छोटा था मुख्यमंत्री का कार्यकाल, लेकिन मंडल आयोग की रिपोर्ट ने बदल दी राजनीति, 108वीं जयंती पर ऐसे याद किए गए बीपी मंडल
सहरसा- बैजनाथपुर में बीपी मंडल की जयंती मनाते लोग | Prabhat Khabar Network
बीपी मंडल की 108वीं जयंती पर बैजनाथपुर में बच्चों की प्रभात फेरी से लेकर स्वास्थ्य शिविर तक का आयोजन हुआ. इस अवसर पर सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष को याद किया गया.
BP Mandal Jayanti 2026: बैजनाथपुर के निराला नगर में मंगलवार की सुबह कुछ अलग थी. स्कूल के बच्चों की प्रभात फेरी, बीपी मंडल के नारों से गूंजता माहौल और उनकी आदमकद प्रतिमा पर श्रद्धांजलि देने के लिए जुटे लोग. मौका था बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और मंडल आयोग के अध्यक्ष रहे बीपी मंडल की 108वीं जयंती का.
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सुबह से शुरू हुआ कार्यक्रम शाम तक चलता रहा. बच्चों ने आसपास के इलाकों में प्रभात फेरी निकाली, प्रतिमा स्थल पर सभा हुई, नेताओं और स्थानीय लोगों ने माल्यार्पण किया और शाम में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसी दौरान निशुल्क स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया, जहां आधा दर्जन से अधिक चिकित्सकों ने लोगों की जांच की और जरूरी दवाएं बांटीं.
लेकिन बीपी मंडल की जयंती का यह आयोजन सिर्फ एक स्मृति समारोह तक सीमित नहीं रहा. उनके जीवन और मंडल आयोग की रिपोर्ट को याद करते हुए वक्ताओं ने सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की लड़ाई को आज के समय से जोड़ने की कोशिश की.
बच्चों की प्रभात फेरी से शुरू हुआ जयंती समारोह
जयंती के अवसर पर सुबह स्थानीय स्कूलों के बच्चों ने प्रभात फेरी निकाली. यह फेरी बैजनाथपुर, गम्हरिया और आसपास के क्षेत्रों से गुजरते हुए वापस निराला नगर स्थित बीपी मंडल की प्रतिमा स्थल पर पहुंची.
इसके बाद प्रभात फेरी सभा में बदल गयी. स्थानीय जनप्रतिनिधियों, नेताओं और गणमान्य लोगों ने बीपी मंडल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी.
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि पिछड़े समाज के अधिकारों के लिए बीपी मंडल ने जिस तरह संघर्ष किया, वह आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है.
'युवाओं को बीपी मंडल के जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत'
पूर्व सरपंच अरुण कुमार की अध्यक्षता और अधिवक्ता उमेश यादव के संचालन में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कोसी क्षेत्र के विधान पार्षद अजय कुमार सिंह ने कहा कि आज के युवाओं को बीपी मंडल के जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत है.
उन्होंने सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए बीपी मंडल के योगदान को याद किया.
महिषी विधायक डॉ. गौतम कृष्ण ने कहा कि बीपी मंडल के बताए रास्ते पर चलकर ही लोग अपने हक और अधिकार की लड़ाई लड़कर उसे हासिल कर सकते हैं.
पूर्व विधायक अरुण कुमार ने कहा कि बीपी मंडल ने गरीब और पिछड़े वर्गों के लोगों को अधिकार दिलाने के लिए महत्वपूर्ण काम किया.
सीपीएम नेता ओमप्रकाश नारायण ने कहा कि कम समय तक मुख्यमंत्री रहने के बावजूद बीपी मंडल ने द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के रूप में ऐतिहासिक काम किया और पिछड़े समाज के अधिकारों की लड़ाई को मजबूत आधार दिया.
जयंती समारोह में स्वास्थ्य जांच ने जोड़ा जनसरोकार
कार्यक्रम के दौरान प्रतिमा स्थल पर निशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाया गया. आधा दर्जन से अधिक चिकित्सकों की मौजूदगी में लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गयी और जरूरत के अनुसार दवाएं भी वितरित की गयीं.
जयंती समारोह में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन स्थानीय लोगों के लिए सीधे उपयोगी रहा. ऐसे आयोजनों में श्रद्धांजलि के साथ स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरत को जोड़ने से कार्यक्रम का सामाजिक सरोकार भी सामने आया.
कार्यक्रम में राजद नेता रंजीत यादव, भारत यादव, गजेंद्र यादव, मो. ताहिर, उपेंद्र यादव, गीता यादव, रंजन यादव, पूर्व जिला परिषद सदस्य शशिभूषण यादव, पूर्व मुखिया पंकज यादव, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक कौशल किशोर यादव, कमलेश्वरी यादव, शत्रुघ्न यादव, रमेश यादव, रमेश शर्मा, शतीश साह, संजय रजक और संतोष कुमार सहित अन्य लोगों ने विचार रखे.
