राजद संसद में उठायेगा जाति गणना की मांग, बोले लालू यादव- हर जाति में गरीबी है, अब होगा सबका विकास
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Aug 2023 6:16 PM
भाजपा पर हमला बोलते हुए लालू यादव ने कहा कि ये लोग बिहार में और देश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन कुछ भी बिगड़ने वाला नहीं है, अगर कुछ बिगड़ेगा वह भाजपा का बिगड़ेगा.
पटना. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कहा कि जातीय जनगणना पर जो फैसला कोर्ट ने दिया है वह स्वागत योग्य है. लोगों की बिहार में स्थिति क्या है, अब वह पता चलेगा. विकास के रास्ते खुलेंगे और सरकार सही तरीके से योजना बनाएगी. लालू ने कहा कि इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को हम धन्यवाद देते हैं. मालूम हो कि पटना हाईकोर्ट ने जातीय जनगणना के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया. बिहार में अब जातीय जनगणना का रास्ता साफ हो गया.
हर जाति में गरीबी है
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव आज दिल्ली के लिए रवाना हुए. पटना से दिल्ली रवाना होने से पहले राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत की. पत्रकारों से बात करते हुए लालू यादव ने कहा कि यह बिहार की जनता की जीत है. बिहार हित में कोर्ट ने यह फैसला लिया है. भाजपा ने साजिश कर जातीय गणना पर स्टे लगाया था. हर जाति में गरीबी है. इससे अब उनकी आर्थिक स्थिति का पता चलेगा. सरकार उनके लिए योजना बनाने में मददगार होगी. नाला सफाई करने वाले, भीख मांगने वाले, गरीबी में रहने वाले लोगों के लिए इसके आधार पर योजना सरकार बनाएगी.
यह सर्वे बिहार सरकार करा रही है
दिल्ली जाने के दौरान तेजस्वी यादव ने पटना हाईकोर्ट के फैसले पर कहा कि जातीय गणना कराये जाने का फैसला स्वागत योग्य है. तेजस्वी यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी जातीय गणना की मांग को लेकर मिले थे, लेकिन यह सर्वे बिहार सरकार करा रही थी, इस फैसले के बाद हम पूरे देश में जातीय जनगणना कराने की मांग करेंगे. लालू प्रसाद यादव ने शुरुआती दौर से संघर्ष किया संसद में भी इस मामले को उठाने की कोशिश की है.
सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे भाजपा के लोग
लालू प्रसाद ने भाजपा को नसीहत देते हुए कहा कि ये लोग बिहार में और देश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कुछ भी बिगड़ने वाला नहीं है. अगर कुछ बिगड़ेगा वह भाजपा का बिगड़ेगा. उन्होंने कहा कि अब देश की जनता जानती है कि सांप्रदायिक शक्तियां माहौल बिगाड़ना चाहती है, लेकिन इससे कुछ होने वाला नहीं है.
हमारी सारी संपत्ति सार्वजनिक है
वही ईडी की ओर से 6 करोड़ की संपत्ति को अटैच करने के मामले में तेजस्वी यादव ने कहा कि हमलोगों की कोई भी संपत्ति दुनिया का कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन देख सकता है. इससे पहले भी बेनामी में संपत्ति अटैच किया था, हमने बेनामी संपत्ति भी पा लिया है.
बिहार ने देश को एक बार फिर दी दिशा
इससे पूर्व राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने कहा है कि जातीय गणना के संदर्भ में बिहार ने एक बार फिर देश को दिशा दी है. जातीय गणना के संदर्भ में मंगलवार को आया हाइकोर्ट का फैसला गरीबों के हक और सामाजिक न्याय के पक्ष में है. उन्होंने कहा कि जातीय गणना के संदर्भ में पटना उच्च न्यायालय के फैसले से न्याय व्यवस्था के प्रति आस्था बढ़ी है. इस फैसले का हम सभी सिर झुकाकर सम्मान करते हैं. आगे भी इसी तरह से न्याय मिलता रहे, इसकी कामना करते हैं.
जातीय गणना से जातीय कटुता बढ़ेने की बात बेमतलब
राजद प्रदेश अध्यक्ष सिंह ने कहा कि कुछ लोगों ने अनर्थपूर्ण तर्कों के माध्यम से जातीय गणना को रुकवाने का भरसक प्रयास किया था. न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला देकर जातीय गणना के प्रति सरकार की उस सोच को मजबूत किया है, जिसके माध्यम से वह गरीबों का कल्याण और विकास करना चाहती है. उन्होंने कहा कि जातीय गणना के संदर्भ में लालू प्रसाद और उनके सहयोगियों ने जो कुछ कहा और किया, उस पर पटना उच्च न्यायालय ने मुहर लगा दी है. हालांकि उन्होंने साफ किया कि यह फैसला उनकी पराजय है, जो इसके संदर्भ में नकारात्मक प्रचार कर रहे थे. जो कह रहे थे कि जातीय गणना से जातीय कटुता बढ़ेगी. जातीय खाई पैदा हो गयी.
उच्च न्यायालय ने कमजोर वर्ग के साथ न्याय किया
जगदानंद सिंह ने कहा कि जातीय गणना का मकसद उस वंचित वर्ग को विकास की मुख्य धारा में लाना है, जो अभी तक हाशिये पर है. इससे उनका पिछड़ापन दूर होगा. विकास का मार्ग प्रशस्त होगा. उच्च न्यायालय ने इस फैसले के जरिये कमजोर वर्ग के साथ न्याय किया है. कहा कि लालू प्रसाद समाजवादियों की विरासत को संभाले हुए हैं. वह गरीबों को उनका अधिकार दिला रहे हैं. समाजवादी लोग जाति विहीन समाज चाहते हैं. समाजवादी कभी जाति वादी नहीं हो सकते हैं. एक सवाल के संदर्भ में जगदानंद सिंह ने कहा कि अब केंद्र को भी सभी राज्यों में जातीय गणना कराना चाहिये. आखिर स्कूल में नाम लिखाते समय और दूसरे संदर्भ में हम धर्म और जाति आदि लिखते ही है. केंद्र जाति की संख्या को क्यों छुपाना चाहता है.
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