Purnia University: विवि ने आरक्षण रोस्टर विवाद पर लिया फैसला, स्नातक पार्ट वन में नामांकन स्थगित
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Sep 2022 5:12 AM
Purnia University ने आरक्षण रोस्टर पर विवाद के बीच स्नातक पार्ट वन में नामांक को स्थगित कर दिया है. इस संबंध में डीन छात्र कल्याण प्रो. मरगूब आलम की ओर से सभी अंगीभूत एवं संबंद्ध महाविद्यालय के प्रधानाचार्य और प्रभारी प्रधानाचार्य को बुधवार को एक पत्र प्रेषित किया गया.
पूर्णिया. आरक्षण रोस्टर पर विवाद के बीच पूर्णिया विवि ने स्नातकस्तरीय कोर्सेस के पार्ट वन में नामांकन स्थगित कर दिया है. इस संबंध में डीन छात्र कल्याण प्रो. मरगूब आलम की ओर से सभी अंगीभूत एवं संबंद्ध महाविद्यालय के प्रधानाचार्य और प्रभारी प्रधानाचार्य को बुधवार को एक पत्र प्रेषित किया गया. इसमें बताया गया कि शैक्षणिक सत्र 2022-23 के स्नातक कक्षाओं बीए, बीएससी, बीकॉम एवं वोकेशनल कोर्स में 26.8.2022 से 5.9 2022 तक नामांकन लेने के लिए निर्देश दिया गया था जिसे अपरिहार्य कारणवश अगले आदेश तक स्थगित किया जाता है.
कुलपति के आदेशानुसार यह निर्णय लिया गया है. इस आशय की जानकारी उपकुलसचिव शैक्षणिक को भी दी गयी है. इसमें 25 अगस्त के उपकुलसचिव शैक्षणिक के एक पत्र का प्रसंग भी दर्शाया गया है. विवि मीडिया पदाधिकारी सह डीन साइंस प्रो. अंजनी मिश्रा ने नामांकन स्थगित किये जाने की पुष्टि की.
जदयू के शिष्टमंडल ने कुलसचिव डॉ घनश्याम राय को आवेदन देकर आरक्षण रोस्टर में लापरवाही बरतनेवालों को चिह्नित कर कार्रवाई करने की मांग की. युवा जदयू जिलाध्यक्ष राजू कुमार मंडल ने आरोप लगाया कि सत्र 2022 – 23 में स्नातक नामांकन के लिए मेधा सूची में बड़े पैमाने पर आरक्षण का उल्लंघन किया गया है. सामान्य श्रेणी की 50 प्रतिशत सीट समान्य वर्ग के लिए आरक्षित करने का आरोप लगाया. इसे पिछड़े एवं दलित समाज के छात्रों के साथ अन्याय करार दिया. छात्र जदयू के प्रदेश उपाध्यक्ष माणिक आलम ने विवि की ओर से जारी आरक्षण रोस्टर में लापरवाही का आरोप लगाते हुए इसे आरक्षण घोटाला करार दिया है.
राजद के जिला प्रवक्ता एवं पूर्णिया विश्वविद्यालय बनाओ संघर्ष समिति के संस्थापक डॉ. आलोक राज ने पूर्णिया विश्वविद्यालय के डीएसडब्लू से मुलाकात की . मुलाकात के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्णिया विश्वविद्यालय में आरक्षण समाप्त करने की साजिश रची जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में बैठे कई पदाधिकारी राज्य की महागठबंधन सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. बिहार में समाजवाद की सरकार है. जो लोग भी समाजवाद के खिलाफ साजिश करेंगे उन्हें कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
– 50 प्रतिशत सीटें सामान्य श्रेणी के बजाय सवर्ण के लिए आरक्षित
– जेनरल कोटि का कटऑफ आरक्षित कोटि से काफी कम
– राज्य सरकार की 100 बिंदु रोस्टर प्रणाली का उल्लंघन
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