शाम में स्थानीय कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया.
1952 में विधायक से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
बीपी मंडल का जन्म 25 अगस्त 1918 को उत्तर प्रदेश के बनारस में हुआ था. हालांकि उनका बचपन बिहार के मधेपुरा जिले के पैतृक गांव मुरहो में बीता.
उनके पिता बाबू रास बिहारी लाल मंडल प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी थे और कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे थे.
बीपी मंडल ने वर्ष 1952 और 1962 में कांग्रेस के टिकट पर मधेपुरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक का चुनाव जीता. इसके बाद 1967 में वे मधेपुरा से लोकसभा सांसद बने.
1 फरवरी 1968 को उन्होंने बिहार के सातवें मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला. हालांकि राजनीतिक उठापटक और समर्थन वापस लिये जाने के कारण उनका मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल बेहद छोटा रहा.
लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में उनका छोटा कार्यकाल ही उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी पहचान नहीं बना. उनकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका बाद में सामने आयी.
मंडल आयोग की रिपोर्ट ने बदल दिया देश का सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य
वर्ष 1979 में तत्कालीन मोरारजी देसाई सरकार ने द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया. बीपी मंडल को इस आयोग का अध्यक्ष बनाया गया.
उनकी अध्यक्षता में आयोग ने 1980 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की. रिपोर्ट में देश की आबादी में अन्य पिछड़ा वर्ग की हिस्सेदारी करीब 52 प्रतिशत आंकी गयी और सरकारी नौकरियों तथा शिक्षण संस्थानों में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की ऐतिहासिक सिफारिश की गयी.
इसके करीब एक दशक बाद 7 अगस्त 1990 को तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह की सरकार ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने की घोषणा की.
इस फैसले ने भारतीय राजनीति और सामाजिक व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाला. आरक्षण, सामाजिक प्रतिनिधित्व और पिछड़े वर्गों के अधिकारों को लेकर देशभर में बहस तेज हुई और भारतीय राजनीति की दिशा भी बदली.
यही वजह है कि बीपी मंडल को आज भी केवल बिहार के एक पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की राजनीति के एक महत्वपूर्ण चेहरे के रूप में याद किया जाता है.
108 साल बाद भी क्यों याद किए जाते हैं बीपी मंडल?
बीपी मंडल का राजनीतिक जीवन कई दशकों पुराना है, लेकिन उनके नाम और उनके काम की चर्चा आज भी होती है. इसकी सबसे बड़ी वजह मंडल आयोग की वह रिपोर्ट है, जिसने सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व को राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया.
मधेपुरा और कोसी क्षेत्र के लिए बीपी मंडल की स्मृति का महत्व और भी अधिक है. उनकी राजनीतिक यात्रा इसी क्षेत्र से जुड़ी रही और उनके परिवार की सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि भी इसी इलाके से रही.
इसी कारण बैजनाथपुर में उनकी जयंती केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय समाज के लिए अपनी राजनीतिक और सामाजिक विरासत को याद करने का अवसर भी बनती है.
नई पीढ़ी तक पहुंचे बीपी मंडल के विचार
इस बार जयंती समारोह में स्कूली बच्चों की भागीदारी भी खास रही. प्रभात फेरी के माध्यम से बच्चों को बीपी मंडल के जीवन और उनके योगदान से जोड़ने की कोशिश की गयी.
बीपी मंडल का निधन 13 अप्रैल 1982 को हुआ था. करीब चार दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी उनके सामाजिक न्याय से जुड़े विचार सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बने हुए हैं.
उनकी जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों से यह सवाल भी सामने आता है कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को नई पीढ़ी तक किस तरह पहुंचाया जाए. बैजनाथपुर में प्रभात फेरी, श्रद्धांजलि सभा, स्वास्थ्य शिविर और सांस्कृतिक कार्यक्रम इसी दिशा में स्थानीय स्तर पर एक प्रयास के रूप में सामने आए.
BP Mandal Jayanti 2026:बीपी मंडल की विरासत आज भी राजनीतिक बहस के केंद्र में
बीपी मंडल का जीवन बताता है कि किसी नेता का प्रभाव केवल उसके पद पर निर्भर नहीं करता. बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल भले ही छोटा रहा, लेकिन मंडल आयोग के अध्यक्ष के रूप में उनका काम भारतीय राजनीति और सामाजिक व्यवस्था पर लंबे समय तक असर डालने वाला साबित हुआ.
13 अप्रैल 1982 को उनके निधन के बाद भी सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के अधिकारों से जुड़ी बहस में उनका नाम लगातार सामने आता रहा है. इसी वजह से उनकी 108वीं जयंती पर सौरबाजार के बैजनाथपुर में आयोजित कार्यक्रम स्थानीय स्मृति के साथ-साथ उस बड़े सामाजिक बदलाव की याद भी बन गया, जिसने देश की राजनीति को नई दिशा दी.

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