राजगीर में है अनछुए पयर्टन स्थल व द्वापर काल के मंदिर, पंच पहाड़ियों की गोद में बनी नेचर सफारी करती है आकर्षित
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Mar 2023 9:43 PM
राजगीर आयें और नेचर सफारी तथा जू सफारी की सैर नहीं करें, तो यहां की यात्रा अधूरी मानी जायेगी. पंच पहाड़ियों के मध्य प्रकृति की गोद में बना नेचर सफारी और वन्य प्राणी सफारी केवल भारतीय सैलानियों को नहीं, बल्कि दुनिया के सैलानियों को आकर्षित कर रहा है.
राजगीर को कुदरत ने इतनी नियामत बख्शी है कि यह छोटी सी जगह मौज मस्ती और सैर सपाटे के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मशहूर हो गयी है. यही वजह है कि दुनिया भर के लोग रोमांच, पर्यटन और तीर्थाटन करने के लिए यहां आते हैं. बिहार में सैलानियों की सबसे पसंदीदा जगहों में राजगीर नंबर वन है. यह अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए आदि काल से विख्यात है. पंच पहाड़ियां और नदियां यहां की खूबसूरती को बेमिसाल बनाती हैं. प्राकृतिक संपदा से भरपूर यहां की धरती पर्यटकों को काफी आकर्षित करती है. यहां बौद्ध धर्मावलंबियों को भगवान बुद्ध और जैन धर्मावलंबियों को तीर्थकर महावीर की पग ध्वनि सुनाई देती है.
राजगीर आयें और नेचर सफारी तथा जू सफारी की सैर नहीं करें, तो यहां की यात्रा अधूरी मानी जायेगी. पंच पहाड़ियों के मध्य प्रकृति की गोद में बना नेचर सफारी और वन्य प्राणी सफारी केवल भारतीय सैलानियों को नहीं, बल्कि दुनिया के सैलानियों को आकर्षित कर रहा है. नेचर सफारी में सैलानी केवल प्रकृति से साक्षात्कार ही नहीं करते हैं, बल्कि स्काई ग्लास ब्रिज का मजा भी लेते हैं. रही बात जू सफारी की तो यहां जंगल के राजा को पर्यटक नजदीक से देखते और कैमरों में कैद करते हैं. यहां शेर के अलावे बाघ, चीता, भालू और अनेक प्रजाति के हिरण सहित अन्य वन्य प्राणी हैं. आने वाले दिनों में अफ्रीकी गैंडा भी यहां दिखेगा .
ऐसे तो राजगीर का हर कोना प्राकृतिक सौंदर्य के साथ सांस्कृतिक विरासत से सजा और भरा पड़ा है. यहां ऐसे कई अनछुए पर्यटन स्थल हैं, जो एक बार देख लेने के बाद बार-बार आकर्षित करते रहते हैं. यहां की पंच पहाड़ियां विश्व की दूसरी पुरानी पहाड़ियों में शुमार है. पहाड़ियों पर बने साइक्लोपिनियन वाॅल चीन की दीवार से 500 साल पुरानी बतायी जाती है. वैभारगिरी पहाड़ी पर बना बाबा सिद्ध नाथ का मंदिर द्वापर कालीन है. यह मंदिर मगध सम्राट जरासंध द्वारा बनवायी गयी थी. यहां की पहाड़ियों पर अनेकों जैन मंदिर हैं. देश – दुनिया से आने वाले जैन धर्मावलंबी केवल पहाड़ों की वंदना ही नहीं करते हैं, बल्कि पहाड़ पर बने मंदिरों में पूजा-अर्चना भी करते हैं. बौद्ध धर्मावलंबी भगवान बुद्ध के स्मृति शेष को यहां याद करते हैं.
ऐतिहासिक वेणुवन और गृद्धकूट पर जाकर वह घंटों साधना और आराधना करते हैं. वास्तव में राजगीर को संस्कृति, प्रकृति और वन्य प्राणी का स्वर्ग कहा जाना चाहिए. यहां नेचर सफारी और जू सफारी के अलावे वेणुवन, पांडू पोखर, जयप्रकाश उद्यान, घोड़ाकटोरा झील, घोड़ाकटोरा इको पार्क आदि हैं. हवा में सैर करने के लिए यहां एक नहीं दो आकाशीय रज्जू मार्ग हैं. केविन रोपवे में परिवार के साथ हवा में सैर करते हुए विश्वशांति स्तूप पर पहुंचते हैं. यहां राज्य का दूसरा सबसे बड़ा गुरुद्वारा बनाया गया है.
राजगीर की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच बना नेचर सफारी पर्यटकों को खूब भा रहा है. देशी के अलावे विदेशी पर्यटकों को भी यह आकर्षित कर रहा है. यहां ग्लास स्काई वॉक ब्रिज, सस्पैंशन ब्रिज, जिप लाइन, साइक्लिंग जिप लाइन, तीरंदाजी, शूटिग रेंज सहित अनेक रोमांचक स्पाॅट हैं. यह बिहार नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है. नेचर सफारी का अबतक लाखों सैलानियों ने भ्रमण किया है. ग्लास ब्रिज यानि शीशे का पुल का आनंद भी तीन लाख से अधिक पर्यटक उठा चुके हैं. यह पर्यटकों के लिए किसी रोमांच से कम नहीं है. इसके नीचे गहरी खायी है .यह बिहार का पहला और देश का दूसरा स्काई ब्रिज है. जिप लाइन पर झूलकर पर्यटक हवा में सैर का आनंद लेते हैं. इसके अलावा सस्पेंशन ब्रिज, जीप वाइफ और राइफल शूटिंग भी लोगों का खूब भाता है.
नेचर सफारी में तितली पार्क भी है. वहां रंग बिरंगी तितलियां सैलानियों को मनोरंजन करती हैं. पर्यटन शुल्क चुका कर इसका आनन्द ले सकते हैं. नेचर सफारी में पुरानी परंपरा के अनुसार नये तरीके से मिट्टी, बांस और लकड़ी के कॉटेज बनाये गये हैं. पर्यटक इसमें शुल्क चुका कर रह सकते हैं.
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सैलानियों को हमेशा वन्यजीव अपनी ओर आकर्षित करते हैं. शेर, बाघ, चीता, भालू आदि हिंसक वन्यजीवों से जितना डर लोगों लगता है, उतना ही नजदीक से देखने का मन भी करता है. सैलानी जू सफारी में घूमना काफी पसंद करते हैं. नजदीक से शेर, बाघ, चीता आदि को देख रोमांचित हो जाते हैं. राजगीर जू सफारी के आंकड़े बताते हैं कि यहां सैलानी बड़ी संख्या में पहुंचकर आनंद उठा रहे हैं. 191.12 हेक्टेयर में फैले जू सफारी को अबतक तीन लाख से अधिक पर्यटकों ने देखा है. सैलानियों को मनोरंजन के लिए इस जू सफारी में छह शेर, तीन बाघ, चार चीता, तीन भालू, 16 सांभर और अन्य प्रकार के हिरण जैसे चीतल, ब्लैकबक, हाॅग डियर, वार्किंग डियर एवं अन्य वन्यजीव हैं. इस जू सफारी में खुले में विचरण करने वाले अलग-अलग बाड़ों में रहने वाले वन्यजीवों के लिए 10 तालाब बनाये गये हैं. प्रतिदिन कम से कम एक हजार सैलानी जू सफारी का आनंद उठा रहे हैं.
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