पीला सोना उगाने वाले मक्का किसानों लग रहा धक्का, नहीं मिल रहा उचित दाम

नहीं मिल रहा उचित दाम
मक्का के दाम में लगातार गिरावट ने बढ़ा दी है जिले के किसानों की चिंता
समर्थन मूल्य पर मक्का की खरीदारी की बेहतर व्यवस्था की कर रहे हैं मांग
समर्थन मूल्य कीखरीदारी के सवाल पर सड़क पर आएगा किसान मजदूर संघ
पूर्णिया. जिले के मक्का किसानों के लिए इस साल का सीजन चुनौती पूर्ण बना हुआ है, क्योंकि बंपर बुवाई और मंडी में अधिक आवक के कारण दाम गिरे हुए हैं और ऊपर नहीं उठ रहे हैं. इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है. किसानों का मानना कि कम से कम दो साल की तरह भी दाम मिल जाए तो बहुत राहत मिलेगी मगर इसकी उम्मीद नजर नहीं आ रही है. आलम यह है कि वर्ष 2024 में जो मक्का 2600 प्रति क्विंटल बिके थे उसके दाम 1900 तक लगाए जा रहे हैं. किसानों का कहना है कि मक्का के दाम ने इस बार उन्हें ज्यादा हताश कर दिया है और यही कारण है कि वे सड़क पर उतरने का मन बना रहे हैं. बिहार किसान मजदूर संघ ने सरकार से समर्थन मूल्य पर मक्का की खरीदारी की बेहतर व्यवस्था की मांग की है.गौरतलब है कि बदलते दौर में मक्के की खेती इस इलाके के किसानों की जीवन रेखा है. जिले में बड़े पैमाने पर मक्के की खेती है. यही वजह है कि इस इलाके को मक्के का कटोरा कहा जाता है. लेकिन पिछले साल से ही मक्का की खेती करना किसानाें के लिए घाटे का सौदा बनती जा रही है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में औसतन 57 हजार हेक्टेयर में मक्का की खेती होती है. जिले में 517560 एमटी मक्का के उत्पादन का विभागीय अनुमान है. जिले के गुलाबबाग में मक्का की सबसे बड़ी मंडी है जहां दो से तीन लाख टन मक्का की हर साल खरीदारी हुआ करती है. बिहार किसान मजदूर संघ की मानें तो पिछले साल2300 रुपए प्रति क्विंटल तक बिकने वाला मक्का के दाम इस साल 1900 रुपए तक हो गये हैं जबकि ग्रामीण इलाकों में इसके भाव और कम लगाए जा रहे हैं. जानकारों कीमानें तो सितंबर 2025 में मंडियों में मक्के के औसत थोक भाव अगस्त के मुकाबले 9 फीसदी और पिछले साल के मुकाबले 10 फीसदी कम हो गये.
किसानों को समर्थन मूल्य न मिलने का मलाल
अगर दो साल पहले की कीमत देखी जाए तो उच्च क्वालिटी के मक्का का दाम 26 सौ रूपए प्रति क्विंटल तक गया था जबकि इससे पहले भी दाम ने किसानों को निराश कर रखा था. इस साल का शुरुआती दौर भी निराशाजनक रहा है पर किसानों को यह मलाल है कि उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य का लाभ आज तक नहीं मिल सका. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025-26 के के लिए सरकार द्वारा मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,400 प्रति क्विंटल निर्धारित है खुले बाजार में उन्हें 19-20 सौ के आसपास रेट में मक्का बेचना पड़ रहा है. बिहार किसान मजदूर संघ के संस्थापक अनिरुद्ध मेहता का कहना है कि मक्का की फसल जब खेतों में होती है तो दाम चढ़े हुए रहते हैं पर जैसे ही फसल तैयार होकर बिकने वाली होती है, भाव गिर जाते हैं जो किसानों के लिए निराशाजनक स्थिति है. उनका कहना है कि यही हाल रहा तो सरकार ने मक्का का समर्थन मूल्य तो लागू कर दिया पर धान-गहूं की तरह सरकारी खरीदारी शुरू नहीं हुई है. इस दिशा में पहल नहीं हुई तो किसान सड़क पर उतरने को विवश हो जाएंगे. किसान सरकार से हस्तक्षेप कर उचित मूल्य दिलाने और मंडी व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं.—————
बाजार में दाम पर एक नजर
वर्ष दर (प्रति क्विंटल)
2000 1500 से 1800
2021 1900 से 21002022 2150 से 2250
2023 2100 से 22502024 2350 से 2600
2025 2200 से 22502026 1900 से 2050
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