Watch Video: राघोपुर में बाढ़ के बीच बच्चों की पढ़ाई डूबी, सड़क पर पानी देख ग्रामीणों ने पूछा- कौन सुनेगा?
Bihar Flood: बिहार के राघोपुर विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है. गंगा और गंडक के उफान से गांव टापू बन गए हैं, जिससे लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है. बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है.
Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का कहर जारी है. गंगा और गंडक समेत कई नदियों के बढ़ते जलस्तर से गांवों और सड़कों पर पानी फैल गया है. पटना से कुछ ही दूरी पर स्थित राघोपुर विधानसभा क्षेत्र में भी बाढ़ ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. यहां कई गांवों को जोड़ने वाली सड़कें पानी में डूबी हैं और लोगों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है. सबसे बड़ी चिंता बच्चों की पढ़ाई को लेकर सामने आ रही है. कई ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के पानी के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं.
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राघोपुर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का विधानसभा क्षेत्र है. वहीं चिराग पासवान इस क्षेत्र के सांसद हैं. बाढ़ की स्थिति के बीच ग्रामीणों की नजर जनप्रतिनिधियों और सरकार की ओर है. ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ के दौरान यही समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाया है.
फोरलेन और रिंग बांध के दावों के बीच सड़क पर पानी
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान सरफाबाद पंचायत के जफराबाद इलाके में सड़क पूरी तरह पानी में डूबी नजर आयी. स्थानीय लोगों के अनुसार इस रास्ते से आसपास के तीन-चार गांवों के लोग आवागमन करते हैं. सड़क पर पानी भर जाने के बाद लोगों की परेशानी बढ़ गयी है.
ग्रामीण फकीरा कुमार ने बताया कि सड़क पर पानी भर जाने के कारण लोगों को नाव से आना-जाना पड़ रहा है. उनका कहना है कि सुबह करीब छह बजे नाव पकड़ने के बाद काफी देर में वे यहां पहुंच सके. उन्होंने कहा कि गंगा में बहाव भी तेज है और ऐसी स्थिति में लोगों के लिए आवागमन काफी मुश्किल हो जाता है.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क को ऊंचा कर बेहतर तरीके से बनाया जाता, तो बाढ़ के दौरान भी लोगों को आने-जाने में इतनी परेशानी नहीं होती.
तीन-चार गांवों के लोगों के सामने आवागमन का संकट
बाढ़ का पानी सड़क पर फैलने के कारण कई गांवों का सामान्य आवागमन प्रभावित हुआ है. स्थानीय लोगों को जरूरी सामान, इलाज और अन्य कामों के लिए भी नाव पर निर्भर रहना पड़ रहा है.
ग्रामीणों ने बताया कि पानी बढ़ने के साथ परेशानी और बढ़ जाती है. उनका कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से लंबे समय से बाढ़ से स्थायी राहत की मांग की जाती रही है.
तेजस्वी यादव पर भी ग्रामीणों ने उठाये सवाल
राघोपुर विधानसभा क्षेत्र तेजस्वी यादव का क्षेत्र है. बाढ़ के बीच कुछ ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि उन्होंने वोट देकर अपना प्रतिनिधि चुना है, लेकिन मुश्किल समय में उनकी समस्याएं कौन सुनेगा.
ग्रामीणों के अनुसार तेजस्वी यादव राघोपुर के कुछ इलाकों में पहुंचे हैं, लेकिन सरफाबाद जैसे प्रभावित इलाकों में भी लोगों को अपने प्रतिनिधि के पहुंचने और समस्याएं देखने की उम्मीद है.
हालांकि तेजस्वी यादव की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच राहत सामग्री पहुंचाने की जानकारी भी सामने आयी है और आरजेडी कार्यकर्ता भी प्रभावित इलाकों में राहत कार्य में जुटे हैं.
सम्राट चौधरी और चिराग पासवान से भी स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और सांसद चिराग पासवान से भी राघोपुर की बाढ़ समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है. उनका कहना है कि हर साल बाढ़ आने पर सड़क, आवागमन और गांवों की सुरक्षा का सवाल खड़ा हो जाता है.
ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ राहत सामग्री या नाव उपलब्ध कराने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. बाढ़ से बचाव के लिए मजबूत सड़क, तटबंध और जलनिकासी की व्यवस्था जरूरी है.
राघोपुर में रिंग बांध को लेकर भी सवाल
ग्रामीणों ने राघोपुर में रिंग रोड और रिंग बांध से जुड़े दावों का भी जिक्र किया. उनका कहना है कि योजनाओं और घोषणाओं की चर्चा तो होती है, लेकिन जमीन पर बाढ़ से बचाव के लिए स्थायी व्यवस्था दिखाई नहीं देती.
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि बाढ़ से बचाव के लिए मजबूत सड़क और तटबंध की व्यवस्था हो, तो हर साल लोगों को इसी तरह पानी और नाव के भरोसे क्यों रहना पड़े.
बाढ़ के पानी में डूब गयी बच्चों की पढ़ाई
इस बाढ़ का सबसे बड़ा असर बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ रहा है. ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान जमालपुर के रहने वाले बच्चों से बात की गयी. बच्चों ने बताया कि बाढ़ के कारण स्कूल जाने में परेशानी हो रही है.
पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र ने बताया कि उसके गांव के आसपास पानी भर गया है. पानी और रास्ते की परेशानी के कारण स्कूल जाना बंद हो गया है. बच्चों के अनुसार हेमतपुर की ओर स्थित स्कूल तक पहुंचने में भी बाढ़ के कारण परेशानी हो रही है.
ग्रामीणों का कहना है कि घर और खेतों में पानी भरने के साथ बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. स्कूल तक पहुंचने का रास्ता पानी में डूब जाने से बच्चे कई दिनों तक पढ़ाई से दूर हो जाते हैं.
महिलाओं ने भी बतायी राहत नहीं मिलने की परेशानी
ग्रामीण महिलाओं ने भी बाढ़ के दौरान राहत व्यवस्था को लेकर अपनी परेशानी बतायी. एक महिला ने कहा कि बाढ़ आने के बाद गांव में खाने-पीने की चीजों और अन्य जरूरी सामान की जरूरत होती है, लेकिन सभी जगह पर्याप्त मदद नहीं पहुंच पाती.
महिला का कहना था कि बाढ़ का पानी बार-बार आने से कई वर्षों से यही समस्या बनी हुई है. ग्रामीणों की मांग है कि केवल बाढ़ के समय राहत देने के बजाय ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे हर साल पानी आने पर गांवों का संपर्क न टूटे.
ग्रामीणों का सवाल- हर साल यही हाल क्यों?
राघोपुर के बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या एक साल की नहीं है. गंगा का जलस्तर बढ़ते ही निचले इलाकों में पानी पहुंचने लगता है. सड़कें डूब जाती हैं और गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता है.
ग्रामीणों का कहना है कि पटना से महज कुछ दूरी पर होने के बावजूद राघोपुर के कई इलाकों में बाढ़ के समय लोगों को नाव के सहारे रहना पड़ता है. उनका सवाल है कि जब स्थायी समाधान के विकल्प मौजूद हैं, तो उन पर गंभीरता से काम क्यों नहीं होता.
शिक्षा और विकास पर भी बड़ा सवाल
बाढ़ प्रभावित इलाके में खड़े होकर ग्रामीणों की परेशानी को देखें तो मामला केवल पानी और आवागमन तक सीमित नहीं है. बाढ़ के कारण खेतों को नुकसान, घरों में पानी और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने से ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर पड़ रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के पानी में सिर्फ सड़कें ही नहीं डूबतीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और इलाके के विकास की रफ्तार भी प्रभावित होती है. अब लोगों की मांग है कि सरकार और जनप्रतिनिधि मिलकर राघोपुर की बाढ़ समस्या का स्थायी समाधान निकालें, ताकि हर साल बाढ़ आने पर उन्हें नाव के भरोसे जिंदगी न बितानी पड़े.
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