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बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री होगी महंगी, सरकार इस कानून में करने जा रही है संशोधन

Updated at : 19 Feb 2025 6:45 AM (IST)
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Bihar land Survey

Bihar land Survey

Bihar Land: बिहार में पिछली दफे करीब आठ साल पहले एमवीआर में बदलाव हुआ था. इसके बाद जमीन के रेट काफी बढ़ गये हैं. लेकिन पुराने एमवीआर पर सरकार रजिस्ट्री शुल्क और स्टांप ड्यूटी ले रही है.

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Bihar Land: पटना. अगर आप बिहार में जमीन खरीदना चाहते हैं तो जल्द करें, क्योंकि बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री महंगी होने जा रही है. बिहार सरकार ने जमीन की सरकारी कीमतों में संशोधन करने का मन बना लिया है. निबंधन विभाग मिनिमम वैल्यू रजिस्टर यानि एमवीआर बढ़ाने का फैसला कर लिया है. विभाग अब विचार कर रहा है कि इसमें कितनी बढ़ोतरी की जाये. इसके लिए निबंधन विभाग ने हर जिले से प्रस्ताव मांगा है.

आठ साल पहले हुआ था संशोधन

बिहार में पिछली दफे करीब आठ साल पहले एमवीआर में बदलाव हुआ था. इसके बाद जमीन के रेट काफी बढ़ गये हैं. लेकिन पुराने एमवीआर पर सरकार रजिस्ट्री शुल्क और स्टांप ड्यूटी ले रही है. नया एमवीआर लागू होने से सरकारी राजस्व में काफी वृद्धि होगी. निबंधन विभाग के सूत्रों के अनुसार जिला स्तर पर मिनिमम वैल्यू रजिस्टर को फिर से निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. सारे जिलों से जमीन का मिनिमम वैल्यू रजिस्टर बढ़ाने का प्रस्ताव निबंधन विभाग आयेगा. इसके बाद मुख्यालय स्तर पर इसकी समीक्षा की जाएगी. फिर नया मिनिमम वैल्यू रजिस्टर तय किया जायेगा.

क्या होता है एमवीआर

बिहार सरकार ने राज्य के हर जमीन का सरकारी दर तय कर रखा है. इसी आधार पर जमीन खरीददार को स्टांप खरीदना होता है. जब एक रैयत दूसरे रैयत को जमीन ट्रास्फर करता है तो उस समय जमीन का मालिक यानि सरकार एमवीआर का 8 परसेंट पैसा जमीन के नये रैयत से लेती है. इसमें रजिस्ट्री शुल्क के तौर पर एमवीआर की 2 परसेंट राशि ली जाती है. वहीं 6 परसेंट स्टांप ड्यूटी वसूली जाती है. रजिस्ट्री के कागजात पर जमीन का मूल्य कितान भी कम दिखाया गया हो, सरकार एमवीआर के आधार पर ही पैसा लेती है.

ऐसे लगेगी रैयत की जेब को चपत

जमीन मालिक यानि सरकार पूरे बिहार में जमीन का नया एमवीआर तय करेगी. निबंधन विभाग के सूत्रों के अनुसार पूरे बिहार में MVR में 25 से 50 परसेंट तक की वृद्धि हो सकती है. इसका मतलब ये हुआ कि जिस जमीन की रजिस्ट्री के लिए पहले सरकार को 3 लाख रुपये लगान के तौर पर देने पड़ रहे थे, उसके लिए अब पौने चार लाख से लेकर साढ़े चार लाख रुपये का लगान देना पड़ सकता है. ऐसे में जमीन की खरीद-बिक्री पहले से ज्यादा महंगी हो जायेगी.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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