आईजीआईएमएस प्रश्नपत्र लीक मामला: एमबीबीएस के छह छात्र चार सप्ताह के लिए निलंबित

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IGIMS पटना

इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) ने एमबीबीएस पूरक परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक और धांधली मामले में छह मेडिकल छात्रों को चार सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई छात्र अनुशासन समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई है.

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IGIMS : इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में एमबीबीएस पूरक परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक और धांधली मामले में प्रशासन ने छह मेडिकल छात्रों को चार सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया है. कार्रवाई छात्र अनुशासन समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई है. हालांकि, मामले में अब तक संस्थान की ओर से प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है.

छात्रावास खाली करने का निर्देश

निलंबित छात्रों में 2022 बैच के अभिजीत कुमार, अंकित चंद्रा और यश राज सिन्हा तथा 2023 बैच के अमित कुमार, अविनाश प्रकाश और सुमित कुमार शामिल हैं. आईजीआईएमएस प्रशासन द्वारा जारी कार्यालय आदेश के अनुसार सभी छात्रों को चार सप्ताह तक छात्रावास और कॉलेज परिसर से बाहर रहने का निर्देश दिया गया है. साथ ही इस अवधि में उन्हें संस्थान की ओर से किसी भी प्रकार का पुरस्कार या सम्मान नहीं दिया जाएगा.

27 अप्रैल को रद्द हुई थी परीक्षा

जांच समिति की रिपोर्ट में पूरक परीक्षा में धांधली की पुष्टि होने के बाद 27 अप्रैल को एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की सप्लीमेंट्री परीक्षा रद्द कर दी गई थी. इसके साथ ही परीक्षा विभाग के कर्मचारियों और सात छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा गया था. बाद में परीक्षा प्रणाली में भी कई प्रशासनिक बदलाव किए गए, जिन्हें 31 जुलाई से लागू किया गया.

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तीन जांच समितियां गठित की गई थीं

मामले की विस्तृत जांच के लिए पांच मई को तीन अलग-अलग समितियां गठित की गई थीं. पहली समिति छात्रों के जवाब का परीक्षण करने, दूसरी भविष्य में कदाचार मुक्त परीक्षा के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने और तीसरी पूरी परीक्षा प्रक्रिया की समीक्षा करने के लिए बनाई गई थी. इन समितियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई.

दिसंबर 2025 की परीक्षा में सामने आई थीं गड़बड़ियां

एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की सप्लीमेंट्री परीक्षा दिसंबर 2025 में हुई थी, जिसमें करीब 130 छात्र शामिल हुए थे. परीक्षा के बाद एक अज्ञात ईमेल के आधार पर अप्रैल 2026 में जांच शुरू की गई. प्रभारी निदेशक सह डीन (अकादमिक) डॉ. ओम कुमार की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई थी.

उत्तर पुस्तिकाओं में मिले थे संदिग्ध संकेत

जांच के दौरान कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में हस्ताक्षरों में असमानता पाई गई. रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ कॉपियों में पहले और अंतिम पृष्ठ पर किए गए हस्ताक्षर एक जैसे थे, जबकि बीच के पृष्ठ पर अलग हस्ताक्षर मिले. समिति ने प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाओं के साथ छेड़छाड़ की संभावना से भी इनकार नहीं किया था.

एफआईआर अब तक नहीं

जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट 27 अप्रैल को ही आईजीआईएमएस प्रशासन को सौंप दी थी, लेकिन इतने गंभीर मामले के बावजूद अब तक संस्थान की ओर से पुलिस में प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है. यह सवाल भी उठ रहा है कि जब धांधली की पुष्टि हो चुकी थी, तो कानूनी कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई.

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आनंद तिवारी

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