कटिहार: बामसेफ का 25वां राज्य अधिवेशन संपन्न, सूर तुलसी कॉलेज में निजीकरण और पूंजीवाद के खिलाफ गूंजी आवाज

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कटिहार में बामसेफ का 25वां राज्य अधिवेशन गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ. दो दिनों तक चले इस वैचारिक सम्मेलन में मूल निवासियों के सांगठनिक विकास, सामाजिक उत्थान और आर्थिक-राजनीतिक चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की गई. निजीकरण और पूंजीवाद के दुष्परिणामों पर विशेष जोर दिया गया.

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सीमांचल के कटिहार शहर स्थित दिवंगत बाबू कीर्ति नारायण मंडल द्वारा स्थापित ऐतिहासिक सूर तुलसी कॉलेज परिसर में बामसेफ (BAMCEF) का 25वां राज्य अधिवेशन गरिमामयी माहौल में संपन्न हुआ. दो दिनों तक चले इस गहन वैचारिक सम्मेलन में मूल निवासियों के सांगठनिक विकास, सामाजिक उत्थान और उनके सामने आ रही आर्थिक व राजनीतिक चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की गई. कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ 'संविधान गौरव पथ प्रदर्शन' और संगठन के ध्वजारोहण के साथ हुआ, जिसके बाद विभिन्न वैचारिक और प्रबोधन सत्रों का आयोजन किया गया.

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संविधान गौरव पथ प्रदर्शन से हुई शुरुआत

अधिवेशन के प्रथम सत्र का आगाज संविधान गौरव पथ प्रदर्शन और झंडोत्तोलन से हुआ. इसके उपरांत बामसेफ के प्रदेश अध्यक्ष मूलनिवासी राजकमल ने विषय की प्रस्तावना रखते हुए प्रबोधन सत्र की नींव रखी. पूरे कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन राज्य उपाध्यक्ष मूलनिवासी डॉ. रीना कुमारी ने किया.

पूंजीवाद और निजीकरण के दुष्परिणाम अब सामने: डॉ. संजय इंगोले

सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे बामसेफ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मूलनिवासी डॉ. संजय इंगोले ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे. उन्होंने "राष्ट्रीयकरण का पैगाम, निजीकरण पर लगाम अर्थात राष्ट्रीयकरण से लोकतांत्रिक राज्य समाजवाद की ओर" विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि बामसेफ लंबे समय से निजीकरण के खिलाफ राष्ट्रव्यापी स्तर पर अलख जगा रहा है. पूर्व में जो लोग इसके दुष्प्रभावों को नहीं समझ पा रहे थे, वे आज इसके व्यापक कुप्रभावों को सीधे महसूस कर रहे हैं, जिसका सबसे बड़ा नुकसान आम जनमानस और वंचित वर्ग को उठाना पड़ रहा है.

विद्वानों और कुलपतियों ने भी रखे विचार

अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति मूलनिवासी प्रो. डॉ. विवेकानंद सिंह और विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुए बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (मुजफ्फरपुर) के पूर्व कुलपति मूलनिवासी प्रो. डॉ. फारूक अली ने भी अपने विचार साझा किए. उन्होंने सामाजिक न्याय, शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता पर बल दिया.

प्रदेश महासचिव सहित कई गणमान्य रहे उपस्थित

इस दो दिवसीय सांगठनिक समागम में प्रदेश महासचिव मूलनिवासी रमेश पासवान समेत राज्य और जिला स्तर के अनेक पदाधिकारियों, सामाजिक विचारकों एवं कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई. सभा के अंत में संगठन की आगामी रणनीतियों और सामाजिक चेतना के प्रसार को लेकर प्रस्ताव पारित किए गए.

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