कसबा के श्री सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन मात्र से कटते हैं सारे कष्ट: दिव्य प्रतिमा देख मंत्रमुग्ध होते हैं श्रद्धालु

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सिद्धि विनायक | Prabhat Khabar Network

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कसबा के सिद्धिविनायक मंदिर में अलौकिक प्रतिमा के दर्शन मात्र से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं. यह स्थान श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है.

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सनातन परंपरा में देवों के देव महादेव और माता पार्वती के लाडले भगवान श्रीगणेश को प्रथम पूज्य माना गया है. किसी भी मांगलिक या शुभ कार्य की शुरुआत से पहले विघ्नहर्ता गजानन की आराधना अनिवार्य मानी जाती है.

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पूर्णिया जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर कसबा स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर इन दिनों समूचे सीमांचल क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए अगाध श्रद्धा और अटूट विश्वास का बड़ा केंद्र बन चुका है. बुद्धि, रिद्धि-सिद्धि और ऐश्वर्य के प्रदाता भगवान सिद्धिविनायक के इस पावन धाम में मत्था टेकने मात्र से भक्तों के जीवन के समस्त संकट व विघ्न दूर हो जाते हैं.

कसबा के मुरारी टोल में स्थित है दिव्य धाम, लक्ष्मी और सरस्वती की कृपा

पूर्णिया-अररिया मुख्य मार्ग पर अवस्थित कसबा नगर के मुरारी टोल में यह भव्य मंदिर स्थापित है. कसबा की यह ऐतिहासिक खासियत रही है कि इस भूमि को माता लक्ष्मी और मां सरस्वती दोनों का वरदान प्राप्त है.

व्यापार और धन-संपदा के साथ-साथ शिक्षा व बौद्धिक जगत में कसबा के लोग हमेशा अग्रणी रहे हैं. इसी आध्यात्मिक परिवेश में स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर क्षेत्र की सकारात्मक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां हर रोज सैकड़ों भक्त दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं.

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अलौकिक प्रतिमा और वास्तु शिल्प भक्तों को करता है आकर्षित

मंदिर के गर्भगृह में प्रतिष्ठापित भगवान सिद्धिविनायक की भव्य प्रतिमा अपनी अप्रतिम कलाकृति, आध्यात्मिकता और दिव्यता से हर आगंतुक को सम्मोहित कर लेती है.

इस भव्य मंदिर की स्थापना पूर्णिया के सुप्रसिद्ध शल्य चिकित्सक (सर्जन) डॉ. अनिल कुमार गुप्ता एवं उनकी धर्मपत्नी पिंकी गुप्ता द्वारा कराई गई थी. मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही असीम मानसिक शांति और ऊर्जा का संचार होता है. यहां विराजे बप्पा के स्वरूप को अत्यंत शांत, शुभ और अभय प्रदान करने वाला माना जाता है.

बुधवार को विशेष पूजन, मन्नतें पूरी होने पर गूंजते हैं जयकारे

मंदिर में नियमित रूप से सुबह और शाम वैदिक विधि-विधान से आरती व अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं. हालांकि, भगवान गणेश का प्रिय दिन होने के कारण प्रत्येक बुधवार को यहां श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ता है.

शंखध्वनि, घड़ियाल और अथर्वशीर्ष के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान सिद्धिविनायक का पंचामृत अभिषेक और दूर्वा-मोदक अर्पण किया जाता है. जिले भर से आने वाले श्रद्धालु चौखट पर माथा टेककर परिवार के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, व्यापार में उन्नति और बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं.

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