दिवाली के बाद अधिक जहरीली हुई उत्तर बिहार की हवा, नवंबर में सिर्फ सात दिन मुजफ्फरपुर का AQI 300 से कम

प्रदूषण के कारण पिछले कुछ दिनों से सांस और फेफड़े के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है. पिछले कुछ दिनों से उत्तर बिहार के कई जिलों में ओपीडी में इलाज कराने आने वाले 30 से 35 फीसदी लोग सांस और फेफड़े की समस्या से पीड़ित पाए गए है.
मुजफ्फरपुर. दिवाली और छठ के बाद से उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर, बेतिया, मोतिहारी, दरभंगा सहित अन्य जिलों की हवा अधिक प्रदूषित हो गयी है. बढ़ते प्रदूषण के कारण उत्तर बिहार के कई जिले हेल्थ इमरजेंसी की ओर हैं. मुजफ्फरपुर में पूरे नवंबर में सिर्फ सात दिन ऐसे हैं, जिस दिन एक्यूआइ 300 से कम रहा. सबसे कम एक्यूआइ 2 नवंबर को 141 था, जबकि अधिकतम एक्यूआइ 25 नवंबर को 389 रिकॉर्ड किया गया.
प्रदूषण के कारण पिछले कुछ दिनों से सांस और फेफड़े के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है. पिछले कुछ दिनों से उत्तर बिहार के कई जिलों में ओपीडी में इलाज कराने आने वाले 30 से 35 फीसदी लोग सांस और फेफड़े की समस्या से पीड़ित पाए गए है. दरभंगा स्थित डीएमसीएच के मेडिसिन विभाग में यह आंकड़ा 25 से 30 फीसदी का है. बेतिया और मोतिहारी में इस तरह की बीमारी से ठीक हो चुके मरीजों की तकलीफ बढ़ गयी है. डॉक्टरों ने भी इस समस्या को लेकर चिंता जताते हुये लोगों को बचाव के उपाय करने के साथ अलर्ट रहने की हिदायत दी है.
मौसम परिवर्तन का असर हवा की गुणवत्ता पर दिख रहा है. 27 नवंबर को दोपहर 12 बजे बेतिया में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया. बीते दिनों के सभी रिकॉर्ड को तोड़ते हुए यहां के कमलनाथ नगर की एक्यूआइ यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स 477 रिकॉर्ड किया गया.
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3 दिसंबर:356
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2 दिसंबर:349
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1 दिसंबर:359
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30 नवंबर:371
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29 नवंबर:387
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28 नवंबर:362
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27 नवंबर:348
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26 नवंबर:336
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25 नवंबर:389
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गया में पिछले कई दिनों से हवा जहरीली बनी हुई है. शनिवार को तो स्थिति और भी खराब रही. करीमंगज स्थित वायू प्रदूषण मापक स्टेशन के आंकड़ाें के मुताबिक एयर क्वालिटी इंडेक्स औसतन 404 दर्ज किया गया है. जिसे बेहद गंभीर माना जाता है. न्यूनतम एयर क्वालिटी इंडेक्स 310 और अधिकतम 500 दर्ज किया गया है. मालूम हो कि एक्यूआइ 0-50 के बीच अच्छा माना जाता है, लेकिन यह गया हैं 401-500 के बीच है. मुंगेर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो डॉ रंजीत कुमार वर्मा कहते हैं कि गया में एक्यूआइ का बढ़ा मान काफी चिंता की बात है. पीएम-10 और पीएम-2.5 दोनों के स्तर के बढ़ने से खून की धमनियां प्रभावित होती हैं और इससे कई बीमारियां होती हैं.
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