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गांधी मैदान बम ब्लास्ट के पीड़ित परिवार को मलाल, मोदी सरकार ने नहीं ली परिवार वालों की सुधि

Updated at : 11 Sep 2024 9:10 PM (IST)
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गांधी मैदान बम ब्लास्ट के पीड़ित परिवार को मलाल, मोदी सरकार ने नहीं ली परिवार वालों की सुधि

Bihar: पटना के गौरीचक के कमर जी गांव के रहने वाले राज नारायण सिंह 2013 की हुंकार रैली में उस समय बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को देखने के लिए गांधी मैदान गए थे.

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फुलवारी शरीफ, (अजित कुमार ) साल 2013 में प्रधानमंत्री मोदी पटना के गांधी मैदान में रैली करने के लिए पहुंचे थे. इस दौरान वहां हुए बम ब्लास्ट में पटना के गौरीचक के कमर जी गांव के रहने वाले राज नारायण सिंह की मौत हो गई थी. वही, इस केस में जब आज कोर्ट ने आरोपियों की फांसी की सजा कम करके उम्र कैद में बदलने का फैसला किया तो मानो राज नारायण सिंह के परिवार पर दुखो का पहाड़ टूट गया.

हुंकार रैली में हुई थी राजनराण सिंह की मौत

बता दें कि पटना के गौरीचक के कमर जी गांव के रहने वाले राज नारायण सिंह 2013 की हुंकार रैली में उस समय बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को देखने के लिए गांधी मैदान गए थे. जहां बम ब्लास्ट में उनकी मौत हो गई थी.

कोर्ट के फैसले से आहत है परिवार

राज नारायण सिंह के परिवार के लोग कोर्ट द्वारा आरोपियों को फांसी की सजा कम करके उम्र कैद करने का फैसले से सहमत नहीं है बल्कि उनकी पत्नी शारदा देवी बेटे विनोद सिंह मनोज सिंह का कहना है की आरोपितों को फांसी ही होनी चाहिए. बेटे मनोज सिंह निजी कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड का काम करते हैं, वहीं दूसरा बेटा विनोद सिंह पटना सिटी के पेट्रोल पंप पर काम करते हैं. परिवार वालों को मलाल है कि सरकार ने मुआवजा तो जरूर दिया था लेकिन उस परिवार का कुछ भी भला नहीं हुआ.

Gandhi Maidan bomb blast victim family regrets Modi government did not take care of them

प्रधानमंत्री मोदी के वादे के बावजूद नहीं मिली नौकरी

परिवार वालों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने उस समय ऐलान किया था कि अगर उनकी सरकार बनेगी तो परिवार वालों को सरकारी नौकरी दी जाएगी जो अब तक नहीं मिला. नरेंद्र मोदी तीसरी बार सत्ता में आए लेकिन गांधी मैदान बम ब्लास्ट में जिन लोगों ने अपनी शहादत दी उनके परिवार वालों को भूल गए. परिवार के लोग बताते हैं कि गांव में जाने वाली सड़क का नाम राज नारायण सिंह के नाम पर नामकरण जरूर हुआ लेकिन अब उस सड़क को भी लोग तोड़फोड़ कर नाम हटाने के लिए दांव पेंच लगा रहे हैं.

बटाई पर खेतों में काम करते हैं लड़के

परिवार के लड़के बटाई पर खेतों में काम करते हैं. मृतक राज नारायण सिंह की पत्नी शारदा देवी अब 70 वर्ष की हो चुकी है. बेटे मनोज सिंह ने उन्हें बताया कि टीवी पर समाचार आ रहा है की कोर्ट में जिन चार लोगों को फांसी की सजा सुनाई थी उन्हें उम्र कैद में बदल दिया गया है यह सुनते ही उनकी पत्नी की आंखों से आंसू बरसने लगे और बोली कि हमें यह मंजूर नहीं उन्हें फांसी ही होनी चाहिए. हम लोग ऐसे दरिंदों को माफ नहीं कर सकते.

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Prashant Tiwari

लेखक के बारे में

By Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत पंजाब केसरी से करके राजस्थान पत्रिका होते हुए फिलहाल प्रभात खबर डिजिटल के बिहार टीम तक पहुंचे हैं, देश और राज्य की राजनीति में गहरी दिलचस्पी रखते हैं. साथ ही अभी पत्रकारिता की बारीकियों को सीखने में जुटे हुए हैं.

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