ओवरलोड नाव हर बार बनती है दुर्घटना की वजह

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सिमरी : अनुमंडल अंतर्गत सलखुआ एवं सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के पूर्वी कोसी तटबंध के भीतर बसी एक घनी आबादी दियारा-फरकिया के इलाके से अभी भी लोगों को बाजार व प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने के लिए नावों का ही सहारा लेना पड़ता है. यह स्थिति सिमरी बख्तियापुर अनुमंडल के सिमरी बख्तियारपुर एवं सलखुआ प्रखंड के पूर्वी […]

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सिमरी : अनुमंडल अंतर्गत सलखुआ एवं सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के पूर्वी कोसी तटबंध के भीतर बसी एक घनी आबादी दियारा-फरकिया के इलाके से अभी भी लोगों को बाजार व प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने के लिए नावों का ही सहारा लेना पड़ता है.

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यह स्थिति सिमरी बख्तियापुर अनुमंडल के सिमरी बख्तियारपुर एवं सलखुआ प्रखंड के पूर्वी कोसी तटबंध के भीतर बसे दर्जनों गांवों की है. सलखुआ प्रखंड के चार पंचायत कबीरा, चानन, अलानी एवं साम्हरखुर्द एवं सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के चार पंचायत धनुपरा, कठडूमर, घोघसम एवं बेलवाड़ा पंचायत के दर्जनों गांव के लाखों की आबादी सरकार के विकास की पोल खोल रहा है.
इन क्षेत्रों के लोगों के लिए नाव ही नदी पार करने का एक मात्र साधन है और लोग पुल सहित पक्की सड़कों की मांग वर्षों से करते आ रहे हैं. परंतु कोसी दियारा-फरकिया वासियों की मांगे आज तक पूरी नहीं हो सकी है. इस स्थिति में फरकिया इलाके में स्वास्थ्य, शिक्षा, शुद्ध पेयजल, बिजली, पक्की सड़क एवं कोसी नदी में पुल की परिकल्पना बेईमानी साबित हो रही है.
मौत का सफर करते हैं नाव पर सवार यात्री: नौका आदर्श नियमावली 2011 के तहत सूर्यास्त के बाद नाव परिचालन न करने के नियम पर एक ओर राज्य सरकार जहां पूरी तरह सख्त नजर आ रही है. वहीं जिला प्रशासन आज भी इन चीजों से बेखबर कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है. मनमानी पूर्ण नाव परिचालन को देखते हुए भविष्य में बड़ी नाव दुर्घटना होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है.
वहीं वर्तमान में प्रशासन के लाख दावों के बावजूद बिहार सरकार के नौका नियमावली की धज्जियां उड़ रही है. नियमावली के अनुसार किसी भी परिस्थिति में अन्य यात्रियों के साथ नाव में पशु को रखने की अनुमति नहीं है. लेकिन पूर्वी कोसी तटबंध से सटे सभी घाटों पर इस नियम को तोड़ा जा रहा है.
वहीं विभिन्न घाटों पर आज भी नाव से इंसान और पशु साथ-सा��� सवारी कर रहे हैं. जिस वजह से अत्यधिक भीड़ की वजह से नाव पर पशु को देख डरे-सहमे रहते हैं. इसके साथ ही नाव पर लाइफ जैकेट की व्यवस्था भी जरूरी है. इस संबंध में जानकार कहते हैं कि अनुमंडल प्रशासन की कानून के प्रति बेरुखी की वजह से मनमाने ढंग से नाव परिचालन जारी है. जिस वजह से दुर्घटना की आशंका रहती है.
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