहा है. यह परिसर पूरी तरह से निजी है और इसके बाहर बाकायदा एक मुख्य गेट भी लगा हुआ है. इस निजी कैंपस के अंदर करीब 25 लाख रुपये की सरकारी राशि खर्च करके नाले का निर्माण कराया जा रहा है. जब इस बात की जानकारी पूर्व उपसभापति रंजना सिंह को मिली, तो उन्होंने पूरे मामले को सरकारी धन के सरासर दुरुपयोग का मामला बताते हुए जांच की मांग की है.
2 फीट पानी में तैरती जनता, लेकिन बजट खर्च हुआ बाउंड्री के भीतर
सहरसा की आम जनता के नजरिए से देखा जाए तो यह स्थिति बेहद दुखद और आक्रोश पैदा करने वाली है. मारूफगंज और पुरानी जेल के आसपास के इलाकों में हर साल मानसून के दौरान सड़कें लबालब भर जाती हैं. स्थानीय निवासियों और राहगीरों को दो फीट तक गहरे जमा पानी से होकर गुजरना पड़ता है. जलजमाव की इस भीषण समस्या के कारण आम लोगों का जीना मुहाल हो जाता है और कई बार दुर्घटनाएं भी घटती हैं. पूर्व उपसभापति रंजना सिंह का कहना है कि अगर इस 25 लाख रुपये की बड़ी राशि का उपयोग पुरानी जेल के पास सार्वजनिक सड़क पर जलनिकासी की व्यवस्था करने में किया जाता, तो हजारों स्थानीय लोगों को जलजमाव से बड़ी राहत मिल सकती थी. लेकिन सार्वजनिक हित को दरकिनार कर पूरी राशि एक निजी बाउंड्री के भीतर झोंक दी गई.
नगर निगम के अफसरों और वार्ड पार्षद की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
इस मामले ने नगर निगम के काम करने के तरीके और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर किसी निजी परिसर के अंदर सरकारी योजना की स्वीकृति कैसे मिल गई. योजना का प्राक्कलन किसने तैयार किया और कार्यादेश किस आधार पर जारी किया गया. इन सभी बिंदुओं को लेकर पूर्व उपसभापति रंजना सिंह ने जिलाधिकारी को लिखित आवेदन सौंपा है. उन्होंने आवेदन में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि इस पूरे खेल में नगर निगम के संबंधित पदाधिकारियों और स्थानीय वार्ड पार्षद की मिलीभगत हो सकती है. उन्होंने डीएम से मांग की है कि केवल निर्माण कार्य की ही नहीं, बल्कि इस योजना को पास करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए.
Saharsa Corporation Corruption: निर्माण कार्य पर तत्काल रोक और स्थल जांच की उठी मांग
पूर्व उपसभापति ने जिलाधिकारी से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है. उन्होंने मांग की है कि निजी जमीन के अंदर चल रहे इस नाला निर्माण कार्य पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए. इसके साथ ही पूरी योजना से संबंधित फाइलों, प्राक्कलन, कार्यादेश और जमीन की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष स्थल जांच कराई जाए. रंजना सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. फिलहाल यह मामला पूरे सहरसा शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और अब हर किसी की निगाहें जिलाधिकारी की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं.
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