ज्येष्ठ मास का अधिकमास शुरू, 15 जून तक मांगलिक कार्यों पर रहेगा विराम

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ज्येष्ठ मास का अधिकमास शुरू

Patna News:(संवाददाता, पटना) ज्येष्ठ मास में पड़ने वाला अधिकमास रविवार से शुरू हो गया है। इसके साथ ही अगले एक महीने तक शादी-विवाह, जनेऊ, मुंडन, भूमि पूजन, गृह प्रवेश तथा चल-अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा।

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Patna News:(संवाददाता, पटना) ज्येष्ठ मास में पड़ने वाला अधिकमास रविवार से शुरू हो गया है। इसके साथ ही अगले एक महीने तक शादी-विवाह, जनेऊ, मुंडन, भूमि पूजन, गृह प्रवेश तथा चल-अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। यह अधिकमास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक चलेगा।

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इस मास के अधिपति भगवान विष्णु माने जाते हैं, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि प्रत्येक 32 महीने और 16 दिन के बाद मलमास या अधिकमास आता है। सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने को संक्रांति कहा जाता है। सामान्यतः एक सौर वर्ष में 12 संक्रांतियां होती हैं, लेकिन जब किसी चंद्र मास में संक्रांति नहीं होती, तब अधिकमास की स्थिति बनती है।

संतुलन का मास है मलमास

राकेश झा ने वशिष्ठ सिद्धांत का हवाला देते हुए बताया कि भारतीय गणना पद्धति के अनुसार सूर्य वर्ष 365 दिन और लगभग 6 घंटे का होता है, जबकि चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। यही अंतर हर तीन वर्ष में लगभग एक महीने के बराबर हो जाता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए अतिरिक्त चंद्र मास जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है।

भगवान विष्णु को माना जाता है इसका अधिपति

उन्होंने बताया कि अधिकमास के अधिपति भगवान श्रीहरि विष्णु हैं। भगवान विष्णु का एक नाम पुरुषोत्तम भी है, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। ऋषि-मुनियों ने प्रत्येक चंद्र मास के लिए अलग-अलग देवताओं का निर्धारण किया था, लेकिन अतिरिक्त मास का अधिपति बनने के लिए कोई देवता तैयार नहीं हुए। तब भगवान विष्णु ने इस मास का भार स्वीकार किया। इसी कारण यह मास मलमास के साथ-साथ पुरुषोत्तम मास के नाम से भी प्रसिद्ध हुआ।

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