अमौर के असियानी में पुराना पुल टूटने के बाद निर्माणाधीन पुल के धीमे कार्य को लेकर दो विभागों में ठनी

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अमौर असियानी घाट पर निर्माणाधीन नया पुल 33KV बिजली लाइन की बाधा के चलते धीमा पड़ गया है. ग्रामीण कार्य विभाग और बिजली विभाग के बीच खींचतान के कारण पुल निर्माण में देरी हो रही है. यह विलंब स्थानीय लोगों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन गया है.

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Amaur Asiyani Bridge Construction: पूर्णिया जिले के अमौर प्रखंड के तियारपारा स्थित असियानी घाट पर पुराना लोहा पुल ध्वस्त होने के बाद नये पुल के निर्माण को लेकर दो सरकारी विभागों के बीच खींचतान सामने आयी है. पुराने पुल के टूटने से अमौर और जलालगढ़ प्रखंडों की दर्जनों पंचायतों की बड़ी आबादी का सड़क संपर्क प्रभावित है. इसी बीच निर्माणाधीन नये पुल के धीमे काम को लेकर ग्रामीण कार्य विभाग और बिजली विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं.

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ग्रामीण कार्य विभाग का कहना है कि पुल निर्माण के रास्ते में 33 केवी बिजली लाइन बड़ी बाधा बनी हुई है. वहीं बिजली विभाग का कहना है कि लाइन हटाने के लिए करीब 9 लाख रुपये का एस्टीमेट छह माह पहले ही ग्रामीण कार्य विभाग को दिया जा चुका है, लेकिन राशि उपलब्ध नहीं करायी गयी है. ऐसे में पोल शिफ्टिंग का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है.

33 केवी लाइन को ग्रामीण कार्य विभाग ने बताया बड़ी बाधा

ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल बायसी के कनीय अभियंता रंजीत कुमार के अनुसार असियानी घाट पर नये पुल का निर्माण कार्य जारी है, लेकिन बिजली की 33 केवी लाइन सुरक्षा के लिहाज से बड़ी बाधा बनी हुई है. इस लाइन को हटाने या स्थानांतरित करने के लिए बिजली विभाग को कई बार पत्राचार किया गया है.

जेई के अनुसार लाइन स्थानांतरित नहीं होने के कारण निर्माण कार्य की रफ्तार प्रभावित हो रही है. विभाग की ओर से इसे पुल निर्माण में आ रही प्रमुख अड़चनों में शामिल बताया जा रहा है.

बिजली विभाग बोला- छह माह पहले दिया 9 लाख का एस्टीमेट

बिजली विभाग के जेई श्रीकांत दास के अनुसार पोल शिफ्टिंग के लिए ग्रामीण कार्य विभाग को करीब छह माह पहले ही लगभग 9 लाख रुपये का एस्टीमेट बनाकर दिया जा चुका है. उनका कहना है कि एस्टीमेट की राशि बिजली विभाग को आवंटित होते ही पोल शिफ्टिंग का काम कर दिया जायेगा.

इस तरह दोनों विभागों के बयानों से साफ है कि पुल निर्माण की गति को लेकर 33 केवी लाइन और पोल शिफ्टिंग का मामला महत्वपूर्ण अड़चन बना हुआ है.

13.50 करोड़ की योजना, 3 नवंबर तक पूरा करना है पुल

राज्य योजना के तहत नाबार्ड से संबंधित इस परियोजना में असियानी घाट पर पुराने पुल के समानांतर 13.50 करोड़ रुपये की लागत से नया उच्चस्तरीय आरसीसी पुल बनाया जा रहा है. पुल की लंबाई 177.52 मीटर और स्पेन सात होगा. इसके अलावा करीब 300 मीटर एप्रोच पथ का निर्माण होना है.

नये पुल के निर्माण की अंतिम तिथि 3 नवंबर 2026 निर्धारित है. लेकिन मौजूदा स्थिति यह है कि अब तक पुल के केवल दो पाये ही तैयार हो सके हैं. ऐसे में ग्रामीणों की चिंता बढ़ गयी है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य कैसे पूरा होगा.

स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि बिजली विभाग जल्द से जल्द हाईवोल्टेज लाइन और पोल शिफ्टिंग की समस्या का समाधान करे, ताकि पुल का निर्माण तेज हो सके और लोगों को आवागमन की सुविधा मिल सके.

पुराना पुल टूटने के चौथे दिन भी नदी में गिरे ट्रक का पता नहीं

असियानी घाट पर बना पुराना लोहा पुल उस समय ध्वस्त हो गया था, जब उस पर एक ओवरलोड ट्रक गुजर रहा था. पुल टूटने के दौरान ट्रक नदी में समा गया. घटना के चौथे दिन भी ट्रक का पता नहीं चल सका है.

एसडीआरएफ की टीम लगातार नदी में सर्च अभियान चलाकर ट्रक की तलाश कर रही है. वहीं प्रशासन ने एहतियात के तौर पर क्षतिग्रस्त पुल के दोनों तरफ ईंट की पक्की दीवार बनाकर रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया है. सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल की तैनाती भी की गयी है.

छोटी नाव के सहारे नदी पार कर रहे ग्रामीण

पुराना पुल बंद होने के बाद प्रशासन की ओर से नदी पार करने के लिए नाव का परिचालन शुरू किया गया है. हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि छोटी नाव होने के कारण एक बार में केवल चार से पांच लोग ही सवार हो पाते हैं. इससे नदी किनारे लोगों की लंबी कतार लग रही है और उन्हें अपनी बारी के लिए काफी देर इंतजार करना पड़ रहा है.

आसियानी गांव की बीबी नेहा ने बताया कि वह जरूरी काम से खाता हाट जा रही थीं और करीब आधे घंटे से कड़ी धूप में नाव का इंतजार कर रही थीं. उनका कहना है कि पुल चालू रहता तो वह काफी पहले अपने काम के लिए पहुंच जातीं, लेकिन पुल टूटने के बाद काफी परेशानी हो रही है.

Amaur Asiyani Bridge Construction: पूर्णिया और अररिया जाने में बढ़ी दूरी और किराया

आसियानी निवासी मो शाबीर ने बताया कि पुराना पुल चालू रहने के दौरान जलालगढ़, पूर्णिया, अररिया और कसबा सहित अन्य जगहों पर जाना आसान था. खेती और दूसरे काम के लिए सामान लाने-ले जाने में भी परेशानी नहीं होती थी.

अब पुल टूटने के बाद लोगों को वैकल्पिक रास्ते से जाना पड़ रहा है. ग्रामीणों के अनुसार जलालगढ़, पूर्णिया, अररिया सहित अन्य जगहों तक पहुंचने के लिए करीब 8 से 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है. इससे समय के साथ आने-जाने का किराया भी बढ़ गया है. ग्रामीणों की मांग है कि पुराने पुल के टूटने से पैदा हुई परेशानी को देखते हुए नये पुल का निर्माण तेजी से पूरा कराया जाये.

फोटो | Prabhat Khabar Network
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फोटो - नाव का इंतजार करती महिला व अन्य  फोटो - एसडीआरएफ की सर्च करते हुए  फोटो - टूटा पुल | Prabhat Khabar Network
फोटो - नाव का इंतजार करती महिला व अन्य फोटो - एसडीआरएफ की सर्च करते हुए फोटो - टूटा पुल | Prabhat Khabar Network

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