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Coal Scam: कोयले के काले खेल का बिहार से भी जुड़ा है तार, जानें CBI जांच में किस दल के नेता का हुआ खुलासा

Updated at : 02 Dec 2020 8:01 AM (IST)
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Coal Scam: कोयले के काले खेल का बिहार से भी जुड़ा है तार, जानें CBI जांच में किस दल के नेता का हुआ खुलासा

पश्चिम बंगाल के कुनूस्तोरिया, कजोरा समेत अन्य कोलयरी से बड़े स्तर पर अवैध कोयला के धंधे के तार झारखंड के साथ बिहार से भी जुड़े हुए हैं. कोयले के इस काले खेल को लेकर हाल में सीबीआइ ने कोलकाता में मामला दर्ज कर व्यापक स्तर पर छापेमारी की थी. इसमें कई बातें निकलकर सामने आयी हैं.

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पश्चिम बंगाल के कुनूस्तोरिया, कजोरा समेत अन्य कोलयरी से बड़े स्तर पर अवैध कोयला के धंधे के तार झारखंड के साथ बिहार से भी जुड़े हुए हैं. कोयले के इस काले खेल को लेकर हाल में सीबीआइ ने कोलकाता में मामला दर्ज कर व्यापक स्तर पर छापेमारी की थी. इसमें कई बातें निकलकर सामने आयी हैं.

अवैध कोयले को बिहार के रास्ते रूट किया जाता था. यानी पश्चिम बंगाल के खादानों से गलत तरीके से निकलने वाले इस कोयले का काफी बड़ा हिस्सा बिहार में भी आता था. यहां से रूट होकर ये कोयला दूसरे राज्यों के अलावा नेपाल तक जाता था. चूंकि इस कोयला का दाम सरकारी मूल्य पर बिकने वाले कोयले से कम होता था, तो इसके ग्राहक भी काफी बड़ी संख्या में थे. इस पूरे अवैध कारोबार में बिहार की कुछ छोटी कंपनियां या लोग या माफिया जुड़े हुए थे.

सीबीआइ की जांच में इस मामले में झारखंड के ज्यादा लोगों की मिलीभगत सामने आयी है. इसमें कुछ कांग्रेस के नेता भी शामिल हैं. इनकी सांठगांठ ही बिहार के कुछ लोगों से मिली है. फिलहाल इस पूरे रैकेट का खुलासा करने में सीबीआइ की टीम जुटी हुई है.

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हालांकि इस पूरे मामले का मुख्य रैकेटियर आसनसोल का रहने वाला है. इसके अलावा कोलकाता के काफी लोग खासकर इसीएल (इस्टर्न कोल लिमिटेड) के कई प्रमुख पदाधिकारियों के अलावा सीआइएसएफ के पदाधिकारियों की भी मिलीभगत सामने आयी है. इनके अलावा झारखंड और बिहार के स्थानीय लोगों की मिलीभगत भी बड़ी संख्या में है.

जांच में यह बात सामने आयी कि पश्चिम बंगाल के कोलयरी से एक ट्रक के नंबर पर कई ट्रक कोयला निकल जाता था. इसी तरह एक ट्रेन के रेक के नाम पर दो से तीन रैक निकल जाते थे. इस तरह से होने वाले कोयला के अवैध कारोबार में सीआइएसएफ, रेलवे और इसीएल के अधिकारी की मिलीभगत है. ये लोग कोयला को खादान से निकालकर बाहर ले आते थे. फिर इसे स्थानीय माफियाओं के रैकेट की मिलीभगत से कई स्थानों पर बेचा जाता था.

Posted by: Thakur Shaktilochan

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