आंखों की जांच से पहले मरीज व परिजन को डॉक्टर करेंगे नेत्रदान के लिए जागरूक
Author Prabhat khabar digital desk
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पूर्णिया : अगर आपको आंखों की कोई समस्या है और आप सरकारी अस्पताल में जांच के लिए पहुंचे हैं तो डॉक्टर आपको नेत्रदान की सलाह देंगे. यह सुनकर आपको अटपटा लगे और हो सकता है कि आप घबरा भी जाएं. मगर यह केवल जागरूकता के लिए है. आपके साथ गये परिजन को भी नेत्रदान का […]
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पूर्णिया : अगर आपको आंखों की कोई समस्या है और आप सरकारी अस्पताल में जांच के लिए पहुंचे हैं तो डॉक्टर आपको नेत्रदान की सलाह देंगे. यह सुनकर आपको अटपटा लगे और हो सकता है कि आप घबरा भी जाएं. मगर यह केवल जागरूकता के लिए है. आपके साथ गये परिजन को भी नेत्रदान का पाठ पढ़ाया जायेगा. असल में स्वास्थ्य विभाग की ओर से नेत्रदान जागरूकता पखवारा चलाया जा रहा है.
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असल में इस अभियान के पीछे भी कुदरत का करिश्मा ही है. करिश्मा यह है कि मानव के देहांत के साथ ही आंखों का अंत नहीं होता है. मानव की मृत्यु के बाद चार घंटे तक आंखें जिंदा रहती हैं.
अगर चार घंटे के अंदर नेत्रदान सुनिश्चित हो जाये तो फिर उसके विभिन्न हिस्सों के प्रत्यारोपण के लिए 36 घंटे का मौका मिल जाता है. स्वास्थ्य विभाग की कोशिश यही बताने की है कि दुनिया से जाते-जाते आप अपनी आंखों की रोशनी दूसरे को दुनिया को देखने के लिए दे सकते हैं. इस संबंध में सदर अस्पताल के नेत्र सर्जन डॉ. एस के वर्मा ने बताया कि अभी नेत्रदान जागरूकता पखवारा चलाया जा रहा है.
नेत्र विभाग आनेवालों को पखवारा के तहत नेत्रदान के लिए प्रेरित किया जायेगा. उन्होंने बताया कि अगर कोई व्यक्ति नेत्रदान करता है तो उसके नेत्र के हिस्से का उपयोग 3 से 4 मरीजों की आखों के उपचार में किया जा सकता है. जागरूकता कार्यक्रम के तहत यह बताया जा रहा है कि नेत्रदान की बदौलत मृत्यु के बाद भी आप अमर हो जाते हैं.
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