राजधानी में पार्किंग का जिम्मा संभाल रही एजेंसी पर नगर निगम ने कराया FIR, मेदांता अस्पताल के पास ठेला चालकों से वसूली का आरोप

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पटना नगर निगम फाइल फोटो

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Patna Smart Parking : पटना नगर निगम ने पार्किंग व्यवस्था में अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कदम उठाया है. मेदांता अस्पताल के पास अवैध वसूली के आरोप में एक एजेंसी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. इस कार्रवाई से शहर की पार्किंग व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है.

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Patna Smart Parking : पटना नगर निगम ने शहर की पार्किंग व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. कंकड़बाग अंचल के वार्ड नंबर 35 में मेदांता अस्पताल के सामने स्मार्ट पार्किंग स्थल पर अवैध वसूली के आरोप में ठेकेदार एजेंसी अमेजिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. आरोप है कि ठेला और वेंडिंग करने वालों से 100 से 300 रुपये तक वसूले जा रहे थे, जबकि स्थानीय लोगों से हजारों रुपये मांगने की शिकायत मिली थी.

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मेदांता अस्पताल के सामने पार्किंग स्थल पर FIR

पटना नगर निगम ने कंकड़बाग थाने में एजेंसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी है. मामला वार्ड नंबर 35 स्थित मेदांता अस्पताल के सामने आवंटित स्मार्ट पार्किंग स्थल से जुड़ा है. निगम को यहां अवैध वसूली और पार्किंग संचालन में अनियमितता की शिकायतें मिली थीं.

ठेला चालकों से 100 से 300 रुपये तक वसूली का आरोप

शिकायतों के अनुसार पार्किंग स्थल के आसपास कारोबार करने वाले वेंडरों और ठेला चालकों से कथित तौर पर 100 से 300 रुपये तक लिये जा रहे थे. उपलब्ध शिकायतों के आधार पर प्रतिदिन साढ़े चार हजार रुपये तक की वसूली किये जाने की बात सामने आयी है. स्थानीय लोगों से भी रंगदारी के रूप में हजारों रुपये मांगने के आरोप लगे हैं.

25 जुलाई को ही दिया गया था अंतिम नोटिस

नगर निगम ने कार्रवाई से पहले एजेंसी को 25 जुलाई को अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी किया था. निगम ने एजेंसी की ओर से दी गयी दलीलों को स्वीकार नहीं किया था. नोटिस में 14 प्रमुख बिंदुओं पर एजेंसी की कार्यप्रणाली को नियमों के अनुरूप नहीं माना गया था.

स्मार्ट पार्किंग के लिए 13.70 करोड़ रुपये का निवेश तय था

नगर निगम के अनुसार एजेंसी को पटना के 37 पार्किंग स्थलों को स्मार्ट पार्किंग के रूप में विकसित करने की जिम्मेदारी दी गयी थी. इसके तहत फास्टैग, सेंसर, ऑटोमैटिक बूम बैरियर, सीसीटीवी और मोबाइल एप जैसी सुविधाएं लगायी जानी थीं. इसके लिए एजेंसी को 13.70 करोड़ रुपये का निवेश करना था.

स्मार्ट सिस्टम की जगह मैन्यूअल पर्ची से वसूली

नगर निगम की जांच में आरोप लगाया गया कि तय स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के बजाय एजेंसी मैन्यूअल रसीद के माध्यम से पार्किंग शुल्क वसूलती रही. इससे पार्किंग संचालन की निगरानी और वास्तविक कलेक्शन का हिसाब रखने पर भी सवाल उठे.

ट्रांसपोर्ट नगर में भी अनियमितता का आरोप

जुलाई में जारी निगम के पत्र में ट्रांसपोर्ट नगर ट्रक स्टैंड से जुड़ी अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया था. निगम के अनुसार वहां बालू-गिट्टी विक्रेताओं को जगह उपलब्ध कराकर उनसे मासिक किराया वसूले जाने की बात जांच में सामने आयी थी.

ऑडिट में 11.51 करोड़ के नुकसान का उल्लेख

नगर निगम के ऑडिट से जुड़े निष्कर्षों में एजेंसी की कार्यप्रणाली से निगम को करीब 11.51 करोड़ रुपये की वित्तीय क्षति होने की बात सामने आयी थी. यह आंकड़ा पार्किंग व्यवस्था को लेकर निगम और एजेंसी के बीच चल रहे विवाद में एक महत्वपूर्ण बिंदु रहा है.

ऑनलाइन कलेक्शन का डेटा नहीं देने का आरोप

नगर निगम ने एजेंसी से पिछले तीन वित्तीय वर्षों के ऑनलाइन कलेक्शन पोर्टल का एक्सेस, लॉगिन आइडी और पासवर्ड मांगा था. निगम का आरोप है कि एजेंसी ने यह जानकारी उपलब्ध नहीं करायी. इससे कलेक्शन की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे.

अतिक्रमण और कुप्रबंधन के भी आरोप

एजेंसी पर पार्किंग स्थलों पर अतिक्रमण, कुप्रबंधन और कर्मचारियों की अनुपस्थिति समेत कई आरोप लगाये गये हैं. निगम के मुताबिक कई बार अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आयीं. 10 से अधिक बार समझौते के उल्लंघन का उल्लेख करते हुए अनुबंध रद्द करने और बैंक गारंटी व सुरक्षा राशि जब्त करने की चेतावनी भी दी गयी थी.

पहले भी निगम की कार्रवाई पर मिला था स्टे

नगर निगम की ओर से पहले भी एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की गयी थी. उस समय एजेंसी हाईकोर्ट से स्टे ले आयी थी. निगम का कहना है कि इसके बाद भी एजेंसी की कार्यशैली में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ.

करोड़ों की वसूली के बीच पार्किंग से कम राजस्व

पटना नगर निगम को वित्तीय वर्ष 2025-26 में 22 अलग-अलग स्रोतों से करीब 226.7 करोड़ रुपये का राजस्व मिला. लेकिन इसी अवधि में पार्किंग से निगम की आय केवल 1 करोड़ 95 लाख 65 हजार 439 रुपये रही. वहीं स्टॉल लगाने वाले लोगों से करीब 2.07 करोड़ रुपये की वसूली होने की बात सामने आयी है.

पार्किंग राजस्व और वसूली के आंकड़े उठा रहे सवाल

पार्किंग व्यवस्था से जुड़े इन आंकड़ों ने निगम के सामने राजस्व संग्रह और निगरानी की चुनौती को उजागर किया है. एक ओर स्मार्ट पार्किंग के लिए आधुनिक सिस्टम विकसित करने की योजना थी, वहीं दूसरी ओर मैन्यूअल पर्ची और कथित अनधिकृत वसूली की शिकायतें सामने आयीं. अब प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले की जांच में वसूली और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी.

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