'KC सिन्हा झांकी है, जमानत जब्त होना बाकी है', PK का लगा पोस्टर, सिर पर टोपी और गले में गमछा लिए दिखाया

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पटना में लगे पोस्टर की तस्वीर

Bankipur By Election: बिहार में बांकीपुर उपचुनाव से पहले पोस्टर वॉर शुरू हो गया है. पटना में जन सुराज के संस्थापक और कैंडिडेट प्रशांत किशोर का पोस्टर लगाया गया है. इस पोस्टर में लिखा है- KC सिन्हा तो झांकी है, जमानत जब्त होना अभी बाकी है.

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Bankipur By Election: बांकीपुर उपचुनाव को लेकर पार्टियां जीत की रणनीति बनाने में जुटीं हैं. साथ ही विरोधियों पर निशाना भी जमकर साधे जा रहे हैं. इस बीच पटना में पोस्टर वॉर की शुरुआत हो गया है. राजधानी में जन सुराज के संस्थापक और कैंडिडेट प्रशांत किशोर का पोस्टर लगाया गया है.

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पोस्टर में क्या-क्या दिखाया गया?

पोस्टर में लिखा है- KC सिन्हा तो झांकी है, जमानत जब्त होना अभी बाकी है. इसके साथ ही यह भी लिखा कि 'वोट नहीं नोट चाहिए'. पोस्टर में 'जन सुराज' की जगह 'धन सुराज' लिखा है. पोस्टर के नीचे में लिखा है, सौजन्य- बांकीपुर की जनता. इस पोस्टर में एक और खास बात यह है कि प्रशांत किशोर को सिर पर टोपी, गले में गमछा और हाथ में नोट लिए हुए दिखाया गया है.

जनसुराज को लगा झटका

पटना में लगे इस पोस्टर को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है. 30 जुलाई को बांकीपुर सीट पर उपचुनाव को लेकर वोट डाले जायेंगे. इससे पहले बुधवार को जन सुराज को झटका लगा. प्रो. केसी सिन्हा के साथ पहले के कई उम्मीदवार और पार्टी के प्रमुख चेहरे भाजपा में शामिल हो गए.

इनमें कुम्हरार से जनसुराज के उम्मीदवार रहे प्रो. केसी सिन्हा के अलावा राजनीतिक कार्यकर्ता बिट्टू सिंह और उनकी पत्नी प्रमुख रूप से शामिल हैं. साथ ही जनसुराज पार्टी के मनेर से उम्मीदवार रहे गोपाल सिंह, डॉ. किशोर कुमार सिंह के साथ कई लोग बीजेपी में शामिल हुए. प्रो. केसी सिन्हा जनसुराज के चर्चित उम्मीदवारों में रहे हैं.

बीजेपी को इस तरह मिली मजबूती

भाजपा में इन नेताओं के शामिल होने को विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि इन नेताओं के आने से भाजपा को शहरी इलाकों के साथ-साथ शिक्षाविदों और सामाजिक वर्गों में भी संगठनात्मक मजबूती मिलेगी.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जन सुराज से जुड़े प्रमुख चेहरों का लगातार दूसरे दलों की ओर रुख करना प्रशांत किशोर की पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण संकेत है. जबकि बीजेपी इसे अपने विस्तार अभियान की बड़ी सफलता के रूप में दिखा रही है. भाजपा नेताओं ने नए सदस्यों का स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि इनके अनुभव और जनसंपर्क का लाभ पार्टी को आगामी चुनाव में मिलेगा.

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