सहरसा के चैनपुर का प्राचीन मां काली मंदिर, जहां मान्यता है- खाली हाथ नहीं लौटता कोई भक्त

Updated:
विज्ञापन
सहरसा के चैनपुर का प्राचीन मां काली मंदिर, जहां मान्यता है- खाली हाथ नहीं लौटता कोई भक्त

Aaj Ka Darshan: सहरसा के चैनपुर स्थित प्राचीन मां काली मंदिर की धार्मिक मान्यता, इतिहास, नवरात्र और अमावस्या की विशेष पूजा, काली पूजा और यहां से जुड़ी आस्था के बारे में विस्तार से जानिए.

विज्ञापन

Aaj Ka Darshan: कोसी क्षेत्र की धार्मिक आस्था की बात हो और चैनपुर स्थित प्राचीन मां काली मंदिर का नाम न आए, ऐसा संभव नहीं. वर्षों से यह मंदिर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां हर दिन भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन नवरात्र, अमावस्या और काली पूजा के अवसर पर पूरा मंदिर परिसर भक्ति के सागर में बदल जाता है. मान्यता है कि मां काली के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती. यही विश्वास हर साल हजारों लोगों को इस प्राचीन शक्तिपीठ तक खींच लाता है.

सहरसा का प्राचीन शक्तिपीठ, जहां हर दिन गूंजती है मां काली की आरती

सहरसा जिले के चैनपुर स्थित प्राचीन मां काली मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि पूरे कोसी अंचल की आस्था, विश्वास और शक्ति साधना का प्रमुख केंद्र है. हालांकि अब यहां दो काली मंदिर हैं, लेकिन पुराना मंदिर आज भी श्रद्धालुओं के लिए सबसे अधिक श्रद्धा का स्थान बना हुआ है.

सहरसा ही नहीं, बल्कि सुपौल, मधेपुरा और आसपास के कई जिलों से लोग यहां पहुंचकर मां काली की पूजा-अर्चना करते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हैं.

प्राचीन मां काली मंदिर

मंदिर में प्रवेश करते ही मिलता है आध्यात्मिक सुकून

मंदिर परिसर में कदम रखते ही घंटियों की मधुर ध्वनि, धूप-दीप की सुगंध और भक्तों के जयकारे वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना देते हैं. सुबह और शाम होने वाली विशेष आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंदिर वर्षों पुराना है और यहां मां काली की पूजा पारंपरिक विधि-विधान से होती है. भक्त दीप प्रज्ज्वलित कर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और अपनी मनोकामनाएं मां के चरणों में अर्पित करते हैं.

नवरात्र और अमावस्या पर उमड़ पड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

वैसे तो पूरे वर्ष यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन नवरात्र, अमावस्या और काली पूजा के दौरान मंदिर का स्वरूप पूरी तरह बदल जाता है. सुबह से देर रात तक पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और वैदिक मंत्रोच्चार का सिलसिला चलता रहता है.

विशेष अवसरों पर मां काली का भव्य श्रृंगार किया जाता है और शाम की महाआरती में शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. पूरा मंदिर परिसर दीपों की रोशनी और भक्ति के माहौल से जगमगा उठता है.

मनोकामना पूरी होने पर चढ़ती है बलि

चैनपुर के इस प्राचीन मंदिर से कई धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं. स्थानीय परंपरा के अनुसार, जिन श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है, वे मां के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने के लिए बलि अर्पित करते हैं. विशेष रूप से दीपावली के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में छाग की बलि दी जाती है. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और स्थानीय धार्मिक परंपराओं का हिस्सा मानी जाती है.

Aaj Ka Darshan: सुविधाएं बढ़ीं, लेकिन आस्था वही पुरानी

हाल के वर्षों में मंदिर परिसर में साफ-सफाई और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई कार्य किए गए हैं. शाम के समय मंदिर की आकर्षक रोशनी और लगातार गूंजती घंटियों की ध्वनि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को एक अलग आध्यात्मिक अनुभव कराती है.

स्थानीय लोगों का विश्वास है कि मां काली की कृपा से क्षेत्र में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. यही कारण है कि हर दिन यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है.

धार्मिक आस्था के साथ पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र

चैनपुर का प्राचीन मां काली मंदिर धार्मिक महत्व के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है. यहां आने वाले श्रद्धालु केवल पूजा-अर्चना ही नहीं करते, बल्कि मंदिर की प्राचीन परंपरा, शांत वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा का भी अनुभव करते हैं.

मंदिर से जुड़ी सबसे बड़ी मान्यता यही है कि मां काली के दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता. सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ मांगी गई हर प्रार्थना मां अवश्य सुनती हैं. यही विश्वास इस मंदिर को कोसी क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित शक्ति उपासना केंद्रों में शामिल करता है.

Also Read: अधीक्षण अभियंता पवन कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में आर्थिक अपराध प्रभाग की कार्रवाई जारी.

Also Read: आज से पूरे बिहार में शुरू होगा आंधी-पानी का दौर, इन 6 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, IMD की एडवाइजरी जारी

विज्ञापन
प्रत्युष प्रशांत

लेखक के बारे में

By प्रत्युष प्रशांत

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन