एक मृतक अंगदाता बचा सकता है कई जिंदगियां, अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत

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कार्यक्रम के दौरान मौजूद अतिथि

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देश में अंग प्रत्यारोपण की भारी कमी है, जहां लाखों मरीजों को किडनी, लिवर और हृदय की जरूरत है. आईजीआईएमएस में आयोजित एक जागरूकता कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने अंगदान, विशेषकर मृतक अंगदान के महत्व पर जोर दिया. इस लेख में जानें कि कैसे आपका अंगदान कई जानें बचा सकता है.

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Patna News : भारतीय अंगदान दिवस के अवसर पर सोमवार को राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सोटो), बिहार ने आईजीआईएमएस के ओपीडी परिसर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया. इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि देश में अंग प्रत्यारोपण की जरूरत और उपलब्ध अंगों के बीच बड़ा अंतर है, जिसे केवल जनजागरूकता और स्वैच्छिक अंगदान से कम किया जा सकता है.

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देश में जरूरत लाखों की, उपलब्ध अंग बेहद कम

सोटो बिहार के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) मनीष मंडल ने कहा कि देश में हर साल करीब 2.5 लाख मरीजों को किडनी, 80 हजार को लिवर और 50 हजार मरीजों को हृदय प्रत्यारोपण की जरूरत होती है, लेकिन उपलब्ध अंगों की संख्या इसके मुकाबले काफी कम है. राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) के अनुसार देश में 18,911 अंग प्रत्यारोपण हुए, जिनमें 13,476 किडनी और 4,901 लिवर प्रत्यारोपण शामिल हैं. मृत अंगदाताओं की संख्या मात्र 1,128 रही.

परिवार को भी बताएं अंगदान की इच्छा

डॉ. मनीष मंडल ने कहा कि जब किसी मरीज को अंग की जरूरत होती है तो हर कोई अंग उपलब्ध होने की उम्मीद करता है, लेकिन स्वयं अंगदान की बात आने पर लोग पीछे हट जाते हैं. उन्होंने लोगों से स्वेच्छा से अंगदान की प्रतिज्ञा करने और इसकी जानकारी अपने परिवार को भी देने की अपील की, क्योंकि मृतक अंगदान की प्रक्रिया में परिजनों की सहमति महत्वपूर्ण होती है.

मृतक अंगदान बढ़ाने पर दिया गया जोर

आईजीआईएमएस के डीन अकादमिक प्रो. (डॉ.) ओम कुमार ने कहा कि प्रत्यारोपण की जरूरत वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि उपलब्ध अंग बहुत कम हैं. इस अंतर को कम करने के लिए मृतक अंगदान के प्रति व्यापक जागरूकता आवश्यक है.

विशेषज्ञों ने दी अंगदान की जानकारी

कार्यक्रम में यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. रोहित उपाध्याय ने अंग प्रत्यारोपण की मौजूदा सुविधाओं की जानकारी दी. नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. प्रेम शंकर पटेल ने किडनी दान और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया समझाई. आई बैंक बिहार के प्रभारी डॉ. नीलेश मोहन ने कॉर्निया दान और नेत्र प्रत्यारोपण के महत्व पर प्रकाश डाला. वहीं सोटो की आईईसी कंसल्टेंट एकता ने अंगदान से जुड़े मिथकों और भ्रांतियों को वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर दूर किया. कार्यक्रम में मरीजों और उनके परिजनों ने प्रश्नोत्तर और क्विज में भी भाग लिया.

मृत्यु के बाद कई अंग और ऊतकों का हो सकता है दान

विशेषज्ञों ने बताया कि चिकित्सकीय उपयुक्तता और निर्धारित प्रक्रिया के तहत मृत्यु के बाद हृदय, दोनों किडनी, लिवर, फेफड़े, पैंक्रियाज और आंत जैसे अंग दान किए जा सकते हैं. इसके अलावा कॉर्निया, त्वचा, हड्डी और हार्ट वॉल्व जैसे ऊतकों का भी दान संभव है. वहीं जीवित व्यक्ति निर्धारित परिस्थितियों में एक किडनी और लिवर का एक हिस्सा दान कर सकता है.


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