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सावन में बटेश्वर स्थान से जल उठाकर बाबा वरूणेश्वर स्थान का अभिषेक करने की परंपरा

Updated at : 10 Jul 2025 7:06 PM (IST)
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सावन में बटेश्वर स्थान से जल उठाकर बाबा वरूणेश्वर स्थान का अभिषेक करने की परंपरा

बटेश्वर स्थान

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अरविन्द कुमार जायसवाल, बीकोठी. बड़हराकोठी के प्रसिद्ध बाबा वरूणेश्वर स्थान की महिमा अपार है. सावन को लेकर इसे काफी सजाया जा रहा है. सावन माह में यहां हर सोमवारी को शिवभक्तों का सैलाब उमड़ता है. श्रद्धालु बटेश्वर स्थान से जल उठाकर यहां जलाभिषेक करते हैं. सावन माह की प्रथम सोमवारी से ही यहां श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगता है और पूरे एक माह तक मेला लगा रहता है. यहां जो भी श्रद्धा, प्रेम,भक्ति,तथा अटल विश्वास से जलार्पण करते हैं उनकी मन की मुराद पूरी होती है. वैसे तो प्रत्येक दिन यहां जलाभिषेक के लिए शिवभक्तों की भीड़ रहती है परन्तु सावन माह के अवसर पर यहां जलाभिषेक एक अलग ही महत्व रखता है. दो नदी से घिरे इस स्थान मे मां काली, शिव गंगा भैरव, बजरंगवली,नंदी, राम लखन सिया मंदिर को भी सजाया जा रहा है. यहां पूर्णिया,सहरसा, मधेपुरा, भागलपुर, कटिहार जिला के अलावा पड़ोसी देश नेपाल के भी श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए आते हैं. बाबा बरूनेश्वर स्थान का इतिहास यहां के शिवलिंग स्वयंभू महादेव हैं..किंवदन्ति है कि यहां जंगल ही जंगल था. इस जंगल मे चरवाहे अपनी गाय चराया करता था. गाय के झुंड मे से एक गाय अलग हटकर प्रत्येक दिन अपना दूध एक जगह खड़ा हो गिराया करती थी. इसकी जानकारी मिलते ही चरवाहे उस गाय पर नजर रखने लगा. एक दिन वह गाय दूध गिराते पकड़ी गई. चरवाहे ने लाठी फेककर गाय को मारा चरवाहे को लगा कि लाठी किसी ठोस वस्तु से टकराई हो. जैसे ही चरवाहे वहां गया तो देखा कि एक पत्थर है जिससे खून निकल रहा है. उस जगह ग्रामीणों गहराई तक खोद मगर उसका गहराई का पता नही चल पाया. अंत में वहां एक झोपड़ी बना पूजा करने लगे. कालांतर में विसनपुर डेहरी के भूपति मोलचंद , बिहारीगंज के माता देव नामक मारवाड़ी ने इस परिसर में निर्माण कराये. पांडवों ने भी की थी पूजा देवरी गांव निवासी अरुण कुमार झा बताते हैं कि बुजुर्गों के कथनानुसार अज्ञातवास के दौरान पांडव भी बरुणेश्वर आये थे. यहां पांडव पूजा किया करते थे. इतना ही नही श्रृंगी ऋषि के भाई ने यहां आकर साधना की और तब से यह स्थान प्रसिद्ध है. विकास समिति है कार्यरत यहां बाबा वरूणेश्वर स्थान विकास समिति है जो मंदिर परिसर और मेला की निगरानी करती है. हजारों श्रद्धालु यहां जलाभिषेक कर मन्नत मांगते हैं. 22 जुलाई को सावन माह की पहली सोमवारी को जल ढरी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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