सहरसा से 4 किमी दूर आरण में बनेगा राज्य स्तरीय मयूर बिहार, मोरों के संरक्षण के साथ पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
डीएम दीपेश कुमार व विधायक प्रो गौतम कृष्ण. | Prabhat Khabar Network
सहरसा के आरण गांव में राज्य स्तरीय मयूर बिहार बनाने की पहल शुरू हो गई है. इस योजना से न केवल मोरों का संरक्षण होगा, बल्कि यह क्षेत्र एक नए पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा.
सहरसा. जिला मुख्यालय से महज चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित आरण गांव अब पर्यटन के नक्शे पर अपनी पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है. यहां बड़ी संख्या में मोरों की मौजूदगी को देखते हुए राज्य स्तरीय मयूर बिहार विकसित करने की पहल शुरू हुई है. महिषी विधायक प्रो. गौतम कृष्ण ने जिलाधिकारी दीपेश कुमार से हुई बातचीत के बाद यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि मोरों के संरक्षण के लिए जमीन चिन्हित कर ली गयी है और ऐसा मयूर बिहार विकसित करने की योजना है, जैसा बिहार में कहीं नहीं है.
मयूर बिहार बनने से बदलेगी इलाके की तस्वीर
विधायक प्रो. गौतम कृष्ण के अनुसार आरण में मयूर बिहार विकसित होने के बाद यह क्षेत्र पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा. इससे न केवल मोरों के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी यहां मोरों को देखने का अवसर मिलेगा. उन्होंने कहा कि मयूर बिहार बनने के बाद आरण गांव बिहार के मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना सकेगा.
विधायक ने बताया कि मयूर बिहार के निर्माण के लिए सरकार के स्तर पर राशि की कमी नहीं है. अब प्रशासनिक स्तर पर जमीन सहित अन्य जरूरी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने की पहल की जा रही है.
प्रभात खबर की खबर के बाद सक्रिय हुआ प्रशासन
आरण गांव में मोरों के संरक्षण को लेकर प्रभात खबर में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गयी थी. इसके बाद प्रशासनिक पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पहल शुरू की. इसी क्रम में जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने जिले के अन्य पदाधिकारियों के साथ आरण गांव का निरीक्षण किया और मयूर बिहार के लिए सरकारी जमीन का जायजा लिया.
जिलाधिकारी ने सीओ शिखा सिंह को चिह्नित जमीन की मापी कराने, नजरी नक्शा तैयार करने और रिपोर्ट समर्पित करने का निर्देश दिया है. इसके बाद मयूर बिहार की योजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है.
विधानसभा में भी उठ चुका है मामला
आरण में मयूर बिहार बनाने का मुद्दा विधानसभा में भी उठ चुका है. विधायक प्रो. गौतम कृष्ण ने विधानसभा सत्र के दौरान सदन में इस संबंध में प्रश्न उठाया था. इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर आरण गांव का निरीक्षण और जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू हुई.
2016 में मुख्यमंत्री ने देखा था आरण का मोर
आरण में मयूर बिहार बनाने की चर्चा नयी नहीं है. वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आरण गांव का दौरा कर यहां मौजूद मोरों को देखा था. इस दौरान उन्होंने मोरों पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी देखी थी. उसी समय आरण में मयूर बिहार बनाने की घोषणा की गयी थी. हालांकि इसके बाद करीब एक दशक तक यह मामला आगे नहीं बढ़ सका.
अब प्रशासनिक पहल शुरू होने के बाद ग्रामीणों में एक बार फिर उम्मीद जगी है कि वर्षों पुराना प्रस्ताव धरातल पर उतर सकेगा.
संरक्षण को लेकर ग्रामीण भी सक्रिय
आरण में मोरों के संरक्षण और मयूर बिहार बनाने की मांग को लेकर स्थानीय लोग भी सक्रिय हैं. भाजपा मंडल उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार कुंदन उर्फ झुनू यादव, युवा समाजसेवी अमित कुमार सहित दर्जनों ग्रामीण लगातार पहल कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि मोरों के संरक्षण के साथ यदि यहां पर्यटन की सुविधाएं विकसित की जाती हैं, तो आरण की पहचान दूर-दूर तक बनेगी.
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