महिषी का मां उग्रतारा मंदिर क्यों है खास? तंत्र साधना से जुड़ी मान्यता, नवरात्र में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब

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मां उग्रतारा मंदिर. | Prabhat Khabar Network

बिहार के सहरसा जिले में स्थित मां उग्रतारा मंदिर, तंत्र साधना और प्राचीन परंपराओं का एक अद्भुत संगम है. नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है. जानिए इस प्राचीन मंदिर से जुड़ी खास मान्यताएं.

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बिहार के सहरसा जिले के महिषी में स्थित मां उग्रतारा मंदिर श्रद्धा, आध्यात्म और प्राचीन परंपराओं का अद्भुत संगम माना जाता है. सदियों से यह स्थान शक्ति साधना और उपासना का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है. मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्तों को आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव होता है. मां के दरबार में पहुंचते ही श्रद्धालु श्रद्धा से सिर झुका देते हैं. मान्यता है कि मां उग्रतारा अपने भक्तों की बाधाएं दूर कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. यही वजह है कि यहां सामान्य दिनों में भी सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है.

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तंत्र साधना से जुड़ी है मंदिर की पहचान

मां उग्रतारा मंदिर की सबसे खास पहचान इसकी धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह स्थान तंत्र साधना के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध रहा है. दूर-दराज से साधक और श्रद्धालु यहां मां की आराधना के लिए पहुंचते हैं. मंदिर की प्राचीन परंपराएं आज भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती हैं.

पिछले कुछ वर्षों में मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण भी किया गया है. इससे मंदिर की भव्यता और बढ़ी है. पूजा-अर्चना के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को यहां धार्मिक वातावरण के साथ बेहतर परिसर का अनुभव मिलता है.

नवरात्र में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब

नवरात्र के दौरान मां उग्रतारा मंदिर का नजारा पूरी तरह बदल जाता है. सुबह की आरती से लेकर देर रात तक पूजा-पाठ, भजन और कीर्तन का दौर चलता रहता है. विशेष पर्व के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है.

विशेष अवसरों पर मां का आकर्षक श्रृंगार किया जाता है. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न होती है. शाम की आरती और भजन-कीर्तन में भी बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं.

मनोकामना पूरी होने पर बलि देने की भी मान्यता

मंदिर से जुड़ी प्राचीन परंपराओं में बलि प्रथा का भी उल्लेख मिलता है. मान्यता के अनुसार मनोकामना पूरी होने के बाद कुछ श्रद्धालु छाग और पाड़ा की बलि देने के लिए मंदिर पहुंचते हैं. हालांकि यह परंपरा धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय प्रथाओं से जुड़ी हुई है.

धार्मिक पर्यटन का बन रहा प्रमुख केंद्र

मां उग्रतारा मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु मां की पूजा-अर्चना के साथ मंदिर की प्राचीन परंपराओं और आध्यात्मिक वातावरण को करीब से महसूस करते हैं.

स्थानीय लोगों के अनुसार मां उग्रतारा की कृपा से क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. यही आस्था हर वर्ष बड़ी संख्या में लोगों को महिषी खींच लाती है. नवरात्र और अन्य विशेष अवसरों पर मंदिर की रौनक देखते ही बनती है.

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