सहरसा का आरण गांव बनेगा पर्यटन स्थल, मोरों के लिए बनेगा मयूर बिहार

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डीएम से मुलाक़ात करते महिषी विधायक | Prabhat Khabar Network

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सहरसा का आरण गांव जल्द ही बिहार के पर्यटन मानचित्र पर उभरेगा. यहां मोरों के संरक्षण और प्राकृतिक बसेरे को सुरक्षित रखने के लिए 'मयूर बिहार' विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है. यह पहल गांव को एक अनोखे पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करेगी.

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Aran Mayur Bihar: सहरसा जिला मुख्यालय से महज चार किलोमीटर दूर आरण गांव आने वाले दिनों में बिहार के पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना सकता है. गांव में बड़ी संख्या में वर्षों से बसे मोरों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक बसेरे को सुरक्षित रखने के लिए मयूर बिहार विकसित करने की तैयारी तेज हो गयी है.

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गुरुवार को महिषी विधायक प्रो. गौतम कृष्ण और सहरसा के पूर्व विधायक अरुण कुमार की डीएम दीपेश कुमार से हुई शिष्टाचार मुलाकात के दौरान इस योजना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आयी. डीएम ने कहा कि आरण में पर्याप्त संख्या में मोर निवास करते हैं. इनके संरक्षण के लिए जमीन चिन्हित कर ली गयी है और यहां ऐसा मयूर बिहार विकसित किया जायेगा, जैसा बिहार में कहीं नहीं है.

डीएम ने कहा कि मयूर बिहार बनने के बाद आरण गांव को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी. उन्होंने इस काम में विधायक, पूर्व विधायक, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से सहयोग की अपील की. साथ ही कहा कि मयूर बिहार के निर्माण में पैसे की कमी नहीं होने दी जायेगी. प्रशासन आरण गांव को बिहार के मानचित्र पर लाना चाहता है.

मोरों का गांव अब बनेगा पर्यटन की पहचान

आरण की खासियत कोई अचानक सामने आयी बात नहीं है. गांव में लंबे समय से बड़ी संख्या में मोर दिखाई देते रहे हैं. ग्रामीणों के घरों, खेत-खलिहानों और आसपास के पेड़-पौधों के बीच मोरों की मौजूदगी इस गांव की प्राकृतिक पहचान बन चुकी है.

यही वजह है कि यहां रहने वाले मोरों के संरक्षण के साथ उनके लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण तैयार करने की मांग लंबे समय से उठती रही है. मयूर बिहार की योजना इसी प्राकृतिक पहचान को संरक्षित करते हुए उसे पर्यटन से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है.

हाल में जिला प्रशासन ने आरण में मयूर बिहार के लिए सरकारी जमीन के दो हिस्सों का स्थल निरीक्षण कर उन्हें चिन्हित किया था. तिलावे नदी के पास करीब सवा दो एकड़ और स्वास्थ्य केंद्र के पास करीब तीन एकड़ गैरमजरुआ खास जमीन को परियोजना के लिए उपयुक्त माना गया है.

प्रभात खबर की खबर के बाद तेज हुई प्रशासनिक पहल

आरण में मोरों के संरक्षण को लेकर प्रभात खबर में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गयी थी. इसके बाद इस मुद्दे ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान खींचा. महिषी विधायक प्रो. गौतम कृष्ण ने भी विधानसभा सत्र के दौरान आरण में मोरों के संरक्षण का मामला उठाया था.

इसके बाद डीएम दीपेश कुमार ने जिले के अन्य अधिकारियों के साथ आरण गांव का निरीक्षण किया. मयूर बिहार के निर्माण के लिए सरकारी जमीन का जायजा लिया गया. डीएम ने सीओ शिखा सिंह को जमीन की मापी कराने, नजरी नक्शा तैयार करने और रिपोर्ट समर्पित करने का निर्देश दिया था.

प्रशासन की ओर से चिन्हित जमीन पर मोरों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की योजना पर भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है. इसमें पेड़-पौधे, पानी की व्यवस्था और प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता जैसे पहलुओं को ध्यान में रखने की बात सामने आयी है.

करीब दस साल पुराना सपना अब जमीन पर उतरने की उम्मीद

आरण में मयूर बिहार बनाने का सपना नया नहीं है. वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आरण गांव का दौरा किया था. उन्होंने यहां मोरों को देखा और मोरों पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी देखी थी. उस समय आरण में मयूर बिहार बनाने की घोषणा की गयी थी.

लेकिन घोषणा के करीब दस वर्ष बाद भी यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी थी. अब जमीन चिन्हित होने और जिला प्रशासन की ओर से सक्रिय पहल शुरू होने से इस पुराने प्रस्ताव के आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है.

आरण में मयूर बिहार की मांग को लेकर भाजपा मंडल उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार कुंदन उर्फ झुनू यादव, युवा समाजसेवी अमित कुमार सहित दर्जनों ग्रामीण लगातार जागरूकता अभियान चलाते रहे हैं.

Aran Mayur Bihar: मोरों के संरक्षण के साथ गांव को मिलेगा नया अवसर

यदि मयूर बिहार विकसित होता है, तो इसका असर केवल मोरों के संरक्षण तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है. आरण को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने से आसपास के क्षेत्र में लोगों की आवाजाही बढ़ सकती है. इससे स्थानीय स्तर पर छोटे कारोबार, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी अवसर मिल सकते हैं.

हालांकि, इसके लिए मयूर बिहार का निर्माण केवल पर्यटन केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि मोरों के प्राकृतिक आवास और संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए करना महत्वपूर्ण होगा. प्रशासन के सामने अब जमीन से लेकर बुनियादी सुविधाओं और मोरों के सुरक्षित वातावरण तक कई स्तरों पर काम को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी.

डीएम ने ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से सहयोग की अपील की है और स्पष्ट किया है कि पैसे की कमी नहीं होने दी जायेगी. अब देखना होगा कि वर्षों से लंबित मयूर बिहार की योजना कितनी तेजी से जमीन पर आकार लेती है.

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