मंचीय प्रस्तुति के लिए बच्चों ने सीखीं झूमर, सोहर और पामरिया नृत्य की बारीकियां; विलुप्त होती विधाओं को बचाने की मुहिम
फोटो- प्रशिक्षण में भाग लेते प्रतिभागी | Prabhat Khabar Network
आम्रपाली लोकगीत एवं लोकनृत्य प्रशिक्षण कार्यक्रम में 11वें दिन प्रतिभागियों ने सोहर, बधाई और झूमर लोकगीतों का अभ्यास किया. इसका उद्देश्य विलुप्तप्राय लोक विधाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है. यह निःशुल्क प्रशिक्षण 8 सितंबर तक चलेगा.
पूर्णिया. कला एवं संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन, पूर्णिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 15 दिवसीय आम्रपाली लोकगीत एवं लोकनृत्य प्रशिक्षण कार्यक्रम के 11वें दिन प्रतिभागियों ने विभिन्न लोक विधाओं का अभ्यास किया. प्रेक्षागृह सह आर्ट गैलरी स्थित आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित कार्यशाला में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर सोहर, बधाई और झूमर लोकगीतों का प्रशिक्षण दिया गया. 25 अगस्त से शुरू हुआ यह निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम 8 सितंबर तक चलेगा.
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सोहर, झूमर और बारहमासा लोकगीतों का कराया अभ्यास
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को झूमर, सोहर और बारहमासा लोकगीतों के साथ सोहर, झूमर एवं पामरिया लोकनृत्य का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया. प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को लोक विधाओं के मूल और पारंपरिक स्वरूप की जानकारी दी. इसके साथ ही उन्हें लोक कलाओं के शास्त्रीय और प्रयोगात्मक पक्ष से भी अवगत कराया गया.
बेहतर मंचीय प्रस्तुति के लिए सिखायी गयी बारीकियां
कार्यशाला में प्रतिभागियों को गायन और नृत्य की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षकों ने बेहतर मंचीय प्रस्तुति के लिए सुर, ताल, भाव-भंगिमा और प्रस्तुति शैली पर विशेष ध्यान दिया. प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न लोक विधाओं का अभ्यास कर अपनी प्रस्तुति को बेहतर बनाने का प्रयास किया.
जन्माष्टमी पर बच्चों को सिखाये गये सोहर और बधाई गीत
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी पंकज कुमार पटेल ने बताया कि जन्माष्टमी के अवसर पर बच्चों को विभिन्न प्रकार के सोहर एवं बधाई गीतों का प्रशिक्षण दिया गया. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य विलुप्तप्राय लोकगीत और लोकनृत्य विधाओं को संरक्षित कर उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना है.
लोक कलाओं को बचाने में आम लोगों की भागीदारी जरूरी
कार्यशाला के 11वें दिन अपर समाहर्ता सह जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी जयचंद यादव भी मौजूद रहे. उन्होंने प्रतिभागियों और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया. उन्होंने कहा कि कला हमारी धरोहर है और इसे संजोकर रखना युवा पीढ़ी का कर्तव्य है. उन्होंने कहा कि विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी लोक कलाओं के संरक्षण के लिए कलाकारों के साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है. ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी पारंपरिक लोक संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
8 सितंबर तक चलेगा निःशुल्क प्रशिक्षण
25 अगस्त से शुरू हुआ आम्रपाली लोकगीत एवं लोकनृत्य प्रशिक्षण कार्यक्रम 8 सितंबर तक चलेगा. प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को विभिन्न लोकगीतों और लोकनृत्य विधाओं का व्यावहारिक ज्ञान देने के साथ मंचीय प्रस्तुति के लिए तैयार किया जा रहा है. आयोजकों का जोर लोक कलाओं के संरक्षण और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने पर है.
